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नरेंद्र मोदी कांग्रेस को हथियाना चाहते हैं?: नज़रिया
- Author, प्रदीप सिंह
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
क्या पीवी नरसिम्हाराव और डॉ. मनमोहन सिंह को भारत रत्न मिलने वाला है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए जो कहा वह इसी दिशा में संकेत करता है. प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सरकार भेदभाव नहीं करती.
प्रधानमंत्री अपनी लय में थे. उनके पूरे भाषण के कुछ अंशों को छोड़ दें (जो राजनीतिक थे) तो उनका पूरा भाषण संसद में मौजूद सभी राजनीतिक दलों ही नहीं पूरे देश का विश्वास जीतने का प्रयास था. वे एक स्टेट्समैन की तरह बोले. उन्होंने पानी की समस्या को अत्यंत गंभीर बताते हुए सबसे अपील की कि सब मिलकर इस समस्या से निपटने का प्रयास करें.
यह किसी पार्टी या सरकार का मामला नहीं है. यह देश का मामला है और उससे भी ज्यादा देश की महिलाओं की समस्या है.
उन्होंने जब पानी की समस्या के साथ महिलाओं का जिक्र किया तो वह केवल इस समस्या की ओर ही इशारा नहीं कर रहे थे. वे दरअसल देश की महिलाओं को संबोधित कर रहे थे कि उनके प्रधानमंत्री और सरकार को उनकी चिंता है.
कांग्रेस पर तंज़
उन्होंने कहा कि 1951 में नेहरू का सपना था कि लोग अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी सोचें. मोदी ने कहा कि सब मिलकर इस दिशा में प्रयास करें तो यह हो सकता है.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इंदिरा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा था कि कोई किसी का क़द नहीं घटा सकता. मोदी ने कहा कि वे किसी की लकीर छोटी करने में यकीन नहीं करते. उनकी सोच अपनी बड़ी लकीर खींचने में जीवन खपाने की है.
कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आप लोग बहुत ऊंचे पहुंच गए हैं. इसलिए जड़ों से उखड़ गए हैं. इतनी ऊंचाई से नीचे के लोग बहुत छोटे दिखते हैं.
मोदी की यह चिंता तीन तलाक़ के मुद्दे पर भी नजर आई. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को किसी धर्म या संप्रदाय से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. यह महिलाओं के गौरव का विषय है.
यहां उन्होंने कांग्रेस को घेरा. कहा कांग्रेस को दो बार मौक़ा मिला. पहली बार पचास के दशक में समान नागरिक संहिता लागू करने का मौक़ा था. पर उसने हिंदू कोड बिल तक अपने को सीमित कर लिया.
कांग्रेस को दूसरा मौक़ा शाहबानो के मुद्दे पर 1986 में मिला. कांग्रेस ने दोनों बार जो ग़लती की थी, उसे सुधारने का अवसर है. वह तीन तलाक़ विधेयक का समर्थन करे. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री के हवाले से यह भी बता दिया कि उस समय के कांग्रेस के लोग मुसलमानों के बारे में क्या सोचते थे.
एक मंत्री ने कहा था कि 'मुसलमानों का उत्थान कांग्रेस की ज़िम्मेदारी नहीं है. वे गटर में रहना चाहते हैं तो रहें.'
कांग्रेस नायकों को अपनाने की रणनीति?
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर दूसरा हमला बोला इमरजेंसी के मुद्दे पर. मोदी ने याद दिलाया कि आज ही के दिन जनतंत्र को जेल में क़ैद कर दिया गया था. प्रेस पर पाबंदी लग गई थी.
वे अपने ऊपर जनतंत्र को ख़त्म करने के प्रयास के विपक्ष और खासतौर से कांग्रेस के आरोप का जवाब इमरजेंसी से दे रहे थे. उन्होंने कहा कि किसी की सत्ता को बचाने के लिए यह किया गया. इस दिन को भूलने की बजाय बार बार याद दिलाया जाना चाहिए ताकि फिर किसी के मन में ऐसा करने की इच्छा न पैदा हो.
ऐसा लगता है कि कांग्रेस को समझ में ही नहीं आ रहा है कि उसके साथ हो क्या रहा है. जो सिलसिला महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, लोकमान्य तिलक आदि से शुरू हुआ था, उसे मोदी और शाह की जोड़ी अब पीवी नरसिम्हाराव, प्रणब मुखर्जी और डॉ. मनमोहन सिंह तक ले आई है.
