लोकसभा चुनाव 2019: पहले चरण का मतदान संपन्न

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लोकसभा चुनाव के पहले दौर में गुरुवार 11 अप्रैल को 18 राज्यों और दो केंद्र-शासित प्रदेशों की 91 सीटों पर मतदान संपन्न हो गया है. नक्सल प्रभावित महाराष्ट्र की सात और छत्तीसगढ़ की बस्तर सीट पर मतदान पाँच बजे समाप्त हो गया.
चुनाव आयोग के अनुसार छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा.
शुरुआती जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में 64%, उत्तराखंड में 57%, बिहार में 50%, आंध्र प्रदेश में %, तेलंगाना में 60%, जम्मू-कश्मीर में 54%, छत्तीसगढ़ में 56%, पश्चिम बंगाल में 81%, असम में 68%, सिक्किम में 69%, मिज़ोरम में 60%, नागालैंड में 78%, मणिपुर में 78.2%, त्रिपुरा में 81% और अंडमान निकोबार में 76% मतदान हुआ.
चुनाव आयोग ने बताया कि ईवीएम नष्ट होने की आंध्र प्रदेश में 6, अरूणाचल प्रदेश में 6, मणिपुर में 2 और बिहार तथा पश्चिम बंगाल में 1-1 घटनाओं की सूचना मिली है.

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पहले चरण में कहाँ-कहाँ हुआ मतदान -
कुल सीटें: 91
- आंध्र प्रदेशः 25
- तेलंगानाः 17
- उत्तर प्रदेशः 8
- महाराष्ट्रः 7
- उत्तराखंड,असमः 5
- बिहार, ओड़िशाः 4
- पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, जम्मू-कश्मीरः 2
- छत्तीसगढ़, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीपः 1

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वोट देने से रह गए कुछ लोग
उत्तर प्रदेश में मुज़फ़्फ़रनगर में बसपा कार्यकर्ताओं ने वोट देने से रोकने के आरोप लगाए.
उत्तर प्रदेश के बागपत संसदीय क्षेत्र में कई मुस्लिम और दलित मतदाताओं ने शिकायत की कि उनके नाम वोटर लिस्ट से ग़ायब हैं.
बागपत में मौजूद बीबीसी संवाददाता गीता पांडे को एक मतदाता ने बताया कि मुस्लिम बहुल इलाके माया कॉलोनी और मुग़लपुरा में कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से ग़ायब थे.
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विकलांग लोगों के लिए वॉलंटियर
- इस साल चुनाव आयोग ने विकलांग लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की.
- आयोग ने विकलांग, दृष्टिहीन लोगों के लिए लाने ले जाने और वॉइस मैसेज से सूचना देने के साथ इस काम में मदद के लिए वॉलंटियरों की भी व्यवस्था की.
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गर्मी के बीच मतदान
- मतदाताओं को कई जगहों पर तीखी गर्मी में मतदाताओं को लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ा.
- बीबीसी मराठी के संवाददाता मयूरेश ने बताया कि नागपुर में आज का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया.

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- असस से पत्रकार दिलीप शर्मा ने बताया कि वहाँ कड़ी धूप और गर्मी के बावजूद लोगों में मतदान को लेकर उत्साह देखा गया.

वोट डालने पहुँचा दूल्हा
- संजय सावरकर की आज शादी है लेकिन वो रास्ते में वोट देना नहीं भूले. यह तस्वीर महाराष्ट्र में वर्धा ज़िले के एक मतदान केंद्र की है.

छत्तीसगढ़ की एक बूथ पर केवल दो वोट
- छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा ज़िले के एक मतदान केंद्र किलेपल से बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने बताया कि इस मतदान केंद्र पर केवल दो वोट पड़े. यहां की दीवारों पर माओवादियों ने मतदान के बहिष्कार का संदेश लिखा था.

