समझौता एक्सप्रेस मामले में फ़ैसला 14 तक टला

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को समझौता एक्सप्रेस धमाके में फ़ैसला 14 मार्च तक सुरक्षित रख लिया है.

असीमानंद के वकील मनबीर राठी ने बीबीसी पंजाबी के संवाददाता अरविंद छाबड़ा से कहा, ''फ़ैसला आने ही वाला था कि तभी अदालत में एक आवेदन आया कि कोई पाकिस्तानी लड़की इस केस में गवाह के तौर पर आना चाहती है और इस केस के बारे में कुछ बताना चाहती है. इस केस में लड़की के परिवार वाले पीड़ित थे. कोर्ट ने इस आवेदन पर जवाब मांगा है और जवाब के बाद ही फ़ैसला आएगा.''

समझौता एक्सप्रेस साप्ताहिक ट्रेन है जो भारत-पाकिस्तान के बीच चलती है.

यह धमाका 18 फ़रवरी, 2007 को हुआ था और इसमें 68 लोग मारे गए थे. इसमें बड़ी संख्या में पाकिस्तान के भी नागरिक थे.

एनआईए ने 290 चश्मदीदों से पूछताछ की थी. एनआईए ने आरोपपत्र में कहा था कि इस हमले में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया था. यह धमाका पानीपत के दीवानी गांव के पास हुआ था.

हिन्दुवादी संगठन अभिनव भारत के सदस्य असीमानंद पर इस धमाके में शामिल होने का आरोप था. आरोपपत्र में लोकश शर्मा, सुनील जोशी, संदीप डांगे और रामचंद्र कालसांगरा के नाम हैं.

12 साल पहले उस रात यह ट्रेन दिल्ली से पाकिस्तान स्थित लाहौर जा रही थी.

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शुरुआत में इस मामले की जांच हरियाणा पुलिस ने की लेकिन देश के कई दूसरे शहरों में इसी तर्ज़ पर हुए धमाकों के बाद जांच को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दिया गया.

इस ब्लास्ट के सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ पंचकूला की स्पेशल एनआईए कोर्ट में केस चला और इस दौरान 224 गवाहों के बयान दर्ज हुए.

मामले में चार मुख्य अभियुक्त स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी हैं.

कब-कब क्या क्या हुआ?

18 फ़रवरी 2007: भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिनों चलनेवाली समझौता एक्सप्रेस में बम धमाका हुआ जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई. 12 लोग घायल हुए. ट्रेन उस रविवार दिल्ली से लाहौर जा रही थी. मारे जाने वालों में ज़्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे.

धमाके के दो दिनों बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद अहमद कसूरी भारत आने वाले थे. घटना की दोनों मुल्कों में कड़ी निंदा हुई. लेकिन इस कारण कसूरी का भारत दौरा रद्द नहीं हुआ.

भारतीय प्रशासन ने दिल्ली से सात पाकिस्तानी घायलों को ले जाने के लिए पाकिस्तानी वायु सेना के विमान को आने की अनुमति भी दी.

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19 फ़रवरी, 2007: जीआरपी/एसआईटी हरियाणा पुलिस ने मामले को दर्ज किया. एफ़आईआर के मुताबिक़ देश की अखंडता, एकता, संप्रभुता को बिगाड़ने के इरादे से इस ट्रेन में यात्रियों को मारने के इरादे से चरमपंथियों ने ट्रेन संख्या 4001 अप अटारी (समझौता) एक्सप्रेस में पानीपत, हरियाणा के पास दो आईईडी ब्लास्ट किए थे.

एफ़आईआर के मुताबिक़ 23:53 बजे दिल्ली से क़रीब 80 किलोमीटर दूर पानीपत के दीवाना रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन में धमाका हुआ.

इसकी वजह से ट्रेन के दो जनरल कोच में आग लग गई. यात्रियों को दो धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं, जिसके बाद ट्रेन के डिब्बों में आग लग गई.

