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'उड़ता पंजाब' के बाद धरती के स्वर्ग कश्मीर पर मंडराता ड्रग्स का ख़तरा
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए
"लगभग आठ महीने पहले मेरी दुनिया बिलकुल बदल गई थी. उस दिन मैंने पहली बार ड्रग्स लिया था. मेरे दोस्तों ने कहा था कि ड्रग्स लेने के बाद मैं बिलकुल बदल जाऊंगा और उत्साह महसूस करूंगा तो मैंने ड्रग्स ले लिया. लेकिन जब मैंने ड्रग्स लेना शुरू किया तो उससे मेरी ख़ुशियां छिन गईं, मेरा तनाव कम होने की जगह बढ़ गया."
ये कहना है भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर स्थित श्री महाराजा हरी सिंह अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती नशे के आदी 25 वर्षीय मुश्ताक़ अहमद (बदला हुआ नाम) का. रिपोर्टों के मुताबिक भारत प्रशासित कश्मीर में ड्रग्स की लत के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
मुश्ताक़ ने बताया, "पहले दिन मैंने गांजा लिया लेकिन कुछ दिनों के बाद मेरे दोस्तों ने मुझे हेरोइन दी. अगले दिन से मुझे हेरोइन की बुरी तरह लत लग गई. इसके बाद हेरोइन लेना रोज़ की आदत बन गई."
मुश्ताक़ बीते चार दिन से अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. वह कहते हैं कि उनके कुछ दोस्तों ने उन्हें इसकी लत लगाई.
वह कहते हैं, "मैं जब भी ड्रग्स लेता था तब सीधा अपने कमरे में चला जाता था. मैंने बीते आठ महीने में ड्रग्स पर तीन लाख से ज़्यादा रुपये गंवा दिए हैं. मैं जब भी ड्रग्स नहीं लेता था तो मेरे पेट और शरीर में दर्द होता था. जब मेरे घरवालों को इसका पता चला तो उन्होंने मुझसे बात करनी बंद कर दी. कोई घरवाला जब मुझसे बात करता था तो मुझे लगता था कि वह मुझसे लड़ने जा रहा है. इसके बाद मैंने घरवालों से बात करके कहा कि वे मुझे इलाज के लिए नशा मुक्ति केंद्र लाएं तब से मैं यहां हूं."
क्या ड्रग्स आसानी से उपलब्ध है?
ये सवाल जब मुश्ताक़ से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हम दक्षिण कश्मीर के संगम इलाक़े में जाते थे. वहां हेरोइन मिलना कोई मुश्किल काम नहीं है. वहां कुछ तस्कर हैं जो यह बेचते हैं."
वह कहते हैं कि जब से वह नशा मुक्ति केंद्र आएं हैं, उन्हें इस लत से मुक्ति मिलती दिख रही है.
वह कहते हैं, "अब मैं ठीक हूं. मैं जब तक यहां नहीं आया था मैं ड्रग्स के बग़ैर सो तक नहीं सकता था. लेकिन अब चीज़ें बदल गई हैं और मैं सो सकता हूं. मैं सभी नशा करने वालों से कहता हूं कि इसे छोड़ दें क्योंकि यह बर्बाद कर देता है. यह घर-परिवार, पैसा और ज़िंदगी सब बर्बाद कर देता है."
दिमागी विकास रोक देती है ड्रग्स
इस नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती एक दूसरा युवा अपनी कहानी बताता है. वह बताता है कि कैसे उसके एक दोस्त ने उसे नशे की आदत लगाई और फिर उसकी ज़िंदगी बर्बाद हो गई.
उस युवा ने बताया, "बीते दो सालों से मैं एसपी गोलियां और हेरोइन लेता था. पहले इसमें आनंद आता था लेकिन फिर यह आदत बन गई. ड्रग्स के कारण मैंने सबकुछ गंवा दिया. मेरे घरवाले मेरा सम्मान नहीं करते थे. मैंने ड्रग्स की वजह से पांच से 10 लाख रुपये बर्बाद किए. एक ग्राम तीन हज़ार रुपये का आता था और मैं हर रोज़ दो से तीन ग्राम हेरोइन ख़रीदता था. मैंने हेरोइन के लिए अपनी मोटरसाइकिल तक बेच दी."
"ड्रग्स लेने के बाद मैं ख़ुद को कुछ और समझता था लेकिन जब सुबह नशा उतरता था तो मैं कुछ भी नहीं होता था. इसने मेरी ज़िंदगी को जहन्नुम बना दिया. ड्रग्स की लत अच्छे कामों से रोकती है यह कहती है मुझे लो. यह आपके बौद्धिक विकास को रोक देती है."
