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क्या पीएम मोदी ने भारत में सबसे ज़्यादा सड़कें बनवाई हैं?
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी रियलिटी चेक
दावा: मौजूदा सरकार का कहना है कि उसने भारत की पिछली सभी सरकारों के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा सड़कें बनवाई हैं.
हक़ीकत: ये सच है कि मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में सड़क निर्माण का काम तेज़ी से बढ़ा है लेकिन ये पिछली सरकारों के मुकाबले तीन गुना ज़्यादा नहीं है.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल, 2018 में कहा था कि उनकी सरकार में जितनी सड़कें बन रही हैं उतनी पहले किसी सरकार में नहीं बनीं.
उन्होंने कहा था, "आज हर रोज़ जिस गति से काम हो रहा है वो पहले हुए कामों से तीन गुना ज़्यादा है.''
भारतीय सड़कों का जाल दुनिया में सबसे विस्तृत है, जो लगभग 55 लाख किलोमीटर क्षेत्र कवर करता है.
भारत में सड़क इंफ़्रास्ट्रक्चर को तीन हिस्सों में बांटा जाता है:
- नेशनल हाइवे
- स्टेट हाइवे
- ग्रामीण सड़कें
साल 1947 में भारत जब आज़ाद हुआ तब यहां नेशनल हाइवे की लंबाई 21,378 किलोमीटर थी. साल 2018 तक ये लंबाई बढ़कर 1,29,709 किलोमीटर तक पहुंच गई.
नेशनल हाइवे के लिए फ़ंड केंद्र सरकार देती है और इसके निर्माण की ज़िम्मेदारी भी केंद्र सरकार की ही होती है. वहीं, राज्यों में बनने वाले हाइवे का ज़िम्मा राज्य सरकारें उठाती हैं और गांवों में सड़कें बनवाने का काम ग्रामीण विकास मंत्रालय देखता है.
निर्माण की गति में तेज़ी
पिछले 10 साल के सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2014 के बाद से यानी, बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से हर साल बनने वाले हाइवे की कुल लंबाई बढ़ी है.
2013-14 में यानी पिछली कांग्रेस सरकार की सत्ता के आख़िरी साल में 4,260 किलोमीटर हाइवे का निर्माण हुआ.
वहीं साल 2017-18 यानी मौजूदा सरकार के आख़िरी साल में 9,829 किलोमीटर हाइवे का निर्माण हुआ.
2013-14 के आंकड़ों से तुलना करें तो ये दोगुने से ज़्यादा है लेकिन तीन गुने से कम है.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने दिसंबर, 2018 की अपनी समीक्षा में कहा था कि साल 2019 के आख़िर तक हाइवे की 300 सरकारी परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी.
इतना ही नहीं, मौजूदा सरकार ने हर वित्तीय वर्ष में नेशनल हाइवे निर्माण के लिए ज़्यादा फंड दिया है.
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सड़कें और हाइवे देश की 'बहुमूल्य संपत्ति' हैं.
गडकरी के प्रयासों की विपक्षी पार्टी की नेता सोनिया गांधी ने संसद में तारीफ़ भी की थी.
गांवों की सड़कों का निर्माण
ग्रामीण इलाकों में सड़कों के विस्तार की योजना साल 2000 में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से शुरू होती है.
पिछले साल मई में मौजूदा बीजेपी सरकार ने कहा कि उन्होंने 2016-17 वित्तीय वर्ष में गांवों में 47,000 किलोमीटर से ज़्यादा सड़कों का निर्माण कराया.
बीजेपी ने कहा, "साल 2016-17 में मोदी सरकार के दरमियान ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का सबसे ज़्यादा निर्माण हुआ."
हालांकि इस दावे के उलट साल 2009-10 के आधिकारिक आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि उस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 60,017 किलोमीटर सड़कें बनीं और ये कांग्रेस के शासन काल में हुआ.
हालांकि, जबसे बीजेपी सत्ता में आई, ग्रामीण इलाकों में सड़कें बनाने के लिए दिया जाने वाला बजट हर वित्तीय वर्ष में बढ़ाया गया. इसका मक़सद था दूर-दराज़ के इलाकों में पहुंच को आसान बनाना.
विश्व बैंक ने दिसंबर, 2018 में जारी की गई अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें बनाने के लिए वो साल 2004 से भारत को वित्तीय मदद देता आ रहा है.
विश्व बैंक ने ये भी कहा कि इस विषय में भारत की प्रगति बेहद प्रभावशाली रही है.
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