मृतकों में 16 बच्चे और चार रेलवे कर्मचारी भी शामिल थे. पुलिस को घटनास्थल से दो ऐसे सूटकेस बम भी मिले जो फट नहीं पाए थे.

भारत और पाकिस्तान ने कड़े शब्दों में इस घटना की निंदा की. भारत के केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि इस हमले के बारे में ठोस सुराग़ मिले हैं लेकिन अभी उनके बारे में अधिक जानकारी देना ठीक नहीं होगा.

पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया है और उन्होंने मृतकों की पहचान करने की कोशिश की.

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20 फ़रवरी, 2007: प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने दो संदिग्धों के 'स्केच' जारी किए. ऐसा कहा गया कि ये दोनों ट्रेन में दिल्ली से सवार हुए थे और रास्ते में कहीं उतर गए जिसके बाद धमाका हुआ.

पुलिस ने संदिग्धों के बारे में जानकारी देने वालों को एक लाख रुपए का नक़द इनाम देने की भी घोषणा की थी.

हरियाणा ने इस केस के लिए एक विशेष जांच दल या एसआईटी का गठन किया.

हरियाणा पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से केरोसिन तेल की 14 बोतलें, एक पाइप, एक डिजिटल टाइमर, सूटकेस का कवर और कुछ अन्य सामान बरामद किये गए हैं.

समझौता एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में सुरक्षित बचे यात्रियों को लेकर वाघा सीमा पार करके लाहौर पहुँचीं.

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख़ रशीद अहमद भी स्टेशन पर मौजूद थे. वहां उन्होंने घोषणा की कि मरने वालों के परिजनों को पाँच लाख रुपए का मुआवज़ा दिया जाएगा.

22 फरवरी, 2007: 37 शवों की पहचान हुई, जिसमें 30 पाकिस्तानी नागरिक थे.

असीमानंद

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15 मार्च, 2007: हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ़्तार किया. यह पहली गिरफ्तारी थी. पुलिस इन तक सूटकेस के कवर के सहारे पहुंच पाई थी. ये कवर इंदौर के एक बाज़ार से घटना के चंद दिनों पहले ही ख़रीदी गई थीं.

बाद में इसी तर्ज़ पर हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और मालेगांव में भी धमाके हुए और इन सभी मामलों के तार आपस में जु़ड़े हुए बताए गए. समझौता मामले की जांच में हरियाणा पुलिस और महाराष्ट्र के एटीएस को एक हिंदू कट्टरपंथी संगठन 'अभिनव भारत' के शामिल होने के संकेत मिले थे.

इन धमाकों के सिलसिले में आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार से भी पूछताछ की गई थी.

29 दिसंबर, 2007: मुख्य अभियुक्त सुनील जोशी की मध्य प्रदेश में हत्या.

29 जुलाई, 2010: क़रीब ढाई साल के बाद इस घटना की जांच का ज़िम्मा एनआईए को सौंपा गया.

19नवंबर, 2010: सीबीआई ने हरिद्वार से स्वामी असीमानंद को गिरफ़्तार किया.

30 दिसंबर, 2010: एनआईए ने इस ब्लास्ट का मास्टरमाइंड स्वामी असीमानंद को बताते हुए कहा कि उनके ख़िलाफ़ पक्के सबूत मिले हैं.

11 जनवरी, 2011:एनआईए ने संदीप दांगे और रामचंद्र कलसांगरा पर 10-10 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की.

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26 जून, 2011: एनआईए ने पांच लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की. पहली चार्जशीट में नब कुमार सरकार उर्फ़ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी उर्फ़ मनोज उर्फ़ गुरुजी, रामचंद्र कलसांगरा उर्फ़ रामजी उर्फ़ विष्णु पटेल, संदीप डांगे उर्फ़ टीचर, लोकेश शर्मा उर्फ़ अजय उर्फ़ कालू, कमल चौहान, रमेश वेंकट महालकर उर्फ़ अमित हकला उर्फ़ प्रिंस का नाम था.

