You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कलेश्वरम लिफ़्ट सिंचाई परियोजना क्यों है ख़ास
रिकॉर्ड तीन साल में पूरी होने वाली तेलंगाना की कलेश्वरम गोदावरी लिफ़्ट सिंचाई परियोजना को बीते शुक्रवार को देश को समर्पित किया गया.
इस परियोजना को दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना बताया जा रहा है.
इस मेगा प्रोजेक्ट से तेलंगाना का तीन चौथाई हिस्सा सिंचित क्षेत्र में आ जाएगा. इसके अलावा महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी जल संकट दूर होगा.
भेल और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) के सहयोग से निर्मित इस परियोजना की लागत क़रीब 80 हज़ार करोड़ रुपये है.
मेदिगड्डा पंपहाउस का उद्घाटन तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़ड़नवीस ने किया.
तेलंगाना के 13 ज़िलों मिलेगा पानी
परियोजना के निर्माण में लगी कंपनी मेघा इंजीनियरिंग इनफ्रास्ट्रक्चर लिमिलिटेड के निदेशक बी श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि 'गोदावरी के पानी को पंप कर सबसे लंबी 14.09 किलोमीटर सुरंग के जरिये मेडिगड्डा बैराज पहुंचाया जाएगा जहां से जुड़ी नहरों के सहारे ज़रूरत वाले इलाकों तक पानी पहुंचाया जाएगा.'
इस परियोजना से गांवों और शहरों के अलावा फ़ैक्ट्रियों को भी पानी की आपूर्ति की जाएगी.
असल में कलेश्वरम परियोजना कोई एक यूनिट नहीं है बल्कि यह बैराज, पंप हाउस, नहरों और सुरंगों का जाल है जो एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. इस परियोजना का डिज़ाइन गोदावरी के पानी को यथासंभव उपयोग करने के लिए बनाया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि तेलंगाना के 13 जिलों में 18 लाख और 25 हजार एकड़ में कलेश्वरम परियोजना का पानी उपलब्ध होगा.
इससे हैदराबाद में और आसपास के गांवों में पीने के पानी और औद्योगिक क्षेत्रों को पानी की आपूर्ति की जाएगी.
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री टी हरीश राव ने कहा कि कलेश्वरम परियोजना का निर्माण अस्थायी लाभ के बजाय दीर्घकालिक उपयोग के लिए किया जा रहा है.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "तेलंगाना में गोदावरी के पानी का उपयोग करने के लिए पानी को 100 मीटर से 623 मीटर तक उठाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था."
ग़ौरतलब है कि जब आंध्रप्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ तब गोदावरी के पानी के इस्तेमाल के लिए एक पुरानी परियोजना बनाई गई थी लेकिन जब तेलंगाना अलग राज्य बना तो केसीआर ने इसकी नई रूपरेखा बनाई.
क्या लिफ़्ट सिंचाई परियोजना?
जब पानी को किसी ऊंची जगह पर स्थित जलाशयों या नहरों में पंप मोटरों के सहारे ले जाया जाता है तो इसे लिफ़्ट इरिगेशन कहते हैं.
तेलंगाना में, गोदावरी के पानी को नहरों में डालने की सबसे बड़ी समस्या है ऊंचाई.
चूंकि यह क्षेत्र दक्कन के पठार वाला है, इसलिए मोटर पंप के सहारे नदी के पानी को ऊपर बनी नहरों में डाला जाता है.
असल में इसकी एक प्रक्रिया है. पंप के मार्फ़त पहले पानी को सुरंगों में डाला जाता है जहां छोटे छोटे भूमिगत जलाशय बने होते हैं. यहां से इस पानी को नहरों में पंप किया जाता है.
इस परियोजना के तहत 3 बैराज, 19 पंप हाउस और सैकड़ों किलोमीटर संपर्क नहर का संजाल है.
परियोजना में कुल 82 पंपिंग स्टेशन हैं, जिनकी कुल क्षमता 4627 मेगावाट है. पंप और मोटर्स की आपूर्ति भेल, एंड्रीज़, जेलुम जैसी विद्युत कंपनियां कर रही हैं.
मेदिगड्डा में 11 इकाइयां, अन्नाराम में 8, सुंडिला में 9 और पैकेज 8 में 7 इकाइयां इस परियोजना के लिए स्थापित की जा रही हैं.
परियोजना आंकड़ों की नज़र में-
जल आपूर्ति कुल मार्ग: 1832 किमी
नहरों की लंबाई: 1531 किमी
सुरंगों (भूमिगत नहरों) की लंबाई: 203 किमी
पाइपलाइन की लंबाई: 98 किमी
पंप हाउस: 19
बिजली की ज़रूरत: 4627.24 मेगा वॉट
कुल बिजली सब स्टेशन: 17
सबसे बड़ा पंप: 139 मेगा वॉट
कुल जलाशय भंडारण क्षमता: 141 टीएमसी
13 जिलों में सिंचित क्षेत्र: 18,25,700 एकड़
हैदराबाद शहर को पानी की आपूर्ति: 30 टीएमसी
औद्योगिक उद्देश्यों के लिए: 16 टीएमसी
परियोजना में कुल पानी का इस्तेमाल: 225 टीएमसी
आवश्यक कुल ज़मीन: 70,326 एकड़
अधिग्रहित ज़मीन: 36,624 एकड़
लागत का कुल अनुमान: 80 हजार 500 करोड़ रुपये
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)