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क्या राहुल गांधी से वायनाड में डर गई है बीजेपी?
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
वायनाड लोकसभा सीट से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मुक़ाबला करने के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने तुषार वेलापल्ली को मैदान में उतारा है.
तुषार भारत धर्म जन सेना यानी बीडीजेएस के नेता हैं.
उन्होंने बीबीसी हिंदी को बताया कि केरल के बाक़ी मतदाताओं की तरह ही वायनाड के मतदाता साम्प्रदायिक नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दों पर वोट करेंगे.
उन्होंने कहा, "हमें मुस्लिमों, ईसाइयों और अन्य समुदायों के भी वोट मिलेंगे. केरल के लोग साम्प्रदायिक मुद्दों पर वोट नहीं करते. वो राजनीतिक मुद्दों वोट करते हैं."
हालांकि उनका रुख़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिल्कुल उलट है जिन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि वो हिंदुओं की कम संख्या की वजह से वायनाड से चुनाव लड़ने जा रहे हैं.
लेकिन तुषार इस पूरे मुद्दे को अलग नज़रिए से दखते हैं, "अब मुद्दा वायनाड और भारत के विकास का है. हर कोई सौ प्रतिशत मान रहा है कि प्रधानमंत्री दोबारा आएंगे. राहुल गांधी विपक्ष के नेता होंगे."
"इसीलिए लोग विपक्ष की बजाय मोदी जी को समर्थन देना चाहते हैं."
पिता-पुत्र के मतभेद
बीडीजेएस पार्टी की स्थापना उनके पिता वेल्लापल्ली नातेसन ने की थी, जो एझावा समुदाय की संस्था श्री नारायना धर्म परिपालना योगम (एसएनडीपी) के ताक़तवर नेता भी हैं.
एसएनडीपी की स्थापना 20वीं सदी में समाज सुधारक श्री नारायन गुरु ने की थी.
50 साल के तुषार इस समय बीडीजेएस के मुखिया हैं, जो केरल में एनडीए के संयोजक भी हैं.
तुषार का मानना है, "सभी लोग मुझे वोट करेंगे क्योंकि केरल के लोगों को पसंद नहीं कि कोई बाहर से आए और यहां से चुनाव लड़े."
लेकिन राहुल गांधी को उनकी ही पार्टी के लोगों ने केरल से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया था, इस पर तुषार कहते हैं, "ऐसा नहीं है, वो पार्टी के अध्यक्ष हैं और उन्होंने वायनाड के लिए ख़ुद ही अपना नाम आगे किया है. ख़ैर वो अमेठी से हार रहे हैं. इसीलिए यहां आए."
तुषार थ्रिसूर सीट से चुनाव लड़ने की दौड़ में थे लेकिन शाह ने उन्हें वायनाड से लड़ने के लिए कहा क्योंकि राहुल गांधी से लड़ने के लिए एनडीए को एक मज़बूत उम्मीदवार की ज़रूरत थी.
हालांकि आतीत में पिता और पुत्र के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आ चुके हैं.
उनके पिता एक बिज़नेसमैन हैं, जो शिक्षण संस्थाएं चलाते हैं और उन्होंने शराब बनाने के काम से अपना बिज़नेस रेलवे कांट्रैक्ट में शिफ़्ट किया है. माना जाता है कि आज के समय सरकार के साथ उनकी क़रीबी है.
पिता वाम पार्टियों के क़रीबी
नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया, "वो विशुद्ध बिज़नेसमैन हैं. अगर कांग्रेस नीत यूडीएफ़ सरकार भी आती है तो अपना काम निकलवा लेते हैं. इसी तरह सीपीएम के नेतृत्व वाली लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट (एलडीएफ़) सरकार के साथ भी उनकी नज़दीकी है."
असल में, जब एलडीएफ़ ने 620 किलोमीटर लंबी महिलाओं की शृंखला बनाई थी, तो नातेसन ने इसमें हिस्सा लिया था. उनका बेटा इन सबसे अलग रहा क्योंकि यह कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के समर्थन में आयोजित था जिसमें स्वामी अयप्पा के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाज़त दी गई थी.
तो क्या पिता उनकी उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे हैं?
तुषार कहते हैं, "वो मेरा समर्थन कर रहे हैं. वो मेरे पिता हैं. सबरीमला कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं था. उन्होंने महिलाओं की शृंखला में इसलिए हिस्सा लिया था क्योंकि सरकार ने उनसे ऐसा करने को कहा था. ओबीसी और अन्य बहुत सारे हिंदुओं ने भी इसमें हिस्सा लिया था."
तुषार अपनी उम्मीदवारी और जीत के प्रति उत्साहित हो सकते हैं, लेकिन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के उनके प्रतिद्वंद्वी उनकी उम्मीदवारी को मज़बूत मानने से इनकार करते हैं.
'बीजेपी डरी हुई है'
सीपीआई के सह सचिव प्रकाश बाबू ने कहा, "केरल में एलडीएफ़ यूडीएफ़ की दुश्मन है और यूडीएफ़ एलडीएफ़ की दुश्मन है. चुनाव तो राजनीतिक मुद्दों पर लड़ा जाता है लेकिन धार्मिक समूहों का भी अपना असर है, जिन्हें हम नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते."
वायनाड सीट सीपीआई को दी गई है और यहां से पार्टी के उम्मीदवार पी पी सुनीर पिछले चुनाव में कांग्रेस के एमआई शानावास से 20,870 वोटों के अंतर से हार गए थे.
एआईसीसी सेक्रेटरी पीसी विशुनाध प्रकाश बाबू और तुषार दोनों की बात से सहमति जताते हैं कि केरल में चुनाव राजनीतिक मुद्दों पर लड़ा जाता है.
वो कहते हैं, "उत्तर भारत यहां बिल्कुल अलग है. यहां लोग इस बात पर नहीं जाते कि समुदाय का नेता उन्हें क्या करने को कहता है, लेकिन बीजेपी डरी हुई है."
विश्नुनाध मानते हैं, "अगर बीजेपी को राहुल गांधी के ख़िलाफ़ चुनाव जीतने का इतना ही भरोसा है तो उसे बीजेपी का कोई उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए था. ध्यान देने वाली बात है कि वो तो यहां से कमल के निशान पर भी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वायनाड में चुनाव कांग्रेस के पक्ष में एकतरफ़ा होने जा रहा है."
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