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आरएसएस के लोगों को करेंगे संस्थानों से बाहरः पित्रोदा
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
केंद्र में अगर कांग्रेस की सरकारी बनी तो पहले 100 दिनों में आरएसएस से जुड़े लोगों को सरकारी संस्थाओं से बाहर किया जाएगा.
गांधी परिवार के क़रीबी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने बीबीसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा "ये क्लीनिंग-अप (सफ़ाई) सबसे पहला बड़ा काम है."
सैम पित्रोदा मानते हैं कि वर्तमान मोदी सरकार ने संस्थाओं में इस तरह के लोगों को बहाल कर दिया है जो सरकारी संस्थाओं के काम-काज में लगातार दख़ल देते रहते हैं जिसका असर संस्थाओं की स्वायत्ता पर पड़ता है.
पित्रोदा ने उदाहरण के तौर पर शिकागो स्थित भारतीय दूतावास का उदाहरण दिया और दावा किया कि वहां आरएसएस की पृष्ठभूमि से जुड़े एक व्यक्ति की बहाली से विदेश सेवा के लोग बेहद परेशान हैं.
कांग्रेस पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र के समिति के सदस्य पित्रोदा का कहना था कि दूसरा काम होगा मैनिफेस्टो को सभी मंत्रालयों के हवाले करके उन्हें किए गए वायदों को पहले 50, 100 और 150 दिनों में पूरा करने का टार्गेट देना.
मगर जब उनसे पूछा गया कि घोषणा पत्र में सैनिकों को मिले विशेषाधिकार आफ्सपा और राजद्रोह क़ानून को समाप्त करने का जो वायदा है वो कितने दिनों में पूरा होगा, पित्रोदा ये कहते हुए बच निकलने की कोशिश करते हैं कि सुरक्षा क्षेत्र में उनकी दक्षता नहीं.
भारतीय सेना को कश्मीर और उत्तर-पूर्व के कई राज्यों में विशेषाधिकार हासिल हैं, हालांकि मानवधिकार संस्थाएं और उन क्षेत्रों के शहरी आफ्सपा को हटाए जाने की मांग करती रही हैं.
आफ्सपा और राजद्रोह पर कांग्रेस के चुनावी वायदों पर भारतीय जनता पार्टी ने ये कहते हुए मुद्दा बनाया कि लगता है कि इसकी छपाई पाकिस्तान में हुई है.
कांग्रेस में इसके बाद इस मुद्दे पर लगभग चुप्पी सी है.
हालांकि पित्रोदा पार्टी द्वारा किए गए वायदों को पूरा करने का दावा करते हैं, लेकिन ये नहीं बताते कि कांग्रेस पार्टी को फ़िलहाल इन चुनावों में कितनी सीटें मिलेंगी.
मगर वो ये मानते हैं कि शायद एक मिली-जुली सरकार सत्ता में आए.
ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री कौन के सवाल पर सैम पित्रोदा कहते हैं कि ये मिल जुलकर तय होगा.
वो मानते हैं कि प्रियंका गांधी की राजनीति में इंट्री थोड़ी देर से ज़रूर हुई लेकिन वो ये कहते हैं कि प्रियंका को कब राजनीति में आना है इसका फ़ैसला उन्हें करना था.
इस सवाल पर कि क्या प्रियंका चुनाव लडेंगी और वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ लड़ेगी? पित्रोदा एक बार फिर इसी जवाब को दोहराते हैं.
प्रियंका गांधी ने कहा है कि अगर राहुल गांधी यानी कांग्रेस अध्यक्ष चाहेंगे तो वो इसके लिए तैयार हैं.
सैम पित्रोदा का मानना है कि बेरोज़गारी इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है.
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