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बीजेपी में ख़ुद को उपेक्षित मान रहे भूमिहार: सीपी ठाकुर
- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद सीपी ठाकुर ने माना है कि मौजूदा सियासी हालात में राज्य का भूमिहार समाज बीजेपी में ख़ुद को उपेक्षित मान रहा है.
बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा, "कहीं न कहीं भूमिहार ओवरलुक हो गए हैं. इस संबंध में बातचीत के लिए नई दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हम लोग मिले थे. अमित शाह ने कहा कि इस पर बाद में विचार करेंगे और उनकी विभिन्न मांगों पर विचार किया जाएगा. जान-बूझकर तो किसी ने उपेक्षा नहीं की होगी, लेकिन हालात बन गए होंगे जिसमें भूमिहार ओवरलुक हो गए."
भूमिहार समाज भविष्य का नेता कन्हैया कुमार में देखेगा या गिरिराज सिंह में?
हम इस पर कोई कमेंट इसलिए नहीं करेंगे. पहली कि हमारी पार्टी के प्रतिनिधि गिरिराज सिंह वहाँ हैं, हम लोग चाहेंगे कि वो जीतें. दूसरा ये वो जगह (बेगूसराय) बहुत पढ़े-लिखे और जानकारी रखने वाले लोगों की है. कांग्रेस के कई बड़े नेता वहाँ से आए हैं. (बेगूसराय से गिरिराज सिंह भाजपा के टिकट पर और कन्हैया कुमार सीपीआई के टिकट पर चुनाव मैदान में है.)
रहा कन्हैया का सवाल तो हर पार्टी में युवा लोग अच्छा काम कर रहे हैं. अलग-अलग पार्टियां हैं और विचारधाराएं अलग हैं. जो ज़्यादा मेहनत करेगा, जनता जिसे ज़्यादा पसंद करेगी, वो जीतेगा.
आपकी पार्टी ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल से टिकट दिया है, उन पर मालेगांव ब्लास्ट मामले में संगीन आरोप हैं. आप उन्हें पार्टी का टिकट दिए जाने से सहमत हैं?
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की इतनी पिटाई की गई कि वो ठीक से चल भी नहीं पाती थीं. कोई सिर्फ़ इसलिए मार खाए कि हम हिंदू हैं और हिंदुत्व के लिए लड़ाई लड़े, तो वो ठीक नहीं है. इसलिए पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है और मेरे हिसाब से ठीक किया है.
प्रज्ञा ने कोई ग़लत काम नहीं किया था. भारत में हिंदुत्व का नाम ले लेना कोई पाप तो है नहीं.
आपने आडवाणी और अटलजी की लीडरशिप में भी पार्टी को देखा है और अब मोदी और अमित शाह की नई लीडरशिप आई, दोनों में कुछ फ़र्क महसूस करते हैं?
फ़र्क कुछ नहीं है. ये सिलसिला है, जो पहले से चल रहा है, वही सिलसिला चल रहा है.
बीजेपी पर आरोप लग रहा है कि वो अपने वरिष्ठों की उपेक्षा कर रही है. आडवाणी जैसे नेताओं का टिकट काट दिया गया?
वरिष्ठों की उपेक्षा नहीं की गई है. हमने तो ख़ुद कहा है कि हम चुनाव नहीं लड़ेंगे. आडवाणी जी 90 से अधिक साल के हो गए होंगे. दुनिया के किसी देश में इस उम्र में कोई चुनाव नहीं लड़ता. ऐसा नहीं है कि उनसे सलाह-मशविरा नहीं किया जाता, उनसे भी पूछा जाता है. इसलिए युवा को टिकट दिया गया.
बिहार ने जातीय नरसंहार का दौर आपने करीब देखा है. उसके लिए आप किसी राजनीतिक पार्टी को ज़िम्मेदार मानते हैं?
बिल्कुल. बेकसूर लोग मारे गए, उसके लिए उस वक़्त की सरकार ही ज़िम्मेदार थी. कोई व्यक्ति विशेष तो कर नहीं सकता था, ये सब. सब कुछ योजना बनाकर किया जाता था.
पार्टी से कोई नाराज़गी है क्या?
नहीं, मेरी पार्टी से कोई नाराज़गी नहीं है. जहाँ तक बेटे को टिकट मिलने न मिलने का सवाल है तो आज नहीं तो कल मिलेगा.
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