फल, सब्ज़ी, रेस्तरां में खाने पर जीएसटी कितना देना होता है?

    • Author, बल्ला सतीश
    • पदनाम, बीबीसी तेलगू संवाददाता

अभिनेता राहुल बोस को चंडीगढ़ के होटल जेडब्ल्यू मेरियट में दो केले के लिए 442 रुपये का थमाया गया बिल बीते कुछ दिनों से ख़बरों में है.

22 जुलाई को सोशल मीडिया पर उन्होंने इससे जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया था.

इस मामले पर संज्ञान लेते हुए आयकर विभाग चंडीगढ़ ने होटल जेडब्ल्यू मेरियट पर 25 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया.

लेकिन होटल पर केले की क़ीमत को लेकर नहीं बल्कि उस पर लगे जीएसटी की वजह से कार्रवाई की गयी है.

अभिनेता राहुल बोस के ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत हलचल रही. यहां जीएसटी की पेचीदगी को लेकर भी बहुत बातें की गयीं.

सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कई मीम और चुटकुले बनाये गये. अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि केले या फल या खाद्य पदार्थ पर जीएसटी लगाये जाने को लेकर क्या हैं नियम. एक रेस्तरां कितना जीएसटी लगा सकता है?

खाद्य पदार्थ पर जीएसटी

जब आप किसी रेस्तरां में खाना खाते हैं तो आपके बिल पर 5% जीएसटी लगाया जाता है. उदाहरण के लिए, अगर आपके खाने की क़ीमत 100 रुपये है तो उस पर 5 रुपये जीएसटी लगेगा. यानी आपका कुल बिल 105 रुपये का होगा.

अब अगर रेस्तरां उस होटल में है जो ठहरने की सुविधा भी देता है तो वहां खाद्य पदार्थ के बिल पर 18% जीएसटी लगाया जायेगा. लेकिन यहां शर्त यह है कि होटल में कमरे का किराया 7,500 रुपये प्रतिदिन हो.

राहुल बोस जिस होटल में ठहरे थे वहां के कमरों की क़ीमत 7,500 रुपये प्रतिदिन से अधिक थी.

हालांकि, होटल को इस बात की जानकारी नहीं थी कि ताज़े फल और सब्ज़ियों पर जीएसटी नहीं चार्ज करना है.

लिहाज़ा ग़लत टैक्स लगाने की वजह से होटल पर 25 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया गया.

ताज़ी सब्ज़ियां, फल, प्याज़, लहसुन, मीट, अंडे और दूध जीएसटी से मुक्त हैं. वहीं किसी ब्रांड के पैक्ड मीट पर 5% जीएसटी लगाने का प्रावधान है.

इसी तरह चुनिंदा क़िस्म की प्रॉसेस्ड और डिब्बा बंद खाद्य उत्पादों पर जीएसटी लगता है. इन पर 5% या 12% जीएसटी लगाया जाता है.

इसके अलावा कोकोआ, चॉकलेट उत्पादों पर 18% जबकि सॉफ्ट ड्रिंक्स पर 28% जीएसटी देना पड़ता है.

खाने के शौक़ीनों के लिए जीएसटी राहत

जीएसटी लागू करने के शुरुआती दिनों में एयर कंडीशंड रेस्तरां को सर्विस देना मानते हुए 18% जबकि बिना एसी के रेस्तरां पर 12% जीएसटी चार्ज किया जाता था.

वहीं स्टार होटल 28% जीएसटी चार्ज करते थे. अब जीएसटी काउंसिल ने टैक्स की दरों में बदलाव किये हैं.

नई टैक्स दरों के मुताबिक़ अब रेस्तरां खाद्य पदार्थों पर 5% जीएसटी चार्ज कर सकते हैं जबकि 7500 रुपये से अधिक के कमरों वाले रेस्तरां 18% जीएसटी चार्ज कर सकते हैं.

जीएसटी के आने से पहले रेस्तरां में 14.5% वैट, 6% सर्विस टैक्स और 0.5% स्वच्छ भारत टैक्स और कृषि कल्याण टैक्स लगाया जाता था.

तब खाद्य पदार्थों पर 20% से अधिक टैक्स लगता था. अब जीएसटी के तहत आपके बिल पर 5% जीएसटी लगता है.

रेस्तरां में खाना पहले से सस्ता हुआ?

ऐसा लगता है कि खाद्य पदार्थों के बिल पर आपको टैक्स अधिक देना पड़ता है क्योंकि अधिकतर रेस्तरां जीएसटी चार्ज कर रहे हैं लिहाज़ा आपको जीएसटी देना ही पड़ता है.

पहले कुछ रेस्तरां आपसे टैक्स नहीं लेते थे ताकि ज़ीरो टैक्स बिज़नेस दिखाया जा सके. लेकिन जीएसटी आने के बाद से रेस्तरां में खाने वालों को टैक्स देना ही पड़ता है.

अब जीएसटी में कंपोजिशन स्‍कीम के फायदे उठाने के लिए रेस्तरां को ग्राहकों को भी इसका लाभ देना होता है. ऐसे रेस्तरां में ग्राहकों को टैक्स नहीं देना पड़ता. और वहीं ईमानदारी से इसे लागू करने वाले होटलों और रेस्तरां को टैक्‍स में छूट दी जाती है. ऐसे रेस्तरां अपनी कमाई पर जीएसटी देते हैं.

फूड समेत बैंक्वेट और आउटडोर कैटरिंग पर 18% जीएसटी लगाया जाता है.

शराब पर जीएसटी कितना?

शराब जीएसटी में शामिल नहीं है. इन पर अब भी वैट लगता है. इसका मतलब यह कि जब किसी पब या रेस्तरां में आप खाने के साथ शराब का सेवन भी करते हैं तो रेस्तरां खाना और शराब का अलग-अलग बिल देता है.

शराब पर वैट लगाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है और इसकी दरें राज्यों में अलग अलग हैं.

ऑनलाइन ऑर्डर पर कितना टैक्स?

जब आप होम डिलीवरी लेते हैं तो वहां भी जीएसटी चार्ज किया जाता है. होम डिलीवरी के बिल पर आपको तीन चीज़ें दिखेंगी- फूड चार्ज, जीएसटी और डिलीवरी चार्ज.

फूड चार्ज का पैसा होटल के पास तो जीएसटी चार्ज का पैसा सरकार के पास जाता है. डिलीवरी चार्ज में 18% जीएसटी भी शामिल है.

कुछ फूड एप्प टैक्स की डिटेल नहीं देते ताकि ग्राहकों को यह महसूस ही नहीं हो कि वो अधिक पैसे ख़र्च कर रहे हैं.

उदाहरण के लिए अगर आपसे 25 रुपये डिलीवरी चार्ज लिया गया है तो इसमें 21.9 रुपये डिलीवरी चार्ज और 3.81 रुपये (18% जीएसटी) जीएसटी शामिल है.

अब यह समझना भी ज़रूरी है कि सर्विस चार्ज कोई टैक्स नहीं है. यानी अगर आप किसी रेस्तरां या होटल में जाते हैं और वहां की सेवाओं से संतुष्ट नहीं होते हैं तो बिल चुकाते समय आप सर्विस चार्ज देने से मना कर सकते हैं.

सर्विस चार्ज वह शुल्क है जो रेस्तरां की सेवा के लिए आप देते हैं, यह कोई सरकारी शुल्क नहीं है.

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