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प्रियंका गांधी सोनभद्र जाते समय हिरासत में लिए जाने के बाद गेस्टहाउस में धरने पर बैठीं
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में ज़मीन विवाद में मारे गए लोगों के परिवार से मिलने पहुँचीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि यूपी सरकार अगर उन्हें जेल में डालना चाहे तो वो इसके लिए तैयार हैं.
प्रियंका गांधी को शुक्रवार को सोनभद्र जाते वक़्त हिरासत में ले लिया गया और चुनार क़िले में एक गेस्टहाउस ले जाया गया जहाँ वो धरने पर बैठ गईं.
सोनभद्र में बुधवार को ज़मीन विवाद में दो पक्षों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई थी.
प्रशासन ने तनाव को देखते हुए लोगों के जमा होने से रोकने के लिए सोनभद्र में धारा 144 लागू कर दी है.
यूपी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रियंका गांधी को सोनभद्र जाने से रोका गया तो वो विरोध में सड़क पर ही बैठ गईं जिसके बाद उन्हें मिर्ज़ापुर रोड पर स्थित नारायणपुर में हिरासत में ले लिया गया.
प्रियंका ने गेस्ट हाउस से शुक्रवार रात कई ट्वीट किए हैं जिसमें उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें बिना किसी लिखित आदेश के सोनभद्र नहीं जाने दे रही और उनके विरोध करने पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
प्रियंका ने लिखा, "उत्तर प्रदेश प्रशासन ने पिछले नौ घंटे से मुझे गिरफ्तार करके किले में रखा हुआ है. प्रशासन कह रहा है कि मुझे 50,000 रुपए की ज़मानत देनी है, नहीं तो मुझे 14 दिन जेल की सजा दी जाएगी."
प्रियंका ने कहा कि वो ज़मानत नहीं देंगी क्योंकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और वो पीड़ितों के परिवारों से मिले बिना नहीं जाएँगी.
'ऊपर से ऑर्डर'
प्रियंका गांधी ने इससे पहले मीडिया से कहा,"मैंने पुलिसवालों से वो आदेश या क़ानूनी प्रावधान दिखाने की मांग की जिसके आधार पर उन्हें रोका जा रहा है. पर उन्होने कहा कि उन्हें सोनभद्र नहीं जाने देने के लिए ऊपर से ऑर्डर दिए गए हैं."
प्रियंका ने कहा कि उन्होंने पुलिस से ये भी कहा कि वे केवल चार लोगों के साथ ही आगे जाना चाहती हैं जिसकी धारा 144 में अनुमति है मगर उन्हें हिरासत में ले लिया गया.
इस बीच गेस्टहाउस में उनके साथ मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यूपी प्रशासन ने गेस्ट हाउस की बिजली काट दी है ताकि उनकी नेता वहाँ से चली जाएँ मगर वे लोग मोमबत्तियाँ जलाकर धरना जारी रखेंगे.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस बारे में ट्वीट कर लिखा, "सोनभद्र में प्रियंका की अवैध गिरफ़्तारी परेशान करनेवाली है. ताक़त का नाजायज़ इस्तेमाल कर उन्हें उन आदिवासी किसानों के परिवारों से मिलने से रोका गया जिन्हें अपनी ही ज़मीन छोड़ने से मना करने पर बर्बरता से मार दिया गया. ये यूपी में बीजेपी सरकार की असुरक्षा को दिखाता है."
10 दिन में रिपोर्ट
इससे पहले दिन में उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोनभद्र हत्याकांड पर अपना बयान दे रहे थे मगर यूपी में क़ानून व्यवस्था की हालत को लेकर विपक्षी दलों ने सदन में जमकर हंगामा किया जिससे वो अपनी बात नहीं रख सके.
बाद में योगी ने एक संवाददाता सम्मेलन में पूरे विवाद के लिए कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनके शासनकाल में ही आदिवासियों की ज़मीन को एक सोसायटी के नाम कर दिया गया था.
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाई गई है जो 10 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी.
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