ब्लॉग: विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई से मोदी के 'बूथ सबसे मज़बूत' बनेंगे?

मोदी, चुरु

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इमेज कैप्शन, राजस्थान के चुरु में रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी
    • Author, राजेश प्रियदर्शी
    • पदनाम, डिजिटल एडिटर, बीबीसी हिंदी

बीजेपी ने हिंदुत्व, सेना, मोदी और देशभक्ति को एक-दूसरे का पर्यायवाची बनाने में काफ़ी पहले कामयाबी हासिल कर ली थी. साथ ही, जो भी बीजेपी के साथ नहीं है, वह पाकपरस्त, देशद्रोही और आतंकवादियों का समर्थक है, यह अभियान भी मोटे तौर पर कामयाब रहा है.

यही वजह है कि सैनिकों की 'शहादत' हो या उनका 'शौर्य', दोनों ही को बीजेपी अपनी राजनीतिक पूंजी बना चुकी है. यही वजह है कि पुलवामा में मारे गए जवानों की तस्वीर बैकग्राउंड में लगाकर पीएम मोदी चुरू में ऐलान कर सकते हैं कि 'देश सुरक्षित हाथों में है.' अब जबकि विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई की घोषणा हो गई है तो पीएम मोदी के सशक्त नेतृत्व की मिसाल के तौर पर प्रचारित किया जाएगा.

बेरोज़गारी, विकास, एनपीए, राम मंदिर, रफ़ाल विवाद, लखनऊ में प्रियंका गांधी के रोडशो और सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा के बाद से दबाव में दिख रही बीजेपी, पुलवामा हमले के बाद पूरे जोश के साथ सियासी मैदान में लौटी, जबकि विपक्ष सकते में आ गया.

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैच एक बार फिर बीजेपी की पसंदीदा पिच पर आ गया जहाँ उसका पिछले पाँच साल का निवेश अब काम आ रहा है. बीजेपी ने देशभक्ति की भावना के सियासी इस्तेमाल को स्वीकार्य बना लिया है.

आज तो ख़ैर युद्ध जैसा माहौल है, लेकिन जब कोई ठोस मुद्दा नहीं था, कोई तनाव नहीं था, तब यूनिवर्सिटियों में 207 फ़ीट ऊँचे खंभे पर राष्ट्रीय झंडा लहराने का आदेश देना, जेएनयू में टैंक खड़ा करने की बात करना, सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को बार-बार आगे करना, तिरंगा यात्रा निकालना और चुनावी रैलियों में 'भारत माता की जय' और 'जय श्रीराम' के नारे लगवाना 2019 की तैयारी का हिस्सा थे, यह कुछ लोगों को अब समझ में आ रहा है.

राष्ट्रभक्ति की भावना के राजनीतिक दोहन का दाँव बीजेपी ने कुछ इस तरह चला है कि उसके आगे कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां बेबस दिखाई देती हैं. बीजेपी को चुनौती देना राष्ट्रभक्ति को चुनौती देना माना जाए, ऐसा माहौल बना लेना मामूली कामयाबी नहीं है.

मिराज विमान

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इमेज कैप्शन, मिराज विमानों ने लिया अभियान में हिस्सा (फ़ाइल तस्वीर)

कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेजावाला लंबी चुप्पी के बाद तभी बोलने की हिम्मत जुटा पाए जब वे दावा कर सके कि पुलवामा हमले के घंटों बाद तक मोदी जिम कॉर्बेट पार्क में डॉक्युमेंट्री की शूटिंग करते रहे थे.

कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि बीजेपी की किरकिरी हो रही है, लेकिन बालाकोट पर बमबारी के बाद चुरू की जनसभा में सीमा-पार हमले का ज़िक्र किए बग़ैर पीएम मोदी ने जिस तरह इशारों-इशारों में वायु सेना के शौर्य को वोट से जोड़ा, वह गज़ब के सियासी कौशल का नमूना था.

