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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गोपनीयता के नाम पर मीडिया की रिपोर्ट नहीं रोकी जा सकती: - प्रेस रिव्यू
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी क़ानून मीडिया को गोपनीय काग़ज़ात प्रकाशित करने से नहीं रोक सकता.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय के कौल ने बुधवार को दिए अपने एक फ़ैसले में एक बार फिर प्रेस की आज़ादी की अहमियत पर ज़ोर दिया.
अदालत ने कहा, "न तो भारतीय संसद का बनाया कोई क़ानून और न अंग्रेज़ों का बनाया 'ऑफ़िशियल सीक्रेट ऐक्ट' मीडिया को कोई दस्तावेज़ या जानकारी प्रकाशित करने से रोक सकता है और न ही कोर्ट इन दस्तावेज़ों को 'गोपनीय' मान सकता है."
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'राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जानकारी नहीं छिपा सकता केंद्र'
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर आरटीआई या सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकती है.
हालांकि अदालत ने अपने फ़ैसले में ये भी कहा है कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ जानकारी मांगने भर से जानकारी मिल जाएगी. सूचना मांगने वाले को अपने तर्कों से ये साबित करना होगा कि ऐसी जानकारी छिपाना, जानकारी देने से ज़्यादा नुक़सानदेह हो सकता है.
ये ख़बर भी टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी है.
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मोदी के ख़िलाफ़ चुनावी मैदान में रिटायर्ड जज
नवभारत टाइम्स में ख़बर है कि कोलकाता और मद्रास हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कर्णन वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे.
63 साल के जस्टिस कर्णन दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. मध्य चेन्नई लोकसभा सीट से वो पहले ही अपना नामांकन दाख़िल कर चुके हैं और वाराणसी उनका दूसरा निर्वाचन क्षेत्र होगा.
जस्टिस कर्णन ने साल 2018 में ऐंटी-करप्शन डायनमिक पार्टी (एसीडीपी) का गठन किया था, जिसके उम्मीदवार के रूप में उन्होंने अपना पर्चा दाख़िल किया है.
जस्टिस कर्णन पद पर रहते हुए अदालत की अवमानना के लिए दोषी पाए जाने वाले पहले न्यायाधीश थे. इस कारण उन्हें जून 2017 में अपने रिटायरमेंट के बाद छह महीने की जेल की सज़ा काटनी पड़ी थी.
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मीडिया में 'पक्षपात' की गंभीर समस्या: सुप्रीम कोर्ट
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ रफ़ाल मामले पर फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस केएम जोसेफ़ ने कहा है कि मीडिया के कुछ तबक़ों में 'पक्षपात' का चलन ज़ोर पकड़ रहा है जो कि एक गंभीर समस्या है और चिंताजनक है.
जस्टिस जोसेफ़ ने कहा कि अगर मीडिया अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास किए बिना अपनी आज़ादी की बात करता है तो इससे लोकतंत्र कमज़ोर होगा.
अख़बारों में छाया भारतीय चुनाव
आज सभी अख़बारों के पन्ने चुनाव की ख़बरों से भरे नज़र आ रहे हैं. अलग-अलग तस्वीरों और दिलचस्प सुर्खि़यों के साथ अख़बारों ने इन ख़बरों को छापा है.
हिंदुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर एक तस्वीर भी है जिसमें चुनाव आयोग के अधिकारी में ईवीएम लेकर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जाते हुए दिख रहे हैं.
नवभारत टाइम्स का शीर्षक है- वोट घड़ी आ गई
इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने पर एक तस्वीर भी छपी है जिसमें चुनाव की पूर्वसंध्या पर असम के माजुली जाते निर्वाचन अधिकारी दिख रहे हैं.
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