मायावती के भतीजे आकाश की पहली रैली कैसी रही

    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

चुनाव आयोग ने जब बीएसपी नेता मायावती के प्रचार करने पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया तो मंगलवार को आगरा की रैली को संबोधित करने का दायित्व मायावती ने अपने भतीजे आकाश को सौंपा.

आकाश ने महज़ तीन मिनट का संक्षिप्त और लिखा हुआ भाषण पढ़ा जिसमें लोगों से गठबंधन को वोट देने की अपील से ज़्यादा और कुछ नहीं था. लेकिन राजनीतिक जगत में आकाश के इस औपचारिक प्रवेश ने जमकर सुर्खियां बटोरीं.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरएलडी नेता अजीत सिंह और बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र की मौजूदगी में आकाश ने 'जय भीम' के नारे के साथ जब भाषण की शुरुआत की तो दर्शकों की ओर से उन्हें जमकर प्रोत्साहन मिला जिससे वो कितने अभिभूत थे, ये उन्हें देखकर समझा जा सकता था.

क़रीब तीन महीने पहले सुर्खियों में आए आकाश पिछले कुछ समय से मायावती के साथ साये की तरह चल रहे थे. चर्चा जब ज़्यादा हुई तो मायावती ने ख़ुद ही इस बात की घोषणा कर डाली कि आकाश उनके भतीजे हैं और उनके साथ रहकर राजनीति का ककहरा सीख रहे हैं.

लेकिन अचानक जब मायावती पर चुनाव आयोग ने शिकंजा कसा तो आकाश को जल्द ही चुनावी रैली को संबोधित करने का भी मौक़ा मिला.

आकाश की स्वीकार्यता

रैली में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार रियाज़ हाशमी कहते हैं, "मायावती का जो मतदाता है उसके लिए बहनजी के नाम पर कोई भी कुछ कहे, उन्हें पूरी तरह से स्वीकार्य है."

"आकाश अभी राजनीति में ही नहीं, उम्र में भी कच्चा ही है. लेकिन उसने जो कुछ भी बोला, भले ही बेहद संक्षिप्त रहा हो, सब कुछ लिखा हुआ ही पढ़ा हो लेकिन बहनजी के नाम पर उनके मतदाताओं को उसका संबोधन ही काफ़ी था."

"भीड़ ने जिस तरह आकाश का समर्थन किया और नारेबाज़ी में उनका साथ दिया, उससे ये पता चलता है कि मायावती का मतदाता आकाश का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार बैठा है."

हाशमी के अनुसार, आकाश का ये पहला लेकिन अच्छा प्रयास था, बाक़ी बेहतर करने की गुंज़ाइश बहुत है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता.

रियाज़ हाशमी का कहना है, "राजनीति सिर्फ़ देखने से या पढ़ने से ही नहीं आती है, जब तक कि उसे झेलना न पड़े. आकाश में अभी उतनी परिपक्वता नहीं है लेकिन जो व्यक्ति रात-दिन उसी में लगा है तो परिपक्वता भी उम्र बढ़ने के साथ आएगी ही."

अपने भाषण में आकाश ने रैली में आई जनता से कहा, "आज आप मेरी बुआ जी की अपील पर यहां इतनी बड़ी संख्या में इकट्ठे हुए हैं. इसके लिए हम लोग आप सभी के बहुत-बहुत आभारी हैं. आप सभी से यही अपील करता हूं कि गठबंधन के प्रत्याशियों को भारी वोटों से विजयी बनाएं और सामने वालों की ज़मानत ज़ब्त कराएं. यही आप सबका चुनाव आयोग को सही जवाब होगा."

युवाओं में उम्मीद

रैली में शामिल आगरा के स्थानीय पत्रकार मनोज अलीगढ़ी बताते हैं कि बहुजन समाज पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को आकाश के इस संबोधन ने काफ़ी प्रभावित किया.

उनके मुताबिक़, "युवाओं में एक अलग जोश था. हालांकि आकाश ने भाषण का एक-एक शब्द कागज़ देखकर ही पढ़ा लेकिन उनका लहजा और पढ़ने का तरीक़ा पढ़े-लिखे युवाओं को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त था. इनसे बातचीत के बाद ये पता लगा कि आकाश को लेकर इन युवाओं में इसलिए भी इतनी दिलचस्पी है क्योंकि उन्हें ही लोग बहनजी के उत्तराधिकारी के रूप में भी देख रहे हैं."

मनोज के मुताबिक़, रैली में आए कई लोगों ने साफ़ तौर पर कहा कि बहुजन समाज पार्टी में रणनीति बनाने या फिर पार्टी में योगदान देने के लिए दूसरे नेताओं का चाहे जितना महत्व हो लेकिन पार्टी की कमान वो दलित समुदाय के ही हाथ में देखना चाहते हैं.

आकाश के सक्रिय राजनीति में आने से उन्हें काफ़ी संतोष और उम्मीद दोनों ही है.

