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ये है हिंदुस्तान की 'पाकिस्तानी वाली गली'
- Author, कमलेश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तानी वाली गली, गौतमपुरी, आकलपुर जागीर, दादरी, गौत्तमबुद्धनगर, उत्तर प्रदेश.
ये नाम कुछ उलझाने वाला है. ये पता तो हिंदुस्तान का है, पर नाम है 'पाकिस्तानी वाली गली'.
इसी उलझन के कारण इस इलाक़े में रहने वाले लोग परेशान हैं.
ये नाम सिर्फ़ इलाके में प्रचलित नहीं है बल्कि लोगों के आधार कार्ड में भी दर्ज है और लोग चाहते हैं कि इस पहचान को बदल दिया जाए.
उनके पते में पाकिस्तान जुड़ा होना न सिर्फ उनकी देश के प्रति निष्ठा को संदिग्ध बनाता है बल्कि उन्हें तंज का सामना भी करना पड़ता है.
इसलिए इस गली में रहने वाले लोगों ने स्थानीय प्रशासन से नाम बदलने की गुहार लगाते हुए एक चिट्ठी लिखी है.
कैसे पड़ा नाम
दोनों तरफ पतली-पतली नालियों वाली इस संकरी सी गली की कहानी चार लोगों से शुरू हुई थी. ये चारों भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान कराची से उत्तर प्रदेश में आकर बसे थे.
इस इलाक़े में रहने वाले ओमप्रकाश पाकिस्तान से आए उसी परिवार से हैं. उनके दादा चुन्नीलाल और बाकी तीन भाई यहां आकर बस गए थे. इसके बाद परिवार बढ़ता गया और लोग उस गली को 'पाकिस्तानी वाली गली' कहने लगे.
ओमप्रकाश बताते हैं, "1947 में झगड़े के दौरान चुन्नीलाल, दोजीराम, किशनलाल और रमीचंद पाकिस्तान से यहां आए थे. जब वो यहां रहने लगे तो आसपास के लोगों ने पहचान बताने के लिए इसे 'पाकिस्तानी वाली गली' कहना शुरू कर दिया."
"सब प्यार से कहते थे तो हमें भी बुरा नहीं लगता था लेकिन बाद में ये कागज़ों में आ गया. सारी मुसीबत यहीं से शुरू हो गई."
यहां के निवासी बताते हैं कि उन्हें नौकरी से लेकर कॉलेज तक के एडमिशन तक में गली के नाम से परेशानी होती है.
बढ़ता गया दायरा
यहां, रहने वाले देवेंद्र प्रसाद का कहना है कि उन्होंने बीएससी की है लेकिन उन्हें नौकरी के दौरान इस पते के लिए स्पष्टीकरण देना पड़ता था.
देवेंद्र उन लोगों में से भी हैं जिनके परिवार का कोई सदस्य पाकिस्तान से नहीं आया है. लेकिन, 'पाकिस्तान वाली गली' के अगल-बगल जो गलियां बसीं उनका नाम भी वही पड़ गया.
उन चार भाइयों के परिवार की इस वक़्त चौथी पीढ़ी है और पूरे परिवार में करीब 125 सदस्य हैं. लेकिन, आसपास की गलियों को मिलाकर यहां क़रीब 70 परिवार रहते हैं और सभी हिंदू हैं.
देवेंद्र बताते हैं, "हमारा परिवार पाकिस्तान से नहीं आया और हम बगल वाली गली में रहते हैं फिर भी हमारा पता 'पाकिस्तान वाली गली' हो गया."
"अब नौकरी के लिए जाएं तो पहले सामने वाले को पता ही अजीब लगता है. उसे लगता है जैसे कि हम किसी संदिग्ध जगह से हैं. वो लोग इस बारे में हमसे पूछताछ करते हैं और भरोसा नहीं कर पाते. कई लोग पूछ भी लेते हैं कि क्या पाकिस्तान के रहने वाले हो. अब किस-किस को बताएं."