आंध्र प्रदेश में हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत
- आंध्र प्रदेश में मतदान के दौरान दो राजनीतिक पार्टियों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई. वहाँ से बीबीसी तेलुगू के एक संवाददाता के अनुसार सत्ताधारी तेलुगू देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस के समर्थकों में अनंतपुर ज़िले के एक मतदान केंद्र पर हिंसक झड़प हुई और इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई.
- इसमें चार अन्य लोग ज़ख़्मी भी हुए. गुंटुर ज़िले में भी हिंसक झड़प हुई. आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 25 सीटों पर मतदान हुआ.
पश्चिम बंगाल में झड़प
- पश्चिम बंगाल कूच बिहार में झड़प की ख़बर आई. बीजेपी ने आरोप लगाया सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के समर्थकों ने उनके समर्थकों पर हमला बोला. मगर टीएमसी ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया.
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अगर मोदी नहीं तो कौन?
- नरेंद्र मोदी को मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी चुनौती दे रहे हैं. राहुल अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो वो नेहरू गांधी परिवार के चौथे सदस्य होंगे. 2014 में राहुल गांधी के हाथ में कांग्रेस की कमान नहीं थी लेकिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी के चुनावी अभियान को लीड किया था और बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था.

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भारतीय चुनाव के केंद्र में कौन?
- 68 साल के नरेंद्र मोदी इस आम चुनाव के केंद्र में हैं. कई लोगों को लगता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में ध्रुवीकरण बढ़ा है. मोदी के नेतृत्व में ही भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के आम चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी. हालांकि इस बार मोदी के ख़िलाफ़ कई पार्टियों ने गठजोड़ तैयार किया है.

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इस बार 39 दिनों तक चुनाव
- भारत का यह आम चुनाव 11 अप्रैल से शुरू हुआ है और 19 मई को आख़िरी चरण का मतदान है. 23 मई को वोटों की गिनती है. यह पूरी प्रक्रिया 39 दिनों तक चलेगी.
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- हालांकि इसके बावजूद यह भारत का सबसे लंबा चुनाव नहीं है. भारत का सबसे लंबा चुनाव पहला आम चुनाव था. आज़ाद भारत का पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 को शुरू हुआ था और 21 फ़रवरी 1952 तक चला था. मतलब क़रीब तीन महीने तक चुनाव चला था.

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- यह तस्वीर जनवरी 1952 में कोलकाता में एक मतदान केंद्र पर वोट देने के लिए अपनी बारी इंतजार करते लोगों की है. 1962 से 1989 के बीच चुनाव में चार से 10 दिनों के वक़्त लगे थे. 1980 में चार दिनों के भीतर चुनावी प्रक्रिया पूरी हो गई थी और यह अब तक के सबसे कम समय का चुनाव था.

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- बिहार के औरंगाबाद में दो टिफिन बम और गया में एक केन बम बरामद किया गया. बिहार में लोकसभा की चार सीटों पर मतदान हुआ.

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- आंध्र प्रदेश में जन सेना के एमएलए प्रत्याशी मधुसूदन गुप्ता ने अनंतपुर ज़िले के गूटी मतदान केंद्र पर एक ईवीएम तोड़ दी. पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया..
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भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी
- भारत के चुनाव में अब महिलाएं भी जमकर मतदान कर रही हैं. कई इलाक़ों में तो पुरुषों से ज़्यादा महिलाएं वोट करने आईं. 2014 के आम चुनाव में 65.3% महिलाओं ने मतदान किया था जबकि पुरुषों की भागीदारी 67.1% थी.
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- 2012 से 2018 के बीच कई राज्यों में हुए स्थानीय निकायों और विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी ज़्यादा रही. महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए राजनीतिक पार्टियों ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कई योजनाओं की भी घोषणा की.
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क्या भारत के पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह ग़ाज़ियाबाद से एक बार फिर जीत हासिल करेंगे
- पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हैं. वीके सिंह विदेश राज्य मंत्री हैं. कांग्रेस की डॉली शर्मा और बीएसपी-एसपी-आरएलडी गठबंधन के सुरेश बंसल जनरल सिंह को चुनौती दे रहे हैं.
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन मुश्किल या आसान
- भारत में अगले कुछ हफ़्तों में करोड़ों लोग ईवीएम से मतदान करेंगे. भारत में पहली बार 1982 में इसका इस्तेमाल किया गया था. भारत के कुछ इलाकों में इस मशीन को हेलिकॉप्टर से पहुंचाया जाता है तो कुछ इलाक़ों में ऊंट से.
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- ये मशीनें बैटरी से चलती हैं और देखने में ब्रीफकेस की तरह लगती हैं. इस बार कई इलाक़ों में वोट देने के बाद एक एक प्रिंटेड पर्चा निकलने की भी व्यवस्था की गई है. भारत में जो पार्टियां हारती हैं वो ईवीएम पर दोष मढ़ती हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग ईवीएएम में छेड़छाड़ की बात को ख़ारिज करता रहा है.

