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ममता बनर्जी से मुलाक़ात के बाद डॉक्टरों ने वापस ली हड़ताल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाक़ात के बाद पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों ने हफ़्ते भर से जारी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है.
मुलाक़ात के बाद वो सभी सरकारी अस्पतालों में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाने और सुरक्षा बढ़ाने को राज़ी हो गई हैं.
डॉक्टरों की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री से राज्य सचिवालय में मुलातक़ात की. मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया.
कोलकाता में मौजूद हमारे सहयोगी प्रभाकर एम ने बताया कि ममता ने प्रदर्शनकारियों की इस बैठक की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग मान ली थी जिसके बाद दो स्थानीय टीवी चैनलों को कवरेज की ज़िम्मेदारी दी गई थी.
उन्होंने बताया, "ममता ने प्रदर्शनकारियों की तमाम समस्याओं और मांगों को ध्यान से सुना और कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को उसी वक़्त निर्देश दिया. साथ ही उन्होंने डॉक्टरों से तुरंत काम पर लौटने की अपील की."
बैठक में 14 मेडिकल कॉलेजों के 21 प्रतिनिधियों के अलावा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त भी शामिल थे.
बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों ने भी बातचीत पर संतोष जताया. ममता ने जो सुझाव दिए हैं, उसमें प्रमुख है कि डॉक्टरों और परिजनों के संपर्क के लिए एक जनसंपर्क अधिकारी रहे, मरीज़ों के साथ आने वाले लोगों की तादाद पर अंकुश लगाया जाए और हर अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड पर गेट लगाया जाए.
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ममता बनर्जी ने पुलिस को भी निर्देश दिया कि अस्पतालों में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए जो डॉक्टरों पर हमले की घटनाएं देखेगा. साथ ही शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में मरीज़ और उसके परिजन कानून हाथ में लेने के बजाय वहां शिकायत दर्ज करा सकेंगे.
इस मारपीट की घटना में पांच लोग गिरफ़्तार हुए हैं और मामले की जांच चल रही है.
हड़ताली डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में यह भी थी कि डॉक्टरों के ख़िलाफ़ लगाए गए झूठे मामलों को वापस लिया जाए. लेकिन ममता ने भरोसा दिया कि किसी भी डॉक्टर के ख़िलाफ़ कोई मामला दायर नहीं किया गया है.
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कोलकाता के नील रतन मेडिकल कॉलेज में मरीज़ों के परिजनों की ओर से डॉक्टरों से मारपीट के बाद यह हड़ताल शुरू हुई थी जो जल्द ही पूरे प्रदेश में फैल गई थी. इतना ही नहीं, ये प्रदर्शन राष्ट्रीय मुद्दे बन गए थे क्योंकि बाद में दिल्ली स्थित एम्स और दूसरे प्रदेशों के डॉक्टर भी इस प्रदर्शन में शामिल हो गए थे.
हालांकि इससे पहले कहा जा रहा था कि ममता बनर्जी डॉक्टरों की मांगों के आगे झुकने को तैयार नहीं दिख रही हैं. गुरुवार को वह नीलरतन मेडिकल कॉलेज के बजाय एसएसकेएम अस्पताल गईं थीं लेकिन वहां आंदोलनकारियों में बाहरी लोगों के शामिल होने का आरोप लगा कर उन्होंने हड़ताली डॉक्टरों को और भड़का दिया.
उन्होंने उस दिन जूनियर डॉक्टरों को लताड़ते हुए पहले उनको काम पर लौटने के लिए चार घंटे का समय दिया था और फिर यह समय सीमा घटा कर दो घंटे कर दी.
ममता ने काम पर नहीं लौटने वालों से हॉस्टल ख़ाली कराने और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की धमकी भी दी थी. मौक़े पर ममता को जूनियर डॉक्टरों की नारेबाजी का भी सामना करना पड़ा था.
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