'आधार कार्ड ठीक नहीं होता'
देवेंद्र ने बताया कि यहां घरों के पते सही नहीं हैं. कोई ब्लॉक नहीं है और वॉर्ड नंबर भी बदलता रहता है. इसके कारण कोई डाकिया तक सही पते पर नहीं पहुंच पाता. इसलिए लोग अलग पहचान के लिए 'पाकिस्तान वाली गली' नाम इस्तेमाल करने लगे.
लेकिन, बाद में आधार कार्ड में भी ये पता आ गया तो परेशानियां शुरू हो गईं. ऊपर से कार्ड में कोई हाउस नंबर भी नहीं लिखा है. हमें आकलपुर जागीर में डाल दिया है जबकि ये हमारा पता नहीं है.
देवेंद्र कहते हैं, "मैंने अपना पता मोहल्ला गौतमपुरी और हाउस नंबर लिखकर दिया था लेकिन उन्होंने पाकिस्तानी वाली गली लिख दिया. हमने आधार कार्ड बदलवाने की भी कोशिश की लेकिन ठीक ही नहीं होता. वो कहते हैं कि यही पता लिखा हुआ आएगा. हम चाहते हैं कि यहां पर कैंप लग जाए जिसमें हमारे आधार कार्ड का पता बदल सके. अगर रिकॉर्ड में कहीं दर्ज है तो उसे बदला जाए."
ओमप्रकाश के परिवार की ही सुनीता ने बताया कि जब वे यहां शादी करके आईं तब जाकर मोहल्ले का नाम पता चला था. थोड़ा अजीब लगा क्योंकि लोग कहते थे कि ये सब पाकिस्तानी हैं. फिर यहां बसने की कहानी पता चली तो 'पाकिस्तान वाली गली' सुनने की आदत हो गई.
सुनीता ने बताया, "दिक्कत ये है कि मेहनत मज़ूदरी करते हैं. अगर कोई कंपनी में नौकरी के लिए जाता है तो उसे रखते नहीं हैं. कहते हैं कि आप तो पाकिस्तानी हो. हमारे तो बड़े-बूढ़े आए थे पाकिस्तान से पर अब तो कोई नहीं है. हम सरकार से चाहते हैं कि इस जगह का नाम बदलकर गली नंबर दें या कुछ और नाम दे दें."
स्कूल में पढ़ रहीं काजल कहती हैं कि बाहर जब लोग इस पते के बारे में सुनते हैं तो तुरंत बोलने लगते हैं कि क्या तुम पाकिस्तानी हो. हमें बार-बार बताना पड़ता है कि हम पाकिस्तान से नहीं हैं, हिंदुस्तान में गौतमबुद्ध नगर से हैं. अगर कार्ड नहीं बदलवाएंगे तो कॉलेज में भी एडमिशन नहीं मिलेगा. बोलते हैं कि पता बदलवाकर लाओ.
पीएम और सीएम को चिट्ठी
ये गलियां दादरी, वॉर्ड नंबर दो में पड़ती हैं. यहां के सभासद महेश गौतम ने इस गली का नाम बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी है.
उन्होंने सब डिविजनल मैजिस्ट्रेट को भी चिट्ठी लिखकर इलाक़े का नाम बदलने की गुजारिश की है कि यहां के लोगों का आधार कार्ड ठीक कराएं.
महेश गौतम ने कहा, "अगर कोई मेरे पास पता वैरिफाई कराने आता है तो मैं लेटर में गौतमपुरी वॉर्ड नंबर 2 डालता हूं. इसके बावजूद आधार सेंटर पर पाकिस्तानी वाली गली ही पता लिखा गया. इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान योजना का भी लाभ नहीं मिला. इसका कारण सरकार और शासन-प्रशासन जानते हैं. जबकि दूसरे मोहल्ले के चार घरों को प्रधानमंत्री आवास योजना में फायदा मिला था."
गौतम कहते हैं, "मैंने एसडीएम को पत्र सौंपा था. उन्होंने मेरी बात ध्यान से सुनी और पत्र ईओ नगरपालिका को भेज दिया था. हालांकि, अभी तक उसका कोई जवाब नहीं आया है. अगर आगे भी नहीं आया तो फिर से प्रयास करेंगे."
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