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पुलवामा के बाद कश्मीरी छात्रों पर हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
देश के कई हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के ख़िलाफ़ हिंसा और पलायन के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने 10 राज्यों को नोटिस भेजा है.
सुप्रीम कोर्ट में वकील कॉलिन गोन्सालविस ने एक जनहित याचिका दायर की थी, उसकी सुनवाई की शुरूआत करते हुए ये नोटिस जारी किए गए हैं.
याचिका में मांग की गई थी कि अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए क्योंकि सरकार इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही है.
पिछले हफ़्ते पुलवामा में कार बम हमले में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (सीआरपीएफ़) के 40 से अधिक जवानों की मौत के बाद, देश के कई हिस्सों से कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों को पीटे जाने और धमकियां देने की ख़बरें लगातार आ रही हैं.
जिन 10 राज्यों को नोटिस भेजा गया है, उनमें पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, मेघालय, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ शामिल हैं.
देहरादून, पटना, यवतमाल, पुणे और पश्चिम बंगाल के नदिया से ख़बरें मिल रही हैं कि छात्रों और व्यापारियों को हिंसा का सामना करना पड़ा है.
सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों का पालन करते हुए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, उन्होंने कहा कि सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं और एहतियाती कदम उठाए गए हैं.
सरकार का इनकार
देहरादून जहां से बड़ी संख्या में छात्रों ने भागकर पंजाब में शरण ली थी और उनमें से कई छात्र अब कश्मीर वापस चले गए हैं.
लेकिन देहरादून में पुलिस ने कहा था छात्रों के साथ मार-पीट की कोई घटना नहीं हुई है.
राजस्थान के कई शिक्षण संस्थानों ने यह घोषणा की थी कि वे भविष्य में कश्मीरी छात्रों को अपने यहां दाख़िला नहीं देंगे.
इसी तरह मेघायल के राज्यपाल तथागत रॉय ने कश्मीर और कश्मीरियों का बहिष्कार करने की अपील की थी, जिस पर उनकी बहुत आलोचना भी हुई.
दिल्ली में हुई एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "कुछ लोग जो ये कहना चाह रहे हैं कि कश्मीरी छात्र-छात्राओं पर हमले हो रहे हैं, ऐसा नहीं है. ये मैं साफ़ कर दूं कि मैं सभी संस्थानों के संपर्क में हूँ और ऐसी घटनाएं नहीं हुई हैं."
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर कश्मीर के स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा हो रही है.
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