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रंजन गोगोई यौन उत्पीड़न मामला: उच्चतम न्यायालय से इंसाफ़ की मेरी उम्मीदें टूटीं-शिकायतकर्ता
सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक समिति ने चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को निराधार पाया है.
शिकायतकर्ता ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसे 'अन्याय' बताया है. उन्होंने कहा है कि, "मुझे जो डर था वही हुआ और देश के उच्चतम न्यायालय से इंसाफ़ की मेरी सभी उम्मीदें टूट गईं हैं."
आंतरिक समिति ने वरिष्ठता क्रम में नंबर दो जज, जस्टिस मिश्रा को अपनी रिपोर्ट 5 मई को ही पेश कर दी थी.
इस रिपोर्ट की एक कॉपी जस्टिस रंजन गोगोई को भी सौंपी गई है. शिकायतकर्ता महिला को रिपोर्ट की प्रति नहीं दी गई है.
महिला का कहना है कि रिपोर्ट देखे बिना वो ये नहीं जान सकतीं कि उनके आरोपों को किस बुनियाद पर ख़ारिज किया गया है.
रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं
ये रिपोर्ट सार्वजनिक भी नहीं की जाएगी.
इस बारे में कोर्ट की ओर से जारी विज्ञप्ति में इंदिरा जयसिंह बनाम सुप्रीम कोर्ट (2003) 5 एससीसी 494 मामले का हवाला देते हुए कहा है कि आंतरिक प्रक्रिया के तहत गठित समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है.
इंदिरा जयसिंह ने ट्वीट कर 'आम लोगों के हित में' रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की मांग की है.
उच्चतम न्यायालय की विश्वसनीयता पर सवाल
जाने-माने लेखक और पत्रकार मनोज मिट्टा कहते हैं कि ''इस मामले को लेकर महिला शिकायतकर्ता और न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की जो आशंकाएं थी वो सही साबित हुईं. आतंरिक समिति का ये कहना कि चीफ़ जस्टिस पर लगे यौन शोषण के आरोपों का कोई आधार नहीं है, उच्चतम न्यायालय की विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है.''
''एक ऐसी शिकायत जो बेहद हैरान करने वाली थी और बेहद विस्तृत रुप से जिसे रखा गया हो उससे कमेटी ये निष्कर्ष दे कर पीछा नहीं छुड़ा सकती. अगर हम आतंरिक समिति की रिपोर्ट प्रकाशित नहीं कर सकते तो कम से कम सुप्रीम कोर्ट को इस रिपोर्ट का सारांश सार्वजनिक करना चाहिए ताकि ये समझा जा सके कि किस आधार पर चीफ़ जस्टिस गोगोई पर लगे आरोपों को निराधार बताया गया है.''
मामला
सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने 19 अप्रैल को जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.
आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक समिति गठित की गई थी.
जस्टिस रंजन गोगोई ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि ये सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ रची जा रही बड़ी साज़िश का हिस्सा हैं.
आरोपों के बाद जस्टिस गोगोई ने कहा था शिकायतकर्ता के पीछे कुछ बड़ी ताक़तें हैं जो सुप्रीम कोर्ट को अस्थिर करना चाहती हैं.
समिति से न्याय की उम्मीद नहीं: शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता आंतरिक समिति के समक्ष दो बार पेश हुईं पर तीसरी बार पेश होने से इनकार कर दिया था.
शिकायतकर्ता महिला का कहना था कि उन्हें समिति के सामने अपने वकील के साथ पेश होने की अनुमति नहीं मिली है.
उनका कहना था कि बिना वकील और सहायक के सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों के सामने वो नर्वस महसूस करेंगी.
शिकायतकर्ता ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके ये भी कहा था कि उन्हें इस समिति से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है.
इसके बाद समिति की जांच जारी रही और चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने समिति के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखा था.
ये पहली बार है जब भारत के चीफ़ जस्टिस यौन उत्पीड़न के आरोपों में किसी जांच समिति के सामने पेश हुए.
सुप्रीम कोर्ट की इस आंतरिक समिति में जस्टिस बोबड़े के अलावा जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इंदू मल्होत्रा शामिल थीं.
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