पुलवामा CRPF हमलाः 'शबाना-जावेद ने पाकिस्तान का दौरा रद्द किया'

शबाना आज़मी, पुलवामा हमला

इमेज स्रोत, Getty Images

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ़ जवानों के क़ाफ़िले पर हमले के बाद आम लोगों से लेकर ख़ास लोगों तक की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

मारे गए जवानों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लोग पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भी ग़ुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं.

इसी कड़ी में प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आज़मी ने भी ट्वीट किया है और कहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी सांस्कृतिक आदान-प्रदान को स्थगित करने की ज़रूरत है.

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उन्होंने लगातार कई ट्वीट किए. पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, "मैं पुलवामा में कायराना हमले के कारण बेहद ग़म और शोक से भरी हुई हूं. इतने वर्षों में पहली बार मेरा यह विश्वास कमज़ोर हुआ है कि दोनों ओर के लोगों के जुड़ने से सत्ता पर सही काम करने का दबाव पड़ता है. हमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान को रोकने की आवश्यकता है."

इसके बाद किए गए ट्वीट में लिखा है कि इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बरक़रार रखने का कोई रास्ता नहीं है, वह भी उस समय जब हमारे जवान शहीद हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि वह दुखी परिवारों के साथ एकजुटता के साथ खड़ी हैं.

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हालांकि, अपने अगले ट्वीट में शबाना ने कहा कि इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तानी सत्ता और वहां के लोगों में बेहद फ़र्क़ है.

उन्होंने लिखा, "दोनों सीमा की ओर के बहन और भाई उन परिस्थितियों के कारण विभाजित हैं जिसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है. इसको पिछले ट्वीट्स की निरंतरता में पढ़ा जाए."

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शबाना आज़मी के अलावा उनके पति जावेद अख़्तर ने भी ट्वीट करके अपना दुख जताया है. साथ ही उन्होंने बताया है कि उन्होंने और शबाना ने कराची आर्ट काउंसिल का कार्यक्रम रद्द कर दिया है.

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उन्होंने लिखा, "कराची आर्ट काउंसिल ने हमें आमंत्रित किया था. शबाना और मैं कैफ़ी आज़मी और उनकी शायरी पर दो दिवसीय साहित्यिक चर्चा के लिए जाने वाले थे. हमने इसे रद्द कर दिया है. 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान कैफ़ी साहब ने 'और फिर कृष्ण ने अर्जुन से कहा' नज़्म लिखी थी."

साथ ही गुरुवार को जावेद अख़्तर ने पहला ट्वीट करते हुए लिखा था कि उनका सीआरपीएफ़ के साथ गहरा नाता है क्योंकि उन्होंने उनके लिए गीत लिखा है.

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उन्होंने लिखा, "मेरा सीआरपीएफ़ के साथ ख़ास रिश्ता है. उनके लिए मैंने गीत लिखा है लेकिन काग़ज़ पर क़लम चलाने से पहले मैंने कई सीआरपीएफ़ अफ़सरों से मुलाक़ात की थी. इन बहादुरों से मैंने प्रेम और सम्मान सीखा. आज मैं शहीदों के प्रियजनों के साथ दुख को साझा कर रहा हूं."

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