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तेलंगाना के निज़ामाबाद में 185 प्रत्याशी
- दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य के निज़ामाबाद लोकसभा क्षेत्र में 185 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. यहां आंदोलकारी किसानों ने अपना असंतोष जताने के लिए बड़ी संख्या में चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है इसलिए इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवार हो गए हैं. मतदाताओं के लिए यहां अपने पसंद के प्रत्याशी को चुनने में थोड़ी दिक़्क़त हो सकती है.
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भारत प्रशासित कश्मीर में शांतिपूर्ण मतदान जारी
- भारत प्रशासित कश्मीर में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच मतदान शांतिपूर्ण रहा. ये तस्वीरें बांदीपुरा की हैं जो बहुत ही संवेदनशील इलाक़ा है. नियंत्रण रेखा के पास हंडवारा में मौजूद बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर ने बताया कि मतदान के दिन स्कूल और दफ़्तर बंद रहे क्योंकि चरमपंथियों ने मतदान का बहिष्कार किया था. हालांकि इसके बावजूद लोग वोट डालने के लिए लाइन में लगे रहे.
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- आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में मतदान करने के बाद कहा कि मतदान देश के नागरिकों का कर्तव्य है इसलिए सबको वोट में हिस्सा लेना चाहिए. नागपुर से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी चुनाव लड़ रहे हैं.
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- अमरावती में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने पूरे परिवार के साथ किया मतदान.
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- उत्तराखंड के हलद्वानी में एक मतदान केंद्र पर लाइन में लगे मतदाता.
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- बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक मतदान केंद्र पर खड़े मतदाताओं की तस्वीर भेजी जहाँ माओवादियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था.

- ओडिशा के कालाहांडी में मौजूद बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि वहाँ एक मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं की लंबी लाइन लगी थी.
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गुरुवार को लोकसभा चुनाव के पहले चरण में देश भर के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 91 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ
इनके साथ-साथ आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भी मत डाले गए. ओडिशा विधानसभा के लिए पहले चरण का मतदान भी गुरुवार से ही शुरू हुआ.
पहले चरण में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, उत्तराखंड, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और तेलंगाना की सभी लोकसभा सीटों पर मतदान किए गए.
वहीं इस चरण में असम, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की भी कुछ लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ.

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पहले चरण में कुछ मौजूदा मुख्यमंत्रियों, कई केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न पार्टियों के कुछ वरिष्ठ नेताओं का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है.
इनमें चौधरी अजित सिंह, जनरल वीके सिंह, जयंत चौधरी, महेश शर्मा समेत कई दिग्गज नेता शामिल हैं.
आंध्र प्रदेश में मतदाता 25 लोकसभा और 175 विधानसभा प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान करेंगे वहीं तेलंगाना में 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. यहां बीते वर्ष दिसंबर में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं.
उत्तराखंड की सभी पांच लोकसभा सीटों, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मेघालय की दो-दो लोकसभा सीटों और छत्तीसगढ़, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ लक्षद्वीप में एक-एक लोकसभा सीट पर 11 अप्रैल को पहले चरण के तहत मतदान होंगे.
पहले चरण में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तराखंड की सियासी रूप से अहम सीटों पर मतदान होंगे.

