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गौतम गंभीर-आतिशी मार्लेना पर्चा विवाद
12 मई को चुनाव के छठे चरण में मतदान करने वाले पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में शुक्रवार को प्रचार का आख़िरी दिन है.
यहां भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी गौतम गंभीर, कांग्रेस प्रत्याशी अरविंदर सिंह लवली और आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी आतिशी में कड़ा त्रिकोणीय मुक़ाबला है.
इस कड़ी टक्कर से जुड़ी चुनावी गहमा गहमी को पूर्वी दिल्ली के माहौल में साफ़ महसूस किया जा सकता था.
बीती शाम एक प्रेस वार्ता में आतिशी ने अपने ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बातों से भरा एक पर्चा बंटवाने का आरोप गौतम गंभीर पर लगाया था. दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने साथ इस प्रेस-वार्ता में बैठी आतिशी, महिला-विरोधी, साम्प्रदायिक और जातिगत टिप्पणियों से भरे इस पर्चे की निंदा करते-करते रो पड़ी थीं.
जवाब में गौतम गंभीर ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पर्चा पूर्वी दिल्ली में नहीं बंटवाया. उल्टे उन्होंने आम आदमी पार्टी पर यह पर्चा 'प्लांट' करने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ मान-हानि का मुक़दमा दायर करने की बात कही. जवाब में कुछ ही घंटों में मनीष सिसोदिया ने गौतम गम्भीर के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दायर करने की बात कहकर इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया.
लेकिन शुक्रवार सुबह से ही अलग-अलग चुनावी रैलियों के सिलसिले को अपने मकानों और बाज़ारों से देख रही पूर्वी दिल्ली की जनता मतदान को लेकर चुपचाप अपनी राय क़ायम कर रही है.
दिल्ली के पॉश रिहाइशी इलाक़ों में गिने जाने वाले जंगपुरा एक्सटेंशन के निवासी प्रशांत वशिष्ठ आतिशी-गौतम गंभीर विवाद को प्रदेश की राजनीति में आई गिरावट से जोड़ते हैं. "कोई भी पार्टी जीते लेकिन इस तरह का विवाद सामने नहीं आना चाहिए. ख़ास तौर पर दिल्ली जैसे शहर में जहाँ जागरूकता और सोशल मीडिया का प्रभाव इतना ज़्यादा है, वहां तो बिल्कुल भी नहीं. हमारे बच्चे हैं और वो यह सब सोशल मीडिया पर पढ़ रहे हैं तो सोचोए उन पर क्या असर पड़ेगा?"
अपने बेटे पर इस विवाद के असर के बारे में बात करते हुए वह जोड़ते हैं,
"मेरा बेटा दसवीं क्लास में है और उसने मुझे बताया कि पापा ऐसा-ऐसा विवाद हो गया है. मुझे लगता है तीनों पार्टियों के लोगों के सामने आकर इस विवाद का खंडन कर माफ़ी माँगनी चाहिए थी. हम अच्छे पढ़े-लिखे प्रत्याशी और विकास चाहते हैं, इस तरह के विवाद नहीं".
उधर आइपी एक्सटेंशन की निवासी मधु जैन को इस विवाद के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने पूर्वी दिल्ली से भाजपा प्रत्याशी गौतम गंभीर के बारे में सुना तो है लेकिन वोट वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही देना चाहती हैं. "मोदी जी ने देश के लिए अच्छा काम किया है इसलिए मैं उन्हीं को वोट दूँगी".
दूसरी ओर जंगपुरा के निवासी और युवा वोटर गगन आतिशी-गौतम गंभीर विवाद को गौतम गम्भीर के पतन की तरह देखते हैं.
बीबीसी से बातचीत में वह कहते हैं, "गौतम गंभीर इतने अच्छे क्रिकेट प्लेयर थे और देश के लिए उन्होंने बहुत से गेम जीते. लेकिन अब चुनाव जीतने के उन्होंने यह विवादस्पद पर्चा बंटवाया और धीरे-धीरे इस विवाद में फ़ंसते चले जा रहे हैं. उस पर्चे में लिखी बातें पढ़कर हमारे इलाके की महिलाएं सुरक्षित कैसे महसूस कर सकती हैं?"
उनके साथ ही खड़े सुनील जैन मानते हैं कि आतिशी और आप की सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का कायाकल्प कर दिया है. "हम सब तो आप को वोट देने के मूड में हैं क्योंकि उन्होंने यहां के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल है. लेकिन ये जो विवाद हुआ, वो किसी ने भी करवाया हो - था वो गलत ही. किसी भी लेडी के बारे में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए".
वहीं लक्ष्मी नगर की निवासी आरती तिवारी इस बार गौतम गंभीर को वोट देने का माँ बना चुकी हैं. दिन के काम के लिए अपनी बस पकड़ने से पहले वह बीबीसी को बताती हैं, "आतिशी अपनी जगह ठीक होंगी लेकिन इस बार गौतम गम्भीर को मौक़ा दिया जाना चाहिए. आख़िर मोदी जी ने देश के लिए इतना कुछ किया है, हमारा वोट को उन्ही को जाएगा"
कुल मिलाकर बढ़ती ग़र्मी के साथ-साथ पूर्वी दिल्ली का चुनावी माहौल भी प्रचार के आख़री दिन गरमाया हुआ है. परिणाम का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह 23 मई को साफ़ हो जाएगा.
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