इस युवा ने आगे बताया, "जब मेरी मां और बहन को मेरी ड्रग्स की लत का पता लगा तो वह बहुत बुरी तरह रोए. अब मैंने अपनी मां और बहन से वादा किया है कि मैं ड्रग्स नहीं लूंगा. मैंने अपने कई दोस्त देखे हैं जो ड्रग्स के आदी थे और मर गए. तो मैंने कसम खाई है कि मैं इस जाल में फिर नहीं फंसूंगा."
तेज़ी से फैलती नशे की लत
इस शख़्स ने भी दक्षिण कश्मीर की कुछ जगहों के बारे में बताया जहां हेरोइन आराम से मिल सकती है. उसने कहा कि वह श्रीनगर शहर में 16 से 25 साल के कई युवाओं के बारे में जानता है जो हेरोइन लेते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बीते दो सालों में नशे की लत कश्मीर में इतनी तेज़ी से फैली है जितनी चार सालों में भी नहीं फैली थी.
नशे के आदी एक शख़्स के भाई ने बीबीसी से कहा अगर घर में कोई नशे का आदी हो तो बहुत परेशानी हो जाती है. उनका भाई नशे की लत के चलते एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती भी था.
उन्होंने कहा, " पूरा परिवार बेहद परेशान रहा करता था. जब मुझे ये पता चला कि मेरा भाई नशे का आदी हो गया है तो मेरे लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था. वो घर में एक कमरे में चुपचाप अकेले बैठा रहता था. वो परिवार वालों के साथ बैठकर खाना नहीं खाता था. और हर समय गुस्से में ही रहता था. उसने अपने नशे की लत की वजह से बेहिसाब पैसा भी उड़ाया है. जब हमने उससे उसकी हरकतों के बारे में सवाल-जवाब किया तब कहीं जाकर पता चला कि वो नशा करता है. फिलहाल तो वो श्रीनगर के नशा रोधी केंद्र में है और इलाज करा रहा है."
विशेषज्ञों का कहना है कि बीते दो सालों में नशे की लत के मामले तेज़ी से बढ़े हैं और अब यह ख़तरे के निशान पर आ पहुंचा है. एसएमएचएस अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से लोगों में नशे की लत के मामले बढ़े हैं वो निश्चित तौर पर इस समाज के लिए भी ख़तरा हैं.
सिर्फ़ 10 फ़ीसद कराते हैं इलाज
डॉ. यासिर अहमद रहतर एसएमएचएस अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में असोसिएट प्रोफ़ेसर हैं. वो कहते हैं "मुझे इसे बीमारी कहने में ज़रा सी भी झिझक नहीं है. कश्मीर में यह बीमारी की तरह फैल रहा है. हमारे अस्पताल के रिकॉर्ड से साफ़ हो जाता है कि ओपीडी और आईपीडी में इस तरह के मामले बढ़े हैं. हम अपने शोध के आधार पर यह कह सकते हैं कि नशे की लत से जूझ रहे सिर्फ़ दस फ़ीसदी लोग ही इलाज के लिए आते भी हैं और बाकी नब्बे फ़ीसदी तो आते ही नहीं हैं."
जब बीबीसी ने उनसे ये पूछा कि किस तरह का नशा सबसे अधिक लिया जाता है तो उन्होंने कहा "यह उम्र के आधार पर होता है. हर उम्र के लिए अलग. कुछ मामले तो ऐसे भी आते हैं जहां नशा करने वाले की उम्र आठ से दस साल के बीच होती है. ये बच्चे इनहेलर दवओं, बूट पॉलिश और फेविकोल का नशा करते हैं. इस तरह के नशे की चीज़ों को गेट-वे ड्रग कहा जाता है. औऱ अब युवाओं में नशे की लत को लेकर एक ख़ास तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है. अब वे हार्ड ड्रग्स जैसे कि हेरोइन और ब्राउन शुगर तक लेने लगे हैं. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि इस साल हमने जितने मरीज़ देखे हैं उनमे से नब्बे फ़ीसदी को हेरोइन और ब्राउनशुगर की लत थी. यह एक ख़तरनाक ट्रेंड है. तीन साल पहले तक ऐसा नहीं था."
महिला भी ले रहीं हैं ड्रग्स
वो कहते हैं "हालांकि कुछ मामले महिलाओं के भी आए हैं लेकिन चिंता की बात ये है कि महिलाएं भी अब हार्ड ड्रग्स की ओर बढ़ रही हैं."
वो बताते हैं कि अभी हाल ही में उनके पास एक महिला आई थी जिसे नशे की लत थी. वो हेरोइन लेती थी. वो ग्रुप में नशा करती थी. उसके ग्रुप की एक महिला की नशे के कारण मौत हो गई जिससे वो बहुत परेशान थी और इसीलिए वो मेरे पास आई थी.