उन्होंने कहा कि "सरकार आपके वोट से मज़बूत हुई है", उन्होंने देशभक्ति से ओत-प्रोत कविता भी सुनाई 'देश नहीं झुकने दूँगा.' दोनों हाथों की मुट्ठियाँ भींचने का निर्देश देने के बाद, हाथ ऊपर उठाकर उन्होंने 'भारत माता की जय' के नारे, चुनावी रैली के शुरू और अंत में लगवाए. अँगेरज़ी में जिसे 'थिएट्रिक्स एंड ऑप्टिक्स' कहते हैं यानी नाटकीयता और अदाकारी से माहौल बनाने के मामले में विपक्ष के पास मोदी का कोई जवाब नहीं है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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कांग्रेस जैसी कथित राष्ट्रवादी पार्टी को देशभक्ति के मैदान में बीजेपी के सामने मानो लकवा मार जाता है. बदनाम स्वीडिश बोफ़ोर्स तोप से करगिल जीतकर वाजपेयी हीरो बन गए, जिस मिराज से सीमा-पार हमला करके मोदी 'बूथ मज़बूत कर रहे हैं', वह भी 1980 के दशक में कांग्रेसी सरकार ने ख़रीदी थी लेकिन कांग्रेस मुँह खोलने की हिम्मत नहीं दिखा पा रही है.

बहरहाल, जब बुधवार को बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने बताया कि पीएम मोदी दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉन्फ़्रेंस करने वाले हैं, वे 'मेरा बूथ सबसे मज़बूत' नाम के कार्यक्रम में पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करने जा रहे हैं, इसके बाद बीजेपी नेतृत्व को काफ़ी आलोचना का सामना करना पड़ा कि जब भारत का पायलट पाकिस्तान के कब्ज़े में है, ऐसे समय मोदी चुनावी कार्यक्रम कर रहे हैं.

मोदी के कार्यक्रम के ख़त्म होने के कुछ ही घंटे के बाद, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई का ऐलान कर दिया, इस तरह विपक्ष के पास अभी कुछ दिन चुप बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिख रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

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गुरूवार को तकरीबन सहमे हुए विपक्षी दलों ने एक बयान जारी किया था कि पीएम मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर वोटों की राजनीति कर रही है, उन्होंने कुछ नया नहीं कहा लेकिन देशभक्ति पर जिस तरह की मोनोपॉली बीजेपी ने जमा ली है, उसमें ऐसा कहने के लिए भी विपक्ष को हिम्मत जुटानी पड़ी.

इस पर बीजेपी का पलटवार बिल्कुल जाना-पहचाना था, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत का विपक्ष जैसी बातें कर रहा है, वह पाकिस्तान को पसंद आएगा. बिहार के विधानसभा चुनाव में जब अमित शाह कह सकते हैं कि 'हम हार गए तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे', अभी तो हालात कुछ और ही हैं. बीजेपी का मानना है कि ऐसे माहौल में इस तरह के आरोप का ज़्यादा कारगर असर होगा.

पूरे चुनाव अभियान का सुर यही होने वाला है कि 'अगर बीजेपी हारी तो यह पाकिस्तान की जीत होगी'.

मोदी ने तमाम आलोचनाओं की परवाह न करते हुए, 'मेरा बूथ सबसे मज़बूत' कार्यक्रम किया, जिसमें उन्होंने कहा कि "भारत में एक नया जोश है, बूथ हमारा किला है, उसे हर हाल में पूरी मेहनत से फ़तह करना है". उन्होंने बीजेपी के चुनावी अभियान को 'राष्ट्र निर्माण का महायज्ञ' घोषित किया है, अब इसकी काट क्या हो, विपक्ष की समझ में फ़िलहाल आता तो नहीं दिख रहा है.

विपक्षी दल

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अब सबसे बड़ा सवाल है कि 2019 के चुनाव नतीजों पर इसका क्या असर होगा, इसका जवाब ये है कि हर रोज़ की घटनाओं के मुताबिक वोटरों का मूड तेज़ी से बदलता है. अब से लेकर चुनाव तक क्या-क्या देखने को मिलेगा, कहा नहीं जा सकता. एक बात पक्के तौर पर कही जा सकती है कि राम मंदिर का मुद्दा घोषित तौर पर चुनावी एजेंडे से हटाने के बाद, देशभक्ति के राजनीतिक उफ़ान की सवारी ही बीजेपी की रणनीति होगी.

बीजेपी के नए नारे- 'नामुमकिन अब मुमकिन है' के अर्थ बहुत गहरे हैं, यानी अभी कई नामुमकिन-सी लगने वाली चीज़ें देखने को मिल सकती हैं.

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