पाकिस्तान को जाने वाली अपनी नदियों का पानी रोकेगा भारत

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भारत ने पाकिस्तान को जाने वाली अपनी तीन नदियों के पानी को रोकने का बड़ा फ़ैसला किया है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दफ्तर ने बीबीसी को बताया कि ये दीर्घकालिक योजना है और इसका सिंधु नदी संधि से कोई लेना-देना नहीं है.
कुछ मीडिया खबरों में ये कहा जा रहा है कि भारत ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को जाने वाली तीन नदियों का पानी रोकने का फ़ैसला किया है. लेकिन गडकरी के दफ्तर ने ये स्पष्ट किया कि इस फ़ैसले का पुलवामा हमले से कोई संबंध नहीं है.
साथ ही ये भी बताया कि सिंधु नदी संधि अपनी जगह कायम रहेगी.
गडकरी के दफ्तर ने कहा, "रावी, सतलज और ब्यास नदियों का पानी डैम बनाकर रोका जाएगा. शाहपुर-कांडी डैम बनाने का काम पुलवामा हमले के पहले से ही हो रहा है. अब कैबिनेट अन्य दो डैम बनाने पर फ़ैसला लेगी."

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इससे पहले, गुरुवार को एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, "भारत और पाकिस्तान (बंटवारे) होने के बाद तीन नदियां पाकिस्तान को मिली थीं और तीन नदियां भारत को. हमारी तीन नदियों के अधिकार का पानी पाकिस्तान को जा रहा था. अब हम उस पर तीन परियोजनाएं शुरू करके यह पानी वापस यमुना में ला रहे हैं."
सिंधु जल संधि के तहत भारत अपनी नदियों का पानी पाकिस्तान के साथ साझा करता है.
क्या है सिंधु जल संधि

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• 1960 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान ने सिंधु जल संधि की थी. इस संधि के मुताबिक़ सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में बांटा गया था.
• समझौते में सिंधु, झेलम और चेनाब का पानी पाकिस्तान को दिया गया और रावी, ब्यास, सतलज का पानी भारत को दिया गया.
• इसमें ये भी था कि भारत अपनी वाली नदियों के पानी का, कुछ अपवादों को छोड़कर, बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है. वहीं पाकिस्तान वाली नदियों के पानी के इस्तेमाल का कुछ सीमित अधिकार भारत को भी दिया गया था. जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी.
• पाकिस्तान भारत की बिजली से पैदा की जाने वाली बिजली की बड़ी परियोजनाओं पर आपत्ति उठाता रहा है.

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• वहीं भारत के कश्मीर में वहां के जल संसाधनों का राज्य को लाभ नहीं मिलने की बात कही जाती रही है. जब बीजेपी के समर्थन से महबूबा मुफ़्ती जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री थीं तो उन्होंने कहा था कि सिंधु जल संधि से राज्य को 20 हज़ार करोड़ का नुकसान हो रहा है और केंद्र उसकी भरपाई के लिए क़दम उठाए.
• पाकिस्तान के पंजाब और सिंध इलाके को कृषि के लिए यहीं से पानी मिलता है. पाकिस्तान के ज़्यादातर इलाके के लिए सिंचाई का यही ज़रिया है. पाकिस्तान की इंडस्ट्री और शहरों की बिजली के लिए भी ये समझौता बहुत मायने रखता है.
• समझौते के मुताबिक कोई भी एकतरफ़ा तौर पर इस संधि को नहीं तोड़ सकता है या बदल सकता है.
• लेकिन जानकार कहते हैं कि भारत वियना समझौते के लॉ ऑफ़ ट्रीटीज़ की के अंतर्गत यह कह कर पीछे हट सकता है कि पाकिस्तान चरमपंथी गुटों का उसके ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रहा है.
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• अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भी कहा है कि अगर मूल स्थितियों में परिवर्तन हो तो किसी संधि को रद्द किया जा सकता है. लेकिन ये सब कहने जितना आसान नहीं.
• बंटवारे के बाद सिंधु घाटी से गुजरने वाली नदियों पर हुए विवाद की मध्यस्थता वर्ल्ड बैंक ने की थी. लिहाजा यदि भारत यह समझौता तोड़ता है तो पाकिस्तान सबसे पहले विश्व बैंक के पास जाएगा. और विश्व बैंक भारत पर ऐसा नहीं करने के लिए दबाव बना सकता है.
• हालांकि, सिंधु नदी तिब्बत से शुरू होती है लेकिन चीन को इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है लेकिन अगर चीन नदी को रोक दे या बहाव को बदल दे तो दोनों देशों के लिए नुकसानदायक होगा.
राष्ट्रीय परियोजना के तहत होगा निर्माण
सभा को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि इन नदियों पर होने वाला निर्माण राष्ट्रीय परियोजनाओं के तहत होगा.
अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने यह तय किया है कि वो (भारत) पाकिस्तान के साथ नदियों के पानी को अब साझा नहीं करेगा. हम पूर्वी नदियों के प्रवाह को कश्मीर और पंजाब के लिए मोड़ेंगे."
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ट्वीट के माध्यम से उन्होंने जानकारी दी कि शाहपुर में बांध के निर्माण का काम शुरू भी हो चुका है.
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नितिन गडकरी के इन ट्वीट्स पर ज़्यादातर लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
कमलेश कुमार प्रतिहार ने इस काम की सराहना की है. वो लिखते हैं
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संकेत केशरवानी लिखते हैं कि ये एक बड़ा फ़ैसला है.
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नितिन गडकरी के ट्वीट पर ज़्यादातर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं ही आई हैं लेकिन कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए हैं.
एक ट्विटर यूज़र ने पूछा है कि तो हम ये पानी रुकते कब देख सकते हैं.
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