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केरल के मुस्लिम संस्थान ने लगाया बुर्का पर बैन- प्रेस रिव्यू
केरल की प्रभावशाली मुस्लिम एजुकेशनल सोसाइटी (एमईसी) ने गुरुवार को बुर्का पर बैन लगा दिया.
एमईसी के मुताबिक़ उसने अपने तहत आने वाली संस्थाओं में छात्राओं को ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगा दी है, जिससे चेहरा ढक जाता है.
ये टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पहले पन्ने पर है. एमईसी भारत के सबसे बड़े समूहों में शामिल है, जिसके तहत 150 संस्थाएं आती हैं.
ख़बर के मुताबिक़ एमईएस ने कहा है कि उसने ये प्रतिबंध पिछले साल के हाईकोर्ट के आदेश के तहत लगाया है.
एक दिन पहले ही शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपी एक लेख में भी भारत में श्रीलंका की तरह बुर्का पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी. हालांकि बाद में पार्टी ने इससे ख़ुद को अलग कर लिया था.
कांग्रेस ने भी किया सर्जिकल स्ट्राइक का दावा
कांग्रेस ने गुरुवार को यूपीए के शासन काल के दौरान हुई छह सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी दी.
इसके एक दिन पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ज़ोर देकर कहा था कि उनकी सरकार के वक़्त पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में ऐसे कई अभियानों को अंजाम दिया गया था.
जिसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि वो स्ट्राइक तो "अदृश्य थी और किसी को उनके बारे में मालूम नहीं."
ये ख़बर हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के पहले पन्ने पर है.
मसूद अज़हर पर चीन से नहीं हुई सौदेबाज़ी
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि चरमपंथी मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में डलवाने के लिए भारत ने चीन के साथ कोई सौदेबाज़ी नहीं की.
जनसत्ता अखबार के मुताबिक़ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर मोल-भाव नहीं करता.
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में पुलवामा हमले या जम्मू-कश्मीर में चरमपंथी घटनाओं में मसूद अज़हर और उसके संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने का ज़िक्र नहीं होने को लेकर उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाना था."
विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन के समर्थन से भारत-चीन संबंधों में बेहतरी आएगी.
गढ़चिरौली हमला: आधा खाना छोड़कर ड्यूटी पर गए
बंद दुकानों और ख़ाली सड़कों के साथ कुरखेडा गांव गुरुवार को कोई भूतिया गांव लग रहा था.
यहां रहने वाला एक शख़्स एक दिन पहले हर रोज़ की तरह यहां से निकला तो था, लेकिन लौट कर नहीं आया.
गढ़चिरौली में बुधवार को हुए माओवादी हमले में 16 लोग मारे गए थे. इन्हीं में एक 24 साल के तोमेश्वर सिंहनाथ भी थे.
उनके बड़े भाई हितेंद्र ने बताया कि उन्हें दोपहर को एक बारात को लेकर जाना था, तभी उनके पास एक फोन आया.
उन्हें प्राइवेट कार से सुबह 11 बजे पुलिस वालों को पुराडा पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए कहा गया. उनके पास वक़्त था इसलिए उन्होंने हामी भर दी.
कुछ मिनटों में ही परिवार को धमाके की ख़बर मिली. इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने हमले में मारे गए ड्राइवर के परिवार वालों से बात कर ये रिपोर्ट प्रकाशित की है.
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