एनआईए कहना था कि जिन लोगों ने हमला किया वो देश के विभिन्न मंदिरों पर हुए चरमपंथी हमलों से भड़के हुए थे. इनमें गुजरात के अक्षरमधाम मंदिर (24.09.2002) और जम्मू के रघुनाथ मंदिर में हुए दोहरे धमाके (30 मार्च और 24 नवंबर 2002) और वाराणसी के संकटमोचन मंदिर (07 मार्च 2006) शामिल हैं.

15 दिसंबर 2012: मामले में राजिंदर चौधरी को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ़्तार किया गया. राजिंदर चौधरी पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन में बम रखा था. एनआईए चौधरी के पीछे 2010 से लगी हुई थी.

गिरफ़्तारी के बाद मध्य प्रदेश कोर्ट में पेश कर एनआईए ने उसे ट्रांजिट रिमांड पर लिया. राजिंदर चौधरी के साथ ही कमल चौहान और लोकेश शर्मा का नाम भी 2006 में हुए मालेगांव ब्लास्ट में सामने आया.

यह भी सामने आया कि राजिंदर चौधरी ने इन सभी अभियुक्तों के साथ जनवरी 2006 में मध्य प्रदेश के देवास में बम विस्फ़ोट और पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग ली थी.

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट

अगस्त 2014: समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में अभियुक्त स्वामी असीमानंद को ज़मानत मिल गई. कोर्ट में जांच एजेंसी एनआईए असीमानंद के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई. उन्हें सीबीआई ने 2010 में उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ़्तार किया गया था.

उन पर वर्ष 2006 से 2008 के बीच भारत में कई जगहों पर हुए बम धमाकों को अंजाम देने से संबंधित होने का आरोप था.

असीमानंद के ख़िलाफ़ मुक़दमा उनके इक़बालिया बयान के आधार पर बना था लेकिन बाद में वो ये कहते हुए अपने बयान से मुकर गए कि उन्होंने वो बयान टॉर्चर की वजह से दिया था.

16 अप्रैल 2018: नबकुमार सरकार उर्फ़ स्वामी असीमानंद को एनआईए की विशेष अदालत ने 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में दोष मुक्त क़रार दिया. उन्हें पहले ही 2007 के अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में दोष मुक्त करार दिया जा चुका है. अब असीमानंद केवल 2007 के समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं.

06 मार्च 2019: एनआईए कोर्ट में बहस पूरी. सभी पक्षों की अंतिम दलील के बाद 11 मार्च के लिए फ़ैसला सुरक्षित किया.

संसद

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शिमला समझौते की देन है समझौता एक्सप्रेस

भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत शिमला समझौते के बाद 22 जुलाई 1976 को हुई थी. तब यह ट्रेन अमृतसर और लाहौर के बीच 52 किलोमीटर का सफ़र रोजाना किया करती थी.

पंजाब में 1980 के दशक में फैली अशांति को लेकर सुरक्षा की वजहों से भारतीय रेल ने इस सेवा को अटारी स्टेशन तक सीमित कर दिया, जहां कस्टम और इमिग्रेशन की मंजूरी ली जाती है.

जब यह सेवा शुरू हुई थी तब दोनों देशों के बीच ट्रेनें रोजाना चला करती थीं जिसे 1994 में हफ़्ते में दो बार में तब्दील कर दिया गया.

कई बार बाधित हुई समझौता एक्सप्रेस ट्रेन सेवा

पहली बार इस ट्रेन का परिचालन 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए चरमपंथी हमले के बाद रोका गया.

एक जनवरी 2002 से लेकर 14 जनवरी 2004 तक दोनों देशों के बीच यह ट्रेन नहीं चली.

इसके बाद 27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद एक बार फिर इस ट्रेन का परिचालन रोक दिया गया.

आठ अक्टूबर 2012 को पुलिस दिल्ली आ रही इस ट्रेन से वाघा बॉर्डर पर 100 किलो प्रतिबंधित हेरोइन और 500 राउंड कारतूस बरामद किए.

28 फ़रवरी 2019 को एक बार फिर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए इसे रोक दिया गया था.

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