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उत्तर प्रदेश
पहले चरण में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की 80 में से आठ सीटों पर मतदान हुआ.
यहां तीन केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह (ग़ाज़ियाबाद), सत्यपाल सिंह, (बागपत) और महेश शर्मा (गौतमबुद्धनगर) के साथ-साथ राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष अजीत सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी भी मैदान में हैं.
ग़ाज़ियाबाद से सांसद जनरल वीके सिंह का मुक़ाबला सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के सुरेश बंसल और कांग्रेस की डॉली शर्मा से है.

गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) सीट पर केंद्रीय मंत्री बीजेपी उम्मीदवार महेश शर्मा का सामना कांग्रेस के अरविंद कुमार सिंह और सपा-बसपा-रालोद गठबंधन से बसपा उम्मीदवार सतवीर से हो रहा है.
मुज़फ़्फ़रनगर सीट पर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवार रालोद प्रमुख अजीत सिंह के ख़िलाफ़ पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान मैदान में खड़े हैं.
बागपत के जाट बहुल इलाक़े से केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह के ख़िलाफ़ रालोद नेता अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी सपा-बसपा-रालोद उम्मीदवार हैं.
वहीं सहारनपुर में बीजेपी ने मौजूदा सांसद राघव लखनपाल को उम्मीदवार बनाया है जबकि कांग्रेस ने उनके ख़िलाफ़ इमरान मसूद को खड़ा किया है.

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बिहार
बिहार में औरंगाबाद, गया, नवादा, और जमुई सीटों पर मतदान हो रहे हैं. इस चुनाव में जमुई सीट पर भी सभी की नज़र बनी हुई है.
यहां से लोक जन शक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान के बेटे चिराग़ पासवान मौजूदा सांसद हैं और दोबारा अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं. उनके ख़िलाफ़ महागठबंधन की ओर से भूदेव चौधरी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के उम्मीदवार हैं.
गया सीट पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) प्रमुख जीतन राम मांझी चुनावी मैदान में हैं. मांझी 2014 में इस सीट पर जेडीयू की टिकट से उतरे थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

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नवादा में एनडीए की तरफ़ से एलजेपी के चंदन सिंह और महागठबंधन से आरजेडी की विभा देवी आमने-सामने हैं. विभा देवी बलात्कार के मामले में सज़ा काट रहे विधायक राजबल्लभ यादव की पत्नी हैं.
2014 में इसी सीट से बीजेपी के गिरिराज सिंह जीते थे, इस बार उन्हें बेगूसराय से पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है.
औरंगाबाद सीट से मौजूदा बीजेपी सांसद सुशील कुमार सिंह फिर मैदान में है जबकि महागठबंधन के हम प्रत्याशी उपेंद्र प्रसाद उनके ख़िलाफ़ हैं.

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पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से उत्तर बंगाल की दो सीटों कूच बिहार और अलीपुरद्वार पर पहले चरण में वोट डाले जा रहे हैं. इन सीटों पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की मज़बूत पकड़ है.
कूचबिहार लोकसभा सीट पर 1977 से 2009 तक वाम मोर्चा की सहयोगी ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक का क़ब्ज़ा था और उसने लगातार 10 बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी. लेकिन 2014 में तृणमूल ने यह सीट उससे छीन ली.
2014 में जहां फॉरवर्ड ब्लॉक दूसरे नंबर पर रही थी, वहीं 2016 में सांसद रेणुका सिन्हा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने 28 फ़ीसदी वोटों के साथ दूसरे नंबर पर आकर सबको चौंका दिया था.
तृणमूल ने इस बार वाम मोर्चा सरकार के पूर्व मंत्री और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के पूर्व नेता परेशचंद्र अधिकारी को अपना उम्मीदवार बनाया है ताकि वाम समर्थक मतदाताओं को अपने पक्ष में किया जा सके.
वहीं बीजेपी ने तृणमूल के युवा नेता निशीथ प्रमाणिक को अपना उम्मीदवार बनाया है, उन्हें पार्टी ने पिछले साल निष्कासित किया था.
इस सीट से फॉरवर्ड ब्लॉक ने गोविंद रॉय को खड़ा किया है और कांग्रेस ने पिया रॉय चौधरी को उम्मीदवार बनाया है.
अलीपुरद्वार लोकसभा सीट पर 1977 से 2009 के बीच रिवॉल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने लगातार 10 बार जीत दर्ज कर इसे अपने अभेद्य किले में तब्दील कर दिया था.
लेकिन तृणमूल के दशरथ तिर्की ने उनका यह क़िला भेद दिया. इस बार भी दशरथ तिर्की तृणमूल उम्मीदवार के रूप में फिर से मैदान में हैं.

