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रफ़ाल डील, अनिल अंबानी और फ्रांस में टैक्स रिबेट, क्या है पूरा मामला
रफाल मामले पर कारोबारी अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.
फ्रांस के एक चर्चित अखबार ला मोंद की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक फ़रवरी से अक्टूबर 2015 के बीच फ्रांस सरकार ने अनिल अंबानी की एक कंपनी को लगभग 1100 करोड़ रुपए की टैक्स छूट दी.
फ्रांसीसी अख़बार के दावे के बाद अनिल अंबानी की कंपनी ने बयान जारी करके टैक्स छूट में किसी पक्षपात या फ़ायदे से इंकार किया है.
रिलायंस कम्यूनिकेशन ने ये भी कहा है कि उसने अपने टैक्स संबंधी मुद्दे को फ़्रांस में लागू क़ानून के तहत ही सुलझाया था.
क्या है नया दावा
फ्रांसीसी अख़बार के अनुसार 'रिलायंस फ़्लैग एटलांटिक फ़्रांस' (आरएफ़एएफ़) नाम की इस कंपनी को 14 करोड़ 37 लाख यूरो यानी लगभग 1100 करोड़ रुपए की टैक्स वसूली रद्द की गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक इस टैक्स राहत से कुछ महीने पहले ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़्रांसीसी कंपनी दसो एविएशन के साथ 36 रफाल लड़ाकू विमान खरीदने की अपनी योजना की घोषणा की थी.
बताया गया है कि आरएफ़एएफ़ का स्वामित्व अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस के पास है. यह एक फ़्रांसीसी कंपनी है.
भारत में चल रहे लोकसभा चुनावों में विपक्ष लगातार रफ़ाल सौदे में गड़बड़ियों की बात उठाता रहा है.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इसमें सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को शामिल बता चुके हैं और उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा चुके हैं.
रिपोर्टर ने किए कई ट्वीट
इस रिपोर्ट के संबंध में ला मोंद के दक्षिण एशिया के संवाददाता जुलियन बोसू ने कई ट्वीट किए हैं.
जूलियन ने अपने ट्वीट में बताया है कि अनिल अंबानी की फ़्रांस में एक टेलीकॉम कंपनी रजिस्टर्ड है, जिसका नाम रिलायंस अलटांलिक फ़्लैग फ़्रांस है.
दूसरे ट्वीट में उन्होंने बताया, ''अनिल अंबानी की इस फ़्रांसीसी कंपनी की फ़्रांस के टैक्स विभाग ने जांच की और पाया कि साल 2007 से 2010 तक कंपनी पर 60 मिलियन यूरो टैक्स बकाया है.''
जूलियन ने तीसरा ट्वीट लिखा, ''रिलायंस ने इस मामले को खत्म करन क लिए 7.6 मिलियन यूरो की पेशकश की थी जिसे फ़्रांस के टैक्स विभाग ने इंकार कर दिया. उन्होंने कंपनी पर साल 2010 से 2012 के बीच एक और जांच बैठाई और इसमें 91 मिलियन यूरो और टैक्स मांगा.''
''अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने दसौ के साथ 36 लड़ाकू विमान खरीदने की योजना की घोषणा की. उस समय रिलायंस पर फ़्रांस में कम से कम 151 मिलियन यूरो का टैक्स बकाया था.''
''मोदी के रफ़ाल विमान खरीदने की घोषणा के छह महीने बाद ही फ़्रांस के टैक्स विभाग ने 151 मिलियन यूरो की जगह समझौते के तौर पर 7.3 मिलियन यूरो लाने पर ही मान गया.''
'' तो इस तरह फ़रवरी से अक्टूबर 2015 तक जब फ़्रांस और भारत के बीच रफ़ाल सौदा हो रहा था, तब अनिल अंबानी को 143.7 मिलियन यूरो (करीब 1100 करोड़ रुपए) के टैक्स की छूट मिल गई. यह तो बहुत ही अच्छी डील हुई, है ना?''
जूलियन ने ट्वीट कर बताया कि उन्हें यह सारी जानकारियां जुटाने में कई महीने लग गई.
उन्होंन लिखा है, ''हमने इस स्टोरी को अंग्रेज़ी में ना चलाने का फ़ैसला इसलिए लिया क्योंकि हम अनुवाद के दौरान होने वाली किसी भी छोटी से छोटी चूक से बचना चाहते थे, क्योंकि इस स्टोरी का एक-एक शब्द बहुत अहम है.''
रिलायंस ने रखा अपना पक्ष
फ़्रांसीसी अख़बार में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद रिलायंस कंपनी ने भी अपना पक्ष सामने रखा है. रिलायंस की ओर से इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है.
रिलायंस की ओर से कहा गया है कि रिलायंस फ्लैग़ के टैक्स संबंधी मुद्दा साल 2008 यानी करीब 10 साल पुराना है. रिलायंस फ़्लैग ने उन टैक्स को अवैध बताया है.
रिलायंस ने उस समझौते में किसी तरह के पक्षपात या फ़ायदे से इंकार किया है. रिलायंस ने ये भी कहा है कि उसने अपने टैक्स संबंधी मुद्दे को फ़्रांस में लागू क़ानून के तहत ही सुलझाया था.
रिलायंस फ़्लैग अलटांटिक फ़्रांस एसएएस भारत के रिलायंस कम्युनिकेशन की एक सहायक कंपनी है. फ़्लैग फ़्रांस के पास अपने क्षेत्र के केबल नेटवर्क और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर हैं.
जिस दौरान फ़्रांस के टैक्स विभाग ने अपनी जांच की थी यानी साल 2008 से 2012 के दौरान, उस समय फ़्लैग फ़्रांस 20 करोड़ रुपए के नुकसान पर थी.
फ़्रांस के टैक्स विभाग ने उस दौरान 1100 करोड़ रुपए के टैक्स की मांग की. लेकिन फ्ऱांस में लागू टैक्स नियमों के आधार पर दोनों पार्टियां 56 करोड़ रुपए के अंतिम भुगतान पर सहमत हो गईं.
विपक्षी एक बार फिर हमलावर
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद एक बार फिर विपक्ष ने मोदी सरकार पर हमले शुरू कर दिए हैं.
कांग्रेस ने ट्वीट किया है, ''यह रहा सचः पीएम मोदी टैक्स देने वालों की जेब से पैसा निकालकर रफ़ाल विमानों को महंगे सौदे में इसलिए खरीदकर लाए ताकि वो अनिल अंबानी के पैसे बचा सकें.''
कांग्रेस के नेता संजय झा ने ट्वीट किया, ''मोदी की जांच होनी चाहिए, वे भ्रष्ट हैं. अनिल अंबानी को फ़्रांस में टैक्स में छूट मिलना ताबूत में अंतिम कील की तरह है.''
आम आदमी पार्टी की नेता प्रीति शर्मा मेनन ने लिखा, ''वाओ! रफ़ाल घोटाले का भूत फिर बाहर निकल रहा है. मोदी के रफ़ाल जेट ऑर्डर करने के बद ही अनिल अंबानी को इतनी बड़ी टैक्स छूट मिली, यह कितना प्यारा संयोग है.''
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