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पाकिस्तान के साथ खेलने की बात पर ट्रोल हुए सचिन तेंदुलकर: प्रेस रिव्यू
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के अनुसार पुलवामा हमले के बाद और भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों के बीच इंटरनेट पर ट्रोलर्स का हालिया निशाना क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर बने हैं.
सचिन ने शुक्रवार को कहा कि वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मैच होना चाहिए ताकि टीम इंडिया पाकिस्तान को हरा सके. उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर बहुत बुरा लगेगा और इंडिया के साथ मैच न खेलने की वजह से पाकिस्तान को 2 पॉइंट्स मिल जाएं.
उन्होंने कहा, "भारत ने वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को हमेशा हराया है. उन्हें एक बार फिर हराने का वक़्त है."
सचिन ने ये भी कहा कि उनके लिए भारत हमेशा सबसे ऊपर है इसलिए देश जो भी तय करेगा वो उसे स्वीकार करेंगे.
सचिन ने अपनी यह राय ट्विटर पर भी पोस्ट की है.
सचिन के इस बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफ़ी ट्रोल किया जा रहा है. ट्विटर पर कई घंटे Sachin टॉप ट्रेंड्स में रहा.
जहां बहुत लोग इस पर सचिन का समर्थन कर रहे हैं, कई हैं जो सचिन के बयान को 'डिप्लोमैटिक' बताकर उनकी आलोचना कर रहे हैं.
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इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरियों पर होने वाले हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है.
पुलवामा हमले के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार कश्मीरियों के साथ हिंसा और दुर्वव्यवहार की ख़बरें आ रही थीं. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जताई है.
चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव वर्मा की बेंच ने उन सभी राज्यों से जवाब मांगा हैं जहां से भी कश्मीरियों के साथ किसी भी तरह की बदसलूकी की ख़बरें आई हैं. इनमें दिल्ली समेत 11 राज्य शामिल हैं.
अदालत ने राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को तत्काल ज़रूरी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.
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'मैं तुझे देख लूंगा...'
अगर झगड़े या कहासुनी के दौरान कोई किसी को कहे कि 'मैं तुझे देख लूंगा/देख लूंगी' तो इसे आपराधिक धमकी नहीं कहा जाएगा. ये कहना है गुजरात हाईकोर्ट का.
दैनिक भास्कर में छपी ख़बर के मुताबिक़ अदालत का कहना है कि धमकी वो होती है जिससे पीड़ित पक्ष के दिमाग़ में किसी तरह का डर पैदा हो. अदालत ने वकील और पुलिस के बीच हुए झगड़े के सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की.
इस झगड़े में एक वकील ने पुलिसवालों को देख लेने की धमकी दी थी. इसके बाद पुलिस की ओर से वकील पर एफ़आई दर्ज करवाई गई थी, जिसे अदालत ने निरस्त कर दिया.
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