पुलवामा CRPF हमला: जम्मू में हिंसा के बाद कर्फ़्यू, पुराने शहर में सेना तैनात

जम्मू

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    • Author, रियाज़ मसरूर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को सीआरपीएफ़ के एक क़ाफ़िले पर हुए हमले में मरने वाले जवानों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है. हमला आत्मघाती कार बम से किया गया था.

गुरूवार को हुए हमले के बाद आज जम्मू के कई इलाक़ों में हिंसक प्रदर्शन हुए. हिंसा को देखते हुए जम्मू के कई इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है. पुराने जम्मू में हिंसा के बाद सेना को बुलाया गया है.

जम्मू स्थित पत्रकार मोहित कंधारी से बातचीत करते हुए जम्मू के डिविज़नल कमिश्नर संजीव वर्मा ने कहा, ''हालात पर नियंत्रण रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारी तैनात हैं. जम्मू शहर और कुछ बाहरी इलाक़ों में झड़पों की वजह से कर्फ़्यू लगा दिया गया है.''

जम्मू-कश्मीर, हिंसा, प्रदर्शन

अधिकारियों और चश्मदीदों ने बताया कि शुक्रवार को मुस्लिम इलाक़ों में पार्क की गई कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया.

राजनाथ सिंह के दिया मारे गए जवानों को कंधा

गृह मंत्री राजनाथ सिंह सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे. गृह मंत्री देश के फॉरेंसिक विशेषज्ञों और संघीय जांच एजेंसियों के अधिकारियों से मुलाक़ात भी करेंगे. कहा जा रहा है कि इस हमले की जांच में सरकार कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है. संभव है कि राजनाथ सिंह मारे गए जवानों की आधिकारिक संख्या बताएं.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मारे गए जवानों के शव को कंधा देते हुए तस्वीरें ट्वीट की हैं. उन्होंने लिखा, ''ये देश हमारे वीर सीआरपीएफ़ जवानों की ये शहादत कभी नहीं भूलेगा. पुलवामा में शहीद जवानों को मैंने श्रद्धांजलि सौंपी. उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी.''

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सरकार ने सुरक्षा बलों के लिए निर्देश जारी किया है कि वो क़ाफ़िला अलग-थलग रूट से नहीं ले जाएं. दक्षिण कश्मीर में इंटरनेट बंद कर दिया गया है और श्रीनगर में स्पीड कम कर दी गई है.

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अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और यासीन मलिक ने जवानों के मारे जाने पर खेद जताया है.

कश्मीर के अलगाववादियों के समूह जॉइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप यानी जेआरएल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है, ''हम अपने युवाओं के ताबूत हर दिन कंधे पर उठाते हैं. ऐसे में हम उन परिवारों का दर्द समझ सकते हैं जिनके लोग मारे गए हैं.''

जेआरएल ने ये भी कहा है कि हिंसा और प्रतिहिंसा रुकने के बाद ही कश्मीर विवाद का समाधान संभव हो सकता है. इस हमले की ज़िम्मेदारी चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है.

कहा जा रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद के 19 साल के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने इसे अंजाम दिया है.

कथित रूप से आदिल का एक वीडियो भी आया है जिसमें वो आत्मघाती हमलावर बनने की बात को स्वीकार कर रहा है. आदिल के दो भाई और माता-पिता हैं.

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आदिल की अंत्येष्टि में उसके गांव के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. आदिल कां गांव पुलवामा में काकापोरा के गुंडी बाग़ में है. जहां हमला हुआ है उससे 20 किलोमीटर की दूरी पर यह गांव स्थित है.

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जम्मू स्थित पत्रकार मोहित कंधारी के अनुसार जम्मू के कई इलाक़ों में इस हमले के ख़िलाफ़ हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. जम्मू के कई इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है. पुराने जम्मू के इलाक़ों में हिंसा के बाद सेना को बुलाया गया है.

बीबीसी से बातचीत करते हुए जम्मू के डिविज़नल कमिश्नर संजीव वर्मा ने कहा, ''हालात पर नियंत्रण रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारी तैनात हैं. जम्मू शहर और कुछ बाहरी इलाक़ों में झड़पों की वजह से कर्फ़्यू लगा दिया गया है.''

अधिकारियों और चश्मदीदों ने बताया कि शुक्रवार को मुस्लिम इलाक़ों में पार्क की गई कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया.

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