एक के बाद एक कांग्रेस के नायकों और नेताओं को भाजपा अपनाती जा रही है.
कांग्रेस को मोदी ने नेहरू- गांधी परिवार के साथ छोड़ दिया है. बल्कि यह कहना ग़लत नहीं होगा कि उन्होंने नेहरू गांधी परिवार को छोड़कर कांग्रेस को ही अपना लिया है. भारत छोड़ो आंदोलन, गांधी की 150वीं जयंती और आजादी की हीरक जयंती मनाने की तैयारी इस बात का पर्याप्त संकेत है.
मोदी ने कहा कि उन पर अपने पूर्ववर्तियों की तारीफ न करने का आरोप लगता है. उन्होंने चेतावनी के अदाज में में कहा 'बस अब और नहीं'. वे पहले प्रधानमंत्री जिन्होंने लाल किले की प्राचीर से दो बार कहा है कि इस देश के विकास में सभी पूर्व सरकारों को योगदान है. पर जो लोग यह आरोप लगाते हैं उन्होंने खुद क्या किया किया है.
उन्होंने पूछा कि यूपीए के दस साल के शासन में कभी किसी ने अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ की क्या? वाजपेयी को तो छोड़िए कभी नरसिम्हाराव की तारीफ की क्या? वे यही नहीं रुके पूछा कि आज भी किसी कांग्रेसी ने डॉ. मनमोहन सिंह का नाम लिया क्या?
भेदभाव कौन करता है?
मोदी ने उदाहरण के साथ यह बताने का प्रयास किया कि कांग्रेस में परिवार के अलावा किसी को कुछ नहीं मिलता. वरना क्या कारण है कि नरसिम्हाराव, प्रणब मुखर्जी और डॉ. मनमोहन सिंह को भारत रत्न नहीं मिला. लेकिन मोदी और उनकी सरकार की सोच ऐसी नहीं है. उन्होंने प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न देते समय यह नहीं सोचा कि मुखर्जी ने अपना सारा जीवन किस पार्टी के लिए लगाया.
अब सवाल है कि क्या राव और मनमोहन अगले भारत रत्न होने वाले हैं? ऐसा होता है तो मोदी दरअसल नेहरू-गांधी परिवार से कांग्रेस को ही छीन लेंगे. कांग्रेस का एक परिवार से प्रेम उसे इस मोड़ पर लाया है जहां उसके अपने ही नायक हाथ से निकल गए हैं.
मोदी कांग्रेस तक ही नहीं रुके. समाजवादियों से डॉ. राम मनोहर लोहिया को हथियाने का भाजपा और मोदी का प्रयास काफी समय से चल रहा है. लोहिया और दीन दयाल उपाध्याय संविद सरकारों और गैर कांग्रेसवाद की राजनीति के दौर में काफ़ी क़रीब आ गए थे.
मंगलवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री ने लोहिया का जिक्र किया. लोहिया ने कहा था कि महिलाओं की दो समस्याएं हैं. एक पाखाने (शौचालय) की और दूसरी पानी की. शौचालय उनकी सरकार ने पहुंचा दिया. अगला लक्ष्य हर घर में नल का जल पहुंचाने का है. इस तरह से मोदी ने तीसरी बार महिलाओं की समस्या और उसके समाधान का जिक्र किया.
इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पता नहीं कहां हैं? वे किन समाजवादियों को खोज रहे थे?
तीन तलाक पर कांग्रेस से भूल सुधार की अपील और लोहिया की बात के जरिए क्या प्रधानमंत्री अपने सहयोगी नीतीश कुमार और दूसरे समाजवादियों यानी सपाइयों और राजद के लोगों को भी संदेश दे रहे थे. तीन तलाक पर नीतीश कुमार की पार्टी ने सरकार विरोधी रुख अख्तियार कर लिया है. लेकिन सरकार की ओर से उन्हें मनाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है.
सरकार को इस विधेयक को पास कराने के लिए राज्यसभा में इनकी जरूरत पड़ेगी. मोदी ने हालांकि ऐसे कोई संकेत नहीं दिए लेकिन तीन तलाक पर उनके दृढ़ निश्चय को देखते हुए लगता है कि वे इस बार इसे पास कराने के लिए संसद के संयुक्त अधिवेशन का भी सहारा ले सकते हैं.
(लेखक के निजी विचार हैं और बीबीसी इसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेता.)
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