डॉक्टर रहतर कहते हैं कि ड्रग्स लेने को सामाजिक कलंक के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में महिलाएं लोगों को पता न चल जाए इस डर से नशा मुक्ति केंद्र जाने से कतरी हैं.
पिछले चार साल के आंकड़ों को दिखाते हुए डॉ. रहतर कहते हैं "हम आपको बीते चार साल के नंबर दे रहे हैं. साल 2016 में हमारे पास 500 ओपीडी और 200 आईपीडी के मामले आए थे. साल 2016 में कश्मीर छह महीने के लिए बंद रहा था. इसलिए इस दौरान उतने मामले नहीं आए. लेकिन 2017 में अचानक ये संख्या बढ़कर 3500 पहुंच गई. हमने 350 लोगों को एक ही वक़्त में भर्ती किया था. ज्यादा मरीज़ 2018 में आना शुरू हुए. और सिर्फ़ ओपीडी में ये संख्या 5000 के पार पहुंच गई. जबकि आईपीडी में 650. साल 2019 में शुरू के तीन महीने हमारे पास ओपीडी में 1500 मामले आए और आईपीडी में 150. आप देख सकते हैं कि मरीज़ों की संख्या बढ़ती ही जा रही है."
हालांकि पुलिस नहीं मानती है कि नशे की लत वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है. पुलिस के लिए चिंता की बात संख्या नहीं बल्कि पाकिस्तान से भारत में ड्रग्स की स्मगलिंग होना है.
पुलिस क्या कहती है?
कश्मीर रेंज के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस स्वयं पणी प्रकाश का कहना है, "आप मरीज़ों की बढ़ती संख्या का जो आंकड़ा विशेषज्ञों के हवाले से दे रहे हैं वो सही नहीं है"
वो कहते हैं, " हमारे लिए हाल में सिंथेटिक ड्रग्स का मिलना चिंता की बात है जिसकी पाकिस्तान से यहां स्मगलिंग हो रही है. यह सारी स्मगलिंग ड्रग्स पैडलर और स्मगर द्वारा किया जाता है जो कि यहां से ड्रग्स को दूसरे हिस्सों में भेजने की कोशिश करते हैं. कश्मीर घाटी में कुपवाड़ा ज़िले के केरन और तेंगडार इलाके से ड्रग्स की स्मगलिंग होती है. कश्मीर के बाहर से जिन भी ड्रग्स पैडलर औऱ स्मगलर को पकड़ा गया है लगभग सभी ने इन इलाक़ों से संबन्ध होने की बात स्वीकारी है. "
वो आगे बताते हैं, "इन लोगों का एक जाल होता है जिसे हम तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा ये भी देखा गया है कि जब कोई नशे का आदी हो जाता है तो वो बाद में खुद भी ड्रग्स पैडलर की तरह काम करने लगता है. इससे पूर्व हम एनडीपीएस के तहत मामले दर्ज करते थे. इसके अलावा हमने बहुत से लोगों को पब्लिक सेफ़्टी एक्ट के तहत भी नामज़द किया है. ड्रग्स को लेकर हमारी ओर से कोई रियायत नहीं है."
जब हमने उनसे पूछा कि क्या सीमा पार से होने वाले व्यापार की आड़ में भी ड्रग्स की स्मगलिंग होती है तो आईजी प्रकाश ने बताया कि कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं. उन्होंने बताया कि बारामूला में एक बड़ा ज़ख़ीरा पकड़ा गया था.
प्रकाश कहते हैं कि एक चिंता की बात ये भी है कि फिलहाल के दिनों में सिंथेटिक ड्रग्स का उपयोग बढ़ा है.
पाकिस्तान पर आरोप
ये पूछने पर कि क्या पाकिस्तान ड्रग्स के माध्यम से कश्मीर के युवाओं को निशाना बना रहा है वो कहते हैं " हम यहां जिस तरह के हालात का सामना कर रहे हैं वो किसी से छिपा नहीं है. पाकिस्तान के सहयोग वाले आतंकी संगठन यहां बहुत सक्रिय हैं और वे परेशानी बढ़ाना ही चाहते हैं. वे यहां के युवाओं को अपने अख़्तियार में लेना चाहते हैं और इस बात में कोई संदेह नहीं है. "
हाल ही में अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारुक ने नशे के ख़तरों को लेकर एक दिन लंबा सेमिनार आयोजित किया था. जिसमें धार्मिक वक्ताओं, समाजिक संगठनों और एनजीओ के वक्ताओं ने हिस्सा लिया था.
कश्मीर के पूर्व आईजी क्राइम सैय्यद अहफ़दुल मुजतबा ने कुछ दिन पहले मीडिया से कहा था कि पूरे जम्मू-कश्मीर में हेरोइन का नशा बढ़ा है.
पुलिस ने साल 2008-2009 में अपना नशा रोधी केंद्र शुरू किया था.
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