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ओम बिड़ला: दो बार सांसद, अब होंगे लोकसभा स्पीकर
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
यह छोटी शुरुआत की बहुत बड़ी परिणति है. ओम बिड़ला ने कभी राजस्थान के कोटा में स्कूली संसद से अपना सफ़र शुरू किया और फिर यह यात्रा उन्हें भारत की संसद के स्पीकर पद तक ले गई. कोई उनकी इस कामयाबी पर ख़ुशी से सरोबार है तो कोई हैरान.
कोटा उन दिनों एक ओद्योगिक शहर था और मजदूर आंदोलन के नारे गूंजते रहते थे मगर तभी इस कोलाहल में स्कूली स्तर पर कुछ छात्र नेताओ की आवाजे सुनाई देने लगी.
उनमे ओम बिड़ला का नाम भी शामिल था. वे उस वक्त कोटा में गुमानपुरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्र संसद के प्रमुख बने थे. फिर बिड़ला ने अपनी सक्रियता जारी रखी और एक स्थानीय कॉलेज में छात्र संघ अध्यक्ष पद के लिए दाव लगाया. मगर एक वोट से शिकस्त खा गए. पर बिड़ला ने इस पराजय को भूला दिया और अपने काम में लग गए. वे कोटा में सहकारी उपभोक्ता भंडार संघ के अध्यक्ष चुने गए और यह सार्वजिनक क्षेत्र में उनकी पहली हाज़िरी थी.
उनके जानकर कहते हैं, 'वे अवसर हासिल करने और उस मौक़े को अपने हक़ में ढालने की काबलियत रखते हैं. बिड़ला ने कॉमर्स विषय में स्नातकोत्तर तक की तालीम हासिल की है. लेकिन इस पढाई के बावजूद वे सियासत के अच्छे विद्यार्थियों में गिने जाते हैं. वे एक ऐसा नेता हैं जो बीजेपी में ज़िला स्तर तक सक्रिय रह कर विधानसभा होते हुए लोकसभा तक पहुंचे है.'
वे तीन बार कोटा से विधायक रहे हैं. उनके विरुद्ध चुनाव लड़ चुके एक नेता ने कहा 'वे प्रबंध कौशल में निपुण हैं. यह उनकी बड़ी खूबी है.'
पार्टी के भीतर चुनाव प्रबंधन और बूथ स्तर तक कुशल तालमेल के लिए ओम बिड़ला की बानगी दी जाती है. वे बीजेपी में युवा मोर्चा के राजस्थान के अध्यक्ष और बाद में मोर्चे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं.
कोटा से बीजेपी विधायक संदीप शर्मा अपने इस सांसद नेता से बहुत प्रभावित है. शर्मा कहते हैं, 'बिड़ला जी हमेशा अपने लोगों के लिए उपलब्ध रहते हैं. आधी रात को भी किसी ने फोन किया है तो जवाब के लिए तैयार मिलेंगे. शर्मा कहते हैं, 'वे गरीबों के हमदर्द हैं, किसी की पीड़ा उन्हें विचलित कर देती है. अगर कोई कटु बात भी कहेगा तो शांति से सुन लेंगे और पलट कर कभी तीखा उत्तर नहीं देंगे. वे अपने कार्यकर्ता को हमेशा तवज्जो देते हैं. बिड़ला ने सियासत के साथ सहकारी संस्थानों में भी अपनी सक्रियता बरकरार रखी और कई संस्थानों में ऊंचे पदों तक पहुंचे हैं.'
पार्टी के भीतर और बाहर उनके समर्थको की कोई कमी नहीं है. मगर आलोचक भी मुखर हैं. वे कहते हैं, 'बिड़ला बहुत कुशलता से अपने विरोधी को निपटाते है और जब ऐसा करते है तो उनका चेहरा भाव विहीन रहता है.'
आलोचक कहते हैं, 'जब कभी उनके क्षेत्र में उनकी पसंद का उम्मीदवार नहीं मिला तो समानान्तर लोगों को मैदान में उतार दिया. वे बड़े लोगों से रिश्ते बनाने और फिर उन रिश्तों के सहारे ऊंचाई तक पहुंचने में दक्ष हैं.'
कोटा में पार्टी संगठन में उनके साथ काम कर चुके प्रेम कुमार सिंह कहते हैं, 'ऐसा बहुत कुछ है जो ओम बिड़ला को भीड़ से अलग करता है, उनमें आलोचना सुनने की क्षमता है, वे सहिष्णु हैं. यह कितनी बड़ी बात है कि कोई व्यक्ति स्कूल की छात्र संस्था से संसद के स्पीकर पद तक पहुंच जाए और हमारे लोकतंत्र की कामयाबी की गाथा बयान करे.'
बीजेपी में उनके समर्थक कहते हैं, 'बिड़ला एक ऐसा नेता हैं जो लोगों के सुख दुःख में भागीदार रहते हैं. समर्थकों की नज़र में वे चीजों और घटनाओं का ठीक विश्लेषण करते हैं और फिर उसी अनुरूप निर्णय लेते हैं.'
लेकिन आलोचक कहते हैं, 'वे अवसर पर निगाह रखते हैं और मौका मिलते ही उसे ख़ुद के सियासी लाभ में इस्तेमाल कर लेते हैं. इसमें वे अपने साथियों को पीछे छोड़ते चले गए. पार्टी में कभी वे उमा भारती के निकट रहे हैं तो कभी दुसरे नेताओ के. पिछले कई सालो से उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी से भी उनके करीबी संबध रहे हैं.'
बीजेपी में उनके एक समर्थक इन आलोचनाओं के उत्तर में कहते हैं, 'बिड़ला ऐसे नेता हैं जो रिश्ते निभाते हैं और संकट में कभी अपने दोस्तों को अकेला नहीं छोड़ते.'
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