जम्मू-कश्मीर पर कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस, कहा लोग डरे हुए हैं

जम्मू-कश्मीर में प्रशासन द्वारा अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को वापस लौटने के आदेश के बाद शनिवार को कांग्रेस और उमर अब्दुल्ला ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.

उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाक़ात कर यह जानने की कोशिश की है कि आख़िर राज्य में सेना की इस क़दर तैनाती क्यों की जा रही है.

इस मुलाक़ात के बाद उमर अब्दुल्ला ने मीडिया को बताया कि राज्यपाल बीते दिन दिये अपने बयान को ही दोहरा रहे हैं.

वहीं, उमर अब्दुल्ला के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. कांग्रेस की ओर से सरकार से जवाब मांगने कश्मीर के ही ग़ुलाम नबी आज़ाद और कर्ण सिंह आए.

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि उनकी सरकार में कभी अमरनाथ यात्रा रद्द नहीं हुई लेकिन इस बार यह रद्द क्यों करनी पड़ी और एडवायज़री जारी करने से एक डर का माहौल है.

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश के लोग डरे हुए हैं और किसी भी सरकार ने पर्यटकों को वापस लौटने के लिए नहीं कहा है.

आज़ाद ने कहा कि आज के हालात 1990 की याद दिला रहे हैं क्योंकि अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात करने से चिंताजनक स्थिति बन चुकी है.

कर्ण सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश से जम्मू-कश्मीर के लोग प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने इस रियासत को मिलकर बनाया है और वहां भय पैदा किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सरकार साफ़-साफ़ बताए कि वह ऐसे क्यों क़दम उठा रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि अचानक अमरनाथ यात्रा को रोके जाने और पर्यटकों को राज्य छोड़ने के लिए कहना समझ से परे है.

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सुरक्षाबलों की बढ़ती तैनाती को देखकर जम्मू-कश्मीर के लोगों में खलबली मची है और सोमवार को केंद्र सरकार इस पूरे प्रकरण पर संसद में जवाब दे.

क्या कहा उमर अब्दुल्ला ने?

उमर अब्दुल्ला ने बताया कि, "जो इलाक़े आतंकवाद के शिकार नहीं हुए हैं. उन इलाक़ों को भी खाली किया गया है और इसका असर बाकी जगहों पर भी पड़ा है. इन सब बातों को लेकर हम गवर्नर से मिले. हम ये जानना चाहते हैं कि क्या हो रहा है? क्योंकि सही जवाब कहीं से मिल नहीं पाता. हमने यही बातें गवर्नर साहब से भी कही. हमने उनसे कहा कि आप कहते हैं कि हम अफ़वाहें फैलाने की कोशिश करते हैं लेकिन हम जहां से भी यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या हो रहा है तो हमें स्पष्ट जवाब नहीं मिलता."

अब्दुल्ला ने कहा कि जब कश्मीर के मौजूदा हालात पर अफ़सरों से पूछते हैं तो वो कहते हैं कि कुछ हो रहा है लेकिन वो भी कुछ स्पष्ट नहीं बोलते.

उन्होंने कहा, "जब हम पूछते हैं कि ये कुछ क्या है तो वे कहते हैं कुछ तो है. लेकिन यह क्या कुछ है तो वे कहते हैं ये हमें नहीं मालूम."

"35 ए पर लोगों का जो अंदेशा है वो है, लेकिन बात 370 की भी हो रही है. डिलिमिटेशन को लेकर बात हो रही है. लोग जम्मू-कश्मीर को तीन भागों में बांटे जाने को लेकर बातें कर रहे हैं."

'संसद में जवाब दे केंद्र'

उमर अब्दुल्ला ने कहा, "यही हमने गवर्नर साहब से पूछा तो उन्होंने हमें आश्वासन दिलाया कि उस दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा."

"उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के एलान के लिए कोई तैयारी नहीं की जा रही है. लोगों को मुतमइन करने (भरोसा दिलाने) के लिए गवर्नर साहब की तरफ़ से एक बयान भी जारी किया जाएगा."

"लेकिन हम चाहते हैं कि सोमवार को संसद में मरकज़ (केंद्र) की तरफ़ से भी एक ऐसा बयान आ जाये जिसके तहत हम समझ पायें कि कल का ये जो ऑर्डर था यात्रा ख़त्म करने का और पर्यटकों को यहां से निकालने का इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी. संसद से हम सुनना चाहते हैं कि यहां के लोगों को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है."

'लोग सब्र से काम लें'

वह कहते हैं, "जम्मू-कश्मीर के लोगों से गुज़ारिश है कि वो अपने जज़्बातों पर काबू रखें. कुछ लोग चाहते हैं कि क़ानून को अपने हाथ में लें या सड़कों पर उतर आएं, हमें इनकी इजाज़त नहीं देनी चाहिए. मेरी हर बाशिंदे से यही गुज़ारिश है कि इस मसले को लेकर शांति से पेश आएं. इस रियासत की खुसूसी (खास) स्थिति को नुकसान नहीं होने देंगे. चाहे सियासी तौर पर या क़ानूनी तौर पर कोशिशें करनी पड़े. लोग सब्र से काम लें."

"मैं केंद्र से यह पूछना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर को लेकर उनका क्या इरादा है इसे वो संसद में साफ़ करें."

अमरनाथ यात्रा रोकी गयी

शुक्रवार को भारतीय सेना ने ख़ुफ़िया जानकारियों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान से चरमपंथी, कश्मीर घाटी में अमरनाथ यात्रा पर हमले की योजना बना रहे हैं.

इसके फ़ौरन बाद ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं और राज्य में आने वाले पर्यटकों को तुरंत वापस जाने का निर्देश दिया.

भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा कि सुरक्षा बलों को एक सर्च ऑपरेशन के दौरान अमरनाथ यात्रा के रूट पर चरमपंथियों के एक ठिकाने से टेलीस्कोप समेत एक एम-24 अमरीकी स्नाइपर राइफ़ल और पाकिस्तान के ऑर्डिनेंश फैक्ट्री में निर्मित बारूदी सुरंग बरामद हुई है.

महबूबा ने भी कहा कि कश्मीर में लोग डरे हुए हैं

सरकार की ओर से घाटी में मौजूद तमाम पर्यटकों और अमरनाथ यात्रा कर रहे तीर्थ यात्रियों को कश्मीर छोड़ने की सूचना जारी करने के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने शुक्रवार रात अपने निवास स्थान पर एक आपात बैठक बुलाई.

इसमें जम्मू-कश्मीर के अन्य क्षेत्रीय दलों के नेता शामिल हुए जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के फ़ारूक़ अब्दुल्ला, पीपल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन और पीपल्स मूवमेंट के शाह फ़ैसल शामिल हुए.

बैठक के बाद महबूबा मुफ़्ती ने बताया, ''कश्मीर में जिस तरह के हालात बना दिए गए हैं उससे यहां रहने वाले लोग डरे हुए हैं. जिस तरह का ख़ौफ़ मैं आज देख रही हूं वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा.''

महबूबा मुफ़्ती ने सरकार पर सवाल उठाए कि अगर सरकार यह दावा करती है कि घाटी में हालात बेहतर हुए हैं तो यहां सुरक्षाबलों की संख्या क्यों बढ़ाई जा रही है.

उन्होंने कहा,''इस तरह की अफ़वाहें हैं कि सरकार आर्टिकल 35ए और विशेष राज्य के दर्जे में बदलाव करने जा रही है. इस्लाम में हाथ जोड़ने की इजाज़त नहीं है, फिर भी मैं प्रधानमंत्री से हाथ जोड़कर अपील करती हूं कि ऐसा ना करें.''

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