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गुजरात में क्यों रोकी गई दलितों की बारात
- Author, भार्गव परिख
- पदनाम, बीबीसी गुजराती सेवा
गुजरात में पिछले कुछ दिनों में गांवों में दलितों की बारात में दूल्हे को घोड़ी ना चढ़ने देने के मामले सामने आ रहे हैं.
पिछले दिनों मेहसाणा जिले के ल्होर गांव में दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर ऊंची जाति के लोगों ने गांव के दलितों का बहिष्कार कर दिया था. इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था.
इसके बाद अरवल्ली ज़िले के मोढासाके खम्भीसर गांव में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. यहां पर दलित दूल्हा जब घोड़ी पर चढ़ा तो ऊंची जाति के लोगों ने उसका रास्ता रोक लिया और मामले को काबू में करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा. हालात की गंभीरता को देखते हुए यहां पुलिस फ़ोर्स तैनात करनी पड़ी.
आखिर गांव में हुआ क्या
खम्भीसर गांव में जयेश राठौड़ ने अपनी शादी में डीजे के साथ घोड़ी पर बैठ कर बारात निकालने का फ़ैसला किया. जैसे ही ये बात गांव वालों को पता चली उन्हें धमकियां मिलने लगीं.
इन धमकियों के बाद जयेश के परिवार ने बारात निकालने के लिए पुलिस से सुरक्षा की मांग की. पुलिस के आने के बावजूद गांव वालों ने जिस रास्ते से बारात जानी थी वहां हवन और राम भजन बजाने शुरू कर दिए.
जयेश के पिता डाह्या भाई ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, ''इस कारण हम बारात आगे नहीं ले जा सकते थे. पुलिस ने इन लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन इन लोगों ने हम दलितों को बहुत परेशान किया. ''
हालांकि काफ़ी मशक्कत के बाद पुलिस की मौजूदगी में जयेश की बारात निकल सकी.
पुलिस क्या कहती है
बीबीसी से बात करते हुए अरवल्ली के पुलिस अधिकारी मयूर पाटिल ने बताया, '' हमने लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे लोग काफ़ी उग्र थे. गांव में दो गुटों के बीच पत्थरबाज़ी हुई जिसे कंट्रोल करने के लिए हमें लाठीचार्ज करना पड़ा. इस मामले में हमने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. ''
जिस हम इस गांव पहुंचे उस वक्त तक यहां पुलिस बल तैनात थी.
साबरकांठा में भी ऐसा मामले आया सामने
साबरकांठा के प्रांतीज में अनिल राठौड़ नामक दलित युवक की बारात में भी उनके घोड़ी चढ़ने पर ऊंची जाति के लोगों ने ऐसा ही बवाल मचाया था.
अनिल के पिता रमेश भाई राठौड़ ने बीबीसी को बताया, '' मंदिर जाने के बाद बारात निकलने वाली थी लेकिन हमें वहां जाने से रोका गया. हमें डीजे ना बजाने को भी कहा गया. हमें पहले से ही डर था इसीलिए हमने पुलिस से मदद मांगी थी. फिर भी तनाव बढ़ा और बारात को तीन घंटे तक रोक कर रखा गया. डर की वजह से हमारा डीजे वाला और फोटोग्राफ़र भी भाग गए. मंदिर पर ताले लगा दिए गए थे हमने ये ताले तोड़ कर दर्शन किए. इसके बाद हम बारात निकाल सके.''
इस गांव के सवर्ण इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखते. मनुभाई ठाकोर कहते हैं, ''इस विवाद के पीछे डीजे का शोर ही मुख्य कारण था. हमारे घर में दो लोग बीमार थे तो हमने इनसे कहा कि डीजे की आवाज़ कम कर दें. उन्होंने बिना सोचे समझे ही झगड़ा शुरु कर दिया. हमने मंदिर के दर्शन को लेकर और बारात को लेकर कोई दवाब नहीं बनाया. ''
दलित बनाम ठाकोर की लड़ाई
दलितों के नेता केवल सिंह राठौड़ ने बताया, ''शादी के कार्ड में सिंह लिखना हो या दलितों के मूंछ रखने की बात हो या उनके बारात में घोड़ी चढ़ने की बात हो, इन्हें लेकर दलितों को परेशान किया जा रहा है. इससे साफ़ होता है कि गुजरात में दलितों को अछूत और अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है.''
जबकि ठाकोर समुदाय के नेता और कांग्रेस से अलग हुए अल्पेश ठाकोर ने बीबीसी गुजराती से कहा, '' हाल ही में जो घटनाएं गुजरात में हुई हैं. उनमें ठाकोर सेना के शामिल होने की झूठी बातें फैलाकर ठाकोर सेना को बदनाम किया जा रहा है. इससे पहले उत्तर भारतीय और बाहरी राज्य के लोगों के आने के मामले में मुझे बदनाम करने की कोशिश की गई थी. मैं मेरे क्षेत्र में दलित भाइयों की शादी में ठाकोर सेना के साथ जाता हूं और वहां जय भीम के नारे भी लगाता हूं. मैं मानवता में यकीन रखता हूं. लेकिन ऐसी घटनाएं मुझे बदनाम करने के लिए की जा रही हैं. ''
इस मामले में राज्य के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री ईश्वर परमार से हमने बात करने की कोशिश की संपर्क भी साधा लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला.
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