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हापुड़ रेप मामला: आत्मदाह करने वाली युवती की पूरी कहानी
- Author, भूमिका राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बीस साल की गीता (बदला हुआ नाम) बुरी तरह झुलसी हालत में दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हैं. पिछले महीने की 28 तारीख़ को उसने ख़ुद को आग लगा कर आत्महत्या करने की कोशिश की.
उनकी कहानी हापुड़ से शुरू होकर मुरादाबाद से होते हुए दिल्ली तक आ पहुंची है.
तीन पति... दस हज़ार में सौदा...तीन बच्चे...बलात्कार के 16 अभियुक्त और आत्महत्या की कोशिश. गीता की हालत फिलहाल स्थिर है.
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के श्यामपुरजट्ट गांव की रहने वाली 20 साल की गीता ने हापुड़ पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके बार-बार कहने के बावजूद एफ़आईआर नहीं लिखी जिससे दुखी होकर उन्होंने ख़ुद को आग लगा ली.
हालांकि पुलिस इन आरोपों को ख़ारिज कर रही है. हापुड़ पुलिस के मुताबिक़ पूरा मामला संदिग्ध है और जांच के दायरे में है.
मामले पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी और मामले को फ़ौरन देखने का निवेदन किया. साथ में एफ़आईआर दर्ज़ हो, ये सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की मांग की. स्वाति मालीवाल की इस चिट्ठी पर 11 मई की तारीख़ है.
इसके बाद अगले दिन यानी 12 मई को हापुड़ के थाना बाबूगढ़ में एफ़आईआर दर्ज़ कर ली गई. एफ़आईआर में 16 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है.
13 मई को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया और मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाते हुए मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट मांगी.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है.
लेकिन इस कहानी के कई दूसरे पक्ष और क़िरदार भी हैं.
कौन हैं गीता और वो श्यामपुरजट्ट गांव कैसे पहुंचीं?
हापुड़ के शैसपुरा गांव की रहने वाली गीता की पहली शादी 14 साल की उम्र में मोनू (बदला हुआ नाम) से हुई थी. पहली शादी क़रीब एक साल ही चली. गीता अपने पहले बेटे को लेकर मायके आ गईं और कुछ वक़्त बाद मोनू से उसका तलाक़ हो गया.
इसके बाद, गीता की 'शादी' श्यामपुरजट्ट गांव में रहने वाले विनोद (बदला हुआ नाम) से करा दी गई.
गीता का आरोप है कि उनके पिता राम (बदला हुआ नाम) ने दस हज़ार रुपये लेकर 33 साल के विनोद से उनका सौदा किया था.
हालांकि गीता के पिता राम और विनोद दोनों ही सौदे की बात को सिरे से ख़ारिज करते हैं. विनोद ने बीबीसी से कहा कि उसने कभी भी पैसे नहीं दिए. यही दावा राम और उनकी पत्नी का भी है.
विनोद कहते हैं "मैं मज़दूर हूं. महीने का मुश्किल से छह हज़ार कमाता हूं. दस हज़ार कहां से लाऊंगा… उसके पिता ही आए थे मेरे पास शादी के लिए."
पर बाबूगढ़ थाने में गीता की ओर से दर्ज करवाई गई एफ़आईआर में कहीं भी विनोद के साथ विधिवत शादी का ज़िक्र नहीं है. एफ़आईआर के मुताबिक़ यह एक सौदा था. स्टैंप पेपर पर लिखा-पढ़ी हुई और गीता को उसके बेटे के साथ विनोद को सौंप दिया गया.
रेप के आरोप
एफ़आईआर में 16 लोगों को रेप के आरोप में अभियुक्त बनाया गया है.
गीता का आरोप है कि इन 16 लोगों ने बीते पांच सालों में उसके साथ बलात्कार किया.
गीता के बयान के मुताबिक़, विनोद ने गांव के ही एक आदमी से पैसा उधार लिया था. किसी तरह पति-पत्नी ने मिलकर मूलधन तो चुका दिया लेकिन ब्याज़ नहीं अदा कर पाए.
इसी का दबाव बनाकर उस शख़्स ने गीता के साथ बलात्कार किया. और एक बार नहीं, कई बार उसे डरा-धमकाकर उसके साथ रेप किया. इस दौरान गीता गर्भवती हो गई और उसने एक बेटे को जन्म दिया.
हालांकि विनोद इससे इनकार करता है और बेटे को अपना बताता है.
गीता की दर्ज कराई गई एफ़आईआर में ब्यौरेवार तरीक़े से और घटनास्थल की जानकारी देते हुए रेप की वारदातों का उल्लेख है.
एफ़आईआर के मुताबिक़, गीता घरों में काम करती थीं और इसी दौरान अलग-अलग लोगों ने उनका शोषण किया.
गीता का दावा है कि उन्होंने अपने पति विनोद को कई बार अपने साथ हो रहे दुराचार के बारे में बताया लेकिन पति ने हर बार उसे ही शांत रहने को कहा और उसकी बातों को अनसुना कर दिया.
हालांकि विनोद कहते हैं "गीता ने कभी ये नहीं कहा कि उसके साथ कुछ ग़लत हो रहा है."
विनोद उल्टे गीता पर ही आरोप लगाते हैं.