हालांकि लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का सोचना इससे थोड़ा अलग है. उनका कहना है, "ऐसे लोगों में राजनीतिक योग्यता या फिर उनके पहले भाषण इत्यादि का मूल्यांकन करने का कोई अर्थ नहीं है. बीएसपी के लोगों को ठीक वैसे ही आकाश को स्वीकार करना है जैसे समाजवादी पार्टी के नेताओं को अखिलेश को स्वीकार करना पड़ा या फिर गांधी परिवार में चल रही वंशवादी परंपरा को. दूसरी पार्टियों में भी ऐसा ही है. यदि योग्यता की बात करें तो आकाश ने दो-तीन मिनट भी जो कुछ बोला है उसमें सिवाय दो लाइन की वोट देने की अपील के और था ही क्या?"

आगरा की रैली में मिला मौक़ा

शरत प्रधान ये भी कहते हैं कि आकाश जो कुछ भी बोलेंगे 'मायावती के भक्त' उसी तरह ताली बजाएंगे जैसे दूसरी पार्टियों में नेताओं के कथित भक्त बजाते हैं. उनके मुताबिक़ इसमें कोई राजनीतिक संभावना देखना बहुत जल्दबाज़ी होगी, "कांशीराम की बनाई ज़मीन पर जब तक दलित मायावती के साथ हैं तब तक उनकी राजनीति चलती रहेगी, चाहे वो आकाश को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजें या फिर किसी और को."

हालांकि रैली में मौजूद कुछ लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली में आकाश का सभा में शामिल लोगों से ये कहलवाना कि 'आप मेरा साथ देंगे कि नहीं देंगे....' और फिर उनसे तेज़ आवाज़ में जवाब की अपील करना, ज़रूर भाया.

रैली में शामिल मथुरा निवासी दिनेश प्रसाद सिर्फ़ इतना कहते हैं, "बहुत बढ़िया बोला...अभी उसकी उमर ही कितनी है. बहुत आगे जाएगा."

लखनऊ में बीएसपी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि आकाश ने सतीश चंद्र मिश्र के लिए जिस तरह से आदरसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया, उससे ये साफ़ है कि उनका महत्व न सिर्फ़ मायावती बल्कि आकाश भी महसूस कर चुके हैं.

बीएसपी नेता ने ये भी जोड़ा, "सच्चाई यही है कि जय भीम के नारे से शुरुआत और जय भीम-जय भारत से समापन तक की एक-एक बात न सिर्फ़ लिखी गई थी बल्कि कई बार प्रैक्टिस भी कराई गई होगी."

वहीं रैली में आए कुछ लोगों को भी ये बात अखरी कि मायावती ने भले ही देखकर भाषण देने की छवि बना रखा ही हो लेकिन आकाश से लोग यही उम्मीद किए थे कि वो भले ही थोड़ा बोलेंगे लेकिन बिना देखे बोलेंगे.

आकाश मायावती के भाई आनंद के बेटे हैं, विदेश से पढ़कर आए हैं और पिछले कुछ समय से मायावती के साथ ही रहकर राजनीति की बारीकियां सीख रहे हैं.

बीएसपी नेताओं के मुताबिक़, मायावती भतीजे आकाश को बसपा में युवा नेता के तौर पर स्थापित करने में लगी हैं और उसे पार्टी की अहम ज़िम्मेदारी देने की तैयारी कर रही हैं. आगरा की रैली को संबोधित करने का फ़ैसला अचानक भले ही रहा हो लेकिन इससे उन्हें इस रूप में आज़माने का भी एक मौक़ा मिल गया.

परिवारवाद

बीएसपी में कोई फ्रंटल संगठन नहीं है लेकिन युवा संगठन की ज़रूरत सभी नेता महसूस करते हैं. ये अलग बात है कि इस बारे में अब तक किसी ने सवाल नहीं उठाए हैं.

लेकिन माना यही जा रहा है कि जिस तरह से भीम आर्मी जैसे युवा संगठनों की पैठ और दलित समाज में स्वीकार्यता बढ़ रही है, बीएसपी भी अब अपने युवा संगठन को मज़बूत करेगी और आकाश के रूप में उसे एक नेता भी मिल गया है.

हालांकि मायावती ख़ुद राजनीति में परिवारवाद के ख़िलाफ़ थीं और भाई आनंद के अलावा उनके किसी रिश्तेदार या परिवार के किसी अन्य सदस्य का कभी बीएसपी में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कोई दख़ल भी देखने को नहीं मिला है. लेकिन भाई आनंद के प्रति उनका लगाव शुरू से रहा.

आनंद इस वक़्त बीएसपी के संगठन में किसी पद पर नहीं हैं लेकिन पार्टी में वो कितने प्रभावी हैं ये लोग भली-भांति जानते हैं.

अब उनके बेटे आकाश को मायावती जिस तरह से तवज्जो दे रही हैं तो राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा भी तेज़ है कि आने वाले दिनों में आकाश ही मायावती के उत्तराधिकारी हो सकते हैं.

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