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तेलंगाना
तेलंगाना में निज़ामाबाद सीट बेहद चर्चा में है. यहां मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता दोबारा चुनाव लड़ रही हैं.
यह मुक़ाबला इस मायने में दिलचस्प है कि यहां फ़सलों की उचित क़ीमत नहीं मिलने जैसी समस्याओं को लेकर 178 किसानों ने आंदोलन किया था. और ये सभी किसान यहां से चुनाव मैदान में हैं.
कविता का मुक़ाबला कांग्रेस की मधु गौड़ और बीजेपी के डी अरविंद से है.
इसके अलावा पहले चरण में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी (नलगोंडा), पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रेणुका चौधरी (खम्मम), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (हैदराबाद) जैसे प्रमुख उम्मीदवार अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं.

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असम
यहां कलियाबोर, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और लखीमपुर लोकसभा सीटों पर पहले चरण में मतदान हो रहा है.
कलियाबोर में कांग्रेस के मौजूदा सांसद गौरव गोगोई और असम गण परिषद (एजीपी) की मोनी माधब महंता के बीच सीधा मुक़ाबला है.
कलियाबोर का पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, उनके भाई दीप गोगोई और अब उनके बेटे गौरव गोगोई प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. बीजेपी के लिए कलियाबोर में जीत के मायने यहां गोगोई वंश के शासन को समाप्त करना होगा.

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तेजपुर सीट पर राज्य के श्रम मंत्री पल्लब लोचन दास बीजेपी उम्मीदवार हैं तो उनका सामना पूर्व नौकरशाह कांग्रेस के एमजीवीके भानु से हो रहा है.
डिब्रूगढ़ में बीजेपी ने मौजूदा सांसद रामेश्वर तेली को उतारा है तो कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता पबन सिंह घाटोवार को. तेली और घाटोवार दोनों ही एक ही समुदाय से आते हैं.
लखीमपुर में कांग्रेस के अनिल बोर्गोहैन बीजेपी के मौजूदा सांसद प्रदान बरुआ को टक्कर दे रहे हैं. राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री बीजेपी के सर्वानंद सोनोवाल ने 2014 में इसी सीट का प्रतिनिधित्व किया था.

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आंध्र प्रदेश
पहले चरण में आंध्र प्रदेश के भी सभी लोकसभा और विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहे हैं. लेकिन यहां विशेष रूप से नांदयाल लोकसभा सीट सबसे अधिक चर्चा में हैं.
यह एक ऐसी लोकसभा सीट है जिससे चुने गए नेता देश के दो सर्वोच्च पदों तक पहुंचने में कामयाब रहे थे.
1977 में नीलम संजीव रेड्डी जनता पार्टी की टिकट पर चुने गए और बाद में राष्ट्रपति बने थे तो 1991 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पीवी नरसिम्हा राव इस सीट से भारी बहुमत से चुनाव जीते थे.
तब कांग्रेस के गंगुला प्रताप रेड्डी ने इस्तीफ़ा देकर नरसिम्हा राव के लिए यह सीट छोड़ी थी.
इस बार यहां से सत्तारूढ़ टीडीपी पार्टी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी मंद्रा शिवनंदा रेड्डी को उतारा है तो वाईएसआर कांग्रेस ने कुछ दिन पहले ही पार्टी में शामिल हुए उद्योगपति पोचा ब्रह्मानंदा रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है.
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