राहुल गांधी ने इस्तीफ़े की पेशकश के बाद पहली बार तोड़ी 'चुप्पी'

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यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया है.
शनिवार को कांग्रेस के लोकसभा के लिए नवनिर्वाचित 52 सदस्यों और राज्यसभा सांसदों ने संसद के सेंट्रल हॉल में हुई बैठक में सोनिया को पार्टी के संसदीय दल का नेता चुना.
संसदीय दल में लोकसभा और राज्यसभा सदस्य होते हैं.
यह दल शनिवार को लोकसभा के लिए अपना नेता चुनेगा और संसद के आने वाले सत्रों के लिए रणनीति तय करेगा.
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कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.
उन्होंने लिखा है, "सोनिया गांधी को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया है. उन्होंने कहा है कि 'हम कांग्रेस में फिर से विश्वास जताने के लिए 12.13 करोड़ वोटरों को धन्यवाद देती हैं."
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इस बैठक में सभी की नज़र पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर थी. राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में शिकस्त के बाद इस्तीफे़ की पेशकश की थी. इस्तीफ़े की पेशकश के बाद पहली बार वो कांग्रेस की किसी बैठक में शामिल हुए और सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी.
हालांकि इससे पहले वो सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और उन्होंने 29 मई को नवीन पटनायक के पांचवीं बार ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर उन्हें बधाई दी थी.
शनिवार को संसद के सेंट्रल हॉल में हुई पार्टी के सासंदों की बैठक में उन्होंने सोनिया गांधी को कांग्रेस संसदीय दल की नेता चुने जाने पर बधाई दी.
उन्होंने ट्वीट किया, "उनके (सोनिया गांधी) नेतृत्व में कांग्रेस एक मजबूत और प्रभावी विपक्षी पार्टी साबित होगी, जो भारत के संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी."
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बैठक में राहुल गांधी ने भी कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं और वोटरों को भी धन्यवाद कहा.
कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला के मुताबिक राहुल ने कहा, "कांग्रेस के हर सदस्य को यह याद रखना चाहिए कि आप सभी संविधान और देश के हर नागरिक के लिए लड़ रहे हैं."
अपने इस्तीफे की पेशकश के बाद यह पहली बैठक है जिसमें राहुल गांधी शामिल हुए हैं. पार्टी ने उनके इस्तीफे को ख़ारिज कर दिया था.
सोनिया गांधी अब लोकसभा के लिए कांग्रेस संसदीय दल के नेता का चुनाव करेंगी. पिछली लोकसभा में ये ज़िम्मेदारी कर्नाटक से सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के पास थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में वो गुलबर्गा सीट से चुनाव हार गए हैं.

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52 लोकसभा सांसदों के साथ कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का पद इस बार भी नहीं मिल पाएगा. नियमों के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष का पद पाने के लिए पार्टी के पास कुल संसदीय सीटों की 10 फ़ीसदी सीटें होनी अनिवार्य हैं. लोकसभा की सदस्य संख्या 545 है और कांग्रेस के पास नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल करने के लिए तीन सीटें कम हैं.
लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाले एनडीए गठबंधन को बड़ी जीत हासिल हुई है. भाजपा ने अकेले तीन सौ के आंकड़ों को पार किया और 303 सीटों पर जीत का परचम लहराने में सफल रही.
अन्य सहयोगी पार्टियों के साथ ने इस जीत को और प्रचंड बना दिया. एनडीए ने लोकसभा की कुल 353 सीटों पर कब्जा किया, वहीं कांग्रेस की अगुआई वाला यूपीए 92 सीटों पर सिमट कर रह गया.
कांग्रेस के अकेले प्रदर्शन की बात करें तो काफी खींच-तान के बाद पार्टी को महज 52 सीटों पर सफलता मिली.
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