उनका कहना है कि गीता में ही दोष है. वरना वो गांव के ही एक तीसरे लड़के भुवन ( बदला हुआ नाम) के साथ क्यों जाती? वो भी अपने तीन छोटे-छोटे बच्चों को उसके पास छोड़कर.
एक ओर जहां विनोद, गीता पर भुवन के साथ चले जाने को ग़लत ठहराते हैं वहीं भुवन से जब हमने बात की तो उन्होंने कहा कि गीता की कोई नहीं सुन रहा था, इसलिए उन्होंने गीता का साथ देने का फ़ैसला किया.
तीसरा पति और मुरादाबाद
एफ़आईआर में भुवन को गीता का वर्तमान पति बताया गया है. यानी तीसरा पति.
तो क्या गीता और विनोद का तलाक़ हो गया है?
यह सवाल जब हमने भुवन से पूछा तो उन्होंने कहा कि तलाक़ नहीं हुआ है लेकिन गीता ने सादे काग़ज पर लिखकर दे दिया है कि वो विनोद के साथ नहीं रहना चाहती. रही बात हमारी शादी की तो हमने स्टैंप पेपर पर लिखित में शादी की है.
भुवन कहते हैं कि गीता ने उन्हें अपनी सारी आपबीती सुनाई जिसके बाद उन्होंने तय किया कि कोई और उनका साथ दे या न दे लेकिन वो गीता के साथ खड़े रहेंगे.
लेकिन आप गीता को लेकर मुरादाबाद क्यों चले गए?
इस सवाल के जवाब में भुवन कहते हैं "मैंने अपने घर में गीता को लेकर बात की किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया. सबने विरोध किया. सरपंच ने भी मदद नहीं की. वहीं दूसरी ओर उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं, ऐसे में हमने गांव से चले जाना ही सही समझा."
एक ओर जहां एफ़आईआर में लिखा है कि भुवन और गीता 23 नवंबर 2018 से मुरादाबाद में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं वहीं भुवन के पिता का कहना है कि गीता और भुवन पिछले डेढ़ साल से साथ रह रहे हैं.
आत्मदाह की कोशिश और पुलिस का बयान
भुवन और गीता मुरादाबाद में साथ रह रहे थे. गीता के तीनों बच्चे विनोद के पास श्यामपुरजट्ट गांव में.
भुवन ने बीबीसी को बताया कि जब गीता ने उसे सारी बातें बताईं तभी दोनों ने न्याय के लिए खड़े होने का फ़ैसला कर लिया था.
वो बताते हैं "हमने कई बार पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें अनसुना कर दिया. बीते साल 23 नवंबर 2018 के बाद गीता ने अप्रैल महीने में भी एफ़आईआर दर्ज करने का आग्रह किया था लेकिन पुलिस ने कहा कि जांच के बाद लिखेंगे. इससे वो काफी दुखी हो गई थी."
भुवन का दावा है कि गीता इस क़दर मानसिक रूप से परेशान हो गई थी कि उसने 28 अप्रैल को ख़ुद पर मिट्टी का तेल छिड़कर आत्मदाह की कोशिश की.
इस संदर्भ में जब हमने हापुड़ ज़िले के पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि दस हज़ार रुपये में सौदे की बात जो सामने आई है उसका अभी तक कोई प्रमाण नहीं है.
यशवीर सिंह बताते हैं कि पुलिस ने गीता द्वारा बताए गए अलग-अलग रेप की घटनाओं की जांच करवाई है लेकिन ऐसी कोई भी बात अभी तक प्रमाणित नहीं हुई है.
जब हमने यशवीर सिंह से पूछा कि क्या यह आरोप सही है कि गीता की एफ़आईआर नहीं लिखी गई थी तो उन्होंने बताया कि पूर्व में गीता के ख़िलाफ़ भी कई मामले आए हैं और ख़ुद गीता ने भी कई बार अलग-अलग लोगों पर एफ़आईआऱ दर्ज करवाई है. लेकिन दोनों ही प्रकरण जांच के बाद झूठे पाए गए.
हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा कि मामला संदिग्ध है और अभी भी जांच के दायरे में है.
गांव वालों की प्रतिक्रिया
जिस वक़्त हम श्यामपुरजट्ट गांव पहुंचे, गांव लगभग ख़ाली था. एक गुमटी पर कुछ लोग मौजूद थे जिनसे हमने गीता-विनोद-भुवन के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले तो बात करने से इनक़ार दिया लेकिन पहचान ज़ाहिर न करने का आश्वासन देने पर बात की.
वहां गांव की कुछ औरतें भी मौजूद थीं. उन्होंने सारा इल्ज़ाम गीता के ही सिर डाला. इसमें से कुछ महिलाएं उस परिवार से थीं जिनके घर के पुरुषों को अभियुक्त बनाया गया है. उनका कहना था कि सारे नाम ग़लत लिखाए गए हैं. कुछ ने तो ये भी कहा कि पैसा इस सारे घटनाक्रम में सबसे बड़ा कारण है.
इस पूरे मामले में अब भी कई ऐसे सवाल हैं जो अनसुलझे हैं.
पर सबसे अहम सवाल... रिश्ते, समाज और क़ानून की इस लड़ाई में उन तीन बच्चों का भविष्य क्या होगा?
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