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गंगा नदी की पुरानी तस्वीरें और कांग्रेस पार्टी के नए दावे: फ़ैक्ट चेक
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
कांग्रेस पार्टी से संबंधित कुछ आधिकारिक ट्विटर और फ़ेसबुक पन्नों पर गंगा नदी की दो तस्वीरें शेयर की गई हैं जिनके आधार पर पार्टी ने बीजेपी सरकार की 'नमामि गंगे योजना' पर निशाना साधने की कोशिश की है.
गुजरात प्रदेश यूथ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से #DeshKiBhoolKamalKaPhool के साथ ट्वीट किया है, "25,000 करोड़ रुपये के 'नमामि गंगे प्रोजेक्ट' के तहत गंगा साफ़ होने के बजाय और प्रदूषित हुई".
गुजरात प्रदेश कांग्रेस, मुंबई प्रदेश कांग्रेस सेवा दल और गोवा प्रदेश कांग्रेस समेत पार्टी के कई अन्य आधिकारिक हैंडल्स ने भी #JaayegaTohModiHi और #NamamiGange हैश टैग के साथ इन दो तस्वीरों को शेयर किया है.
तुलना करने के लिए इस्तेमाल की गई इन तस्वीरों पर लिखा है, "जो गंगा भाजपा अपने विज्ञापनों में दिखाती है और गंगा का जो सच बीजेपी नहीं दिखाना चाहती".
लेकिन जब हमने इन तस्वीरों की जांच की तो पाया कि दोनों ही तस्वीरें भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने यानी 2014 से पहले की हैं.
साफ़ गंगा, पहली तस्वीर
रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि 'निर्मल गंगा' की यह तस्वीर साल 2012 की है जिसे नदी के घाट से दूर जाकर खींचा गया था.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ़ोटो शेयरिंग के लिए चर्चित वेबसाइट 'पिक्साबे' पर यह तस्वीर उपलब्ध है.
'पिक्साबे' के अनुसार 'Oreotikki' नाम के यूज़र ने 1 फ़रवरी 2012 को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के गंगा घाट की यह तस्वीर खींची थी जिसे जून 2017 में पिक्साबे पर अपलोड किया गया था.
फ़रवरी 2012 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार थी.
मैली गंगा, दूसरी तस्वीर
कांग्रेस पार्टी ने जिस दूसरी तस्वीर को बीजेपी के 'नमामि गंगा प्रोजेक्ट' की विफलता के तौर पर दिखाया है, वो साल 2011 की है.
आउटलुक पत्रिका के फ़ोटो एडिटर जितेंद्र गुप्ता ने यह तस्वीर खींची थी.
कुछ वक़्त पहले जितेंद्र गुप्ता की इस तस्वीर का इस्तेमाल बीजेपी नेताओं ने भी किया था.
तमिलनाडु की बीजेपी इकाई में महासचिव वनथी श्रीनिवासन ने इस तस्वीर के आधार पर लिखा था कि "कांग्रेस सरकार के समय (2014) और अब बीजेपी सरकार के दौरान (2019) गंगा की स्थिति में हुए बदलाव को देखिए".
बीजेपी नेताओं के इस तस्वीर से जुड़े दावे की पड़ताल करते समय हमने फ़ोटो एडिटर जितेंद्र गुप्ता से बात की थी.
उन्होंने बीबीसी को बताया था कि "साल 2011 के मध्य में वो गंगा के हालात पर फ़ोटो स्टोरी करने वाराणसी गए थे. ये उसी सिरीज़ की फ़ोटो है जो बाद में भी कई कहानियों में फ़ाइल तस्वीर के तौर पर इस्तेमाल हो चुकी है."
ख़ुद को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की आधिकारिक टीम बताने वाले ट्विटर यूज़र 'प्रियंका गांधी टीम' ने भी यह तस्वीर ट्वीट की है.
ऐसा नहीं है कि कांग्रेस पार्टी ने पहली बार इस आठ साल पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल किया है. अक्तूबर 2018 में छत्तीसगढ़ यूथ कांग्रेस ने यही तस्वीर ग़लत दावे के साथ ट्वीट की थी.
गंगा की सफ़ाई का रिएलिटी चेक
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने देश के नागरिकों से एक वायदा किया था.
उन्होंने कहा था कि वो साल 2020 तक प्रदूषित गंगा नदी को साफ़ करने का काम करेंगे.
साल 2015 में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार ने इसके लिए पाँच साल के कार्यक्रम की शुरुआत की और 300 करोड़ रुपये का बजट भी रखा.
बीते साल दिसंबर में मोदी ने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी में एक रैली में कहा कि गंगा में प्रदूषण कम करने में सरकार को सफलता मिल रही है.
लेकिन विपक्ष का दावा है कि सरकार इस मामले में अपना वादा पूरा नहीं कर पा रही है.
बीबीसी की रिएलिटी चेक टीम ने इन दावों की पड़ताल की. इस टीम ने पाया कि गंगा की सफ़ाई का काम वाकई बेहद धीमी गति से चल रहा है.
हालांकि इस समस्या पर पहले से काफ़ी अधिक धन ख़र्च किया जा रहा है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि 1,568 मील लंबी इस नदी को साल 2020 तक पूरी तरह साफ़ किया जा सकेगा.
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