नरेंद्र मोदी, अनिल अंबानी के मिडलमैनः राहुल

रफ़ाल मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अनिल अंबानी का मिडलमैन होने का आरोप लगाया.

उन्होंने एक ईमेल के हवाले से कहा कि रफ़ाल के लिए डील होने से पहले उद्योगपति अनिल अंबानी फ्रांस गए थे और कंपनी के अधिकारियों से डील की बात कही थी.

राहुल गांधी ने कहा कि फ्रांस में हुई मीटिंग में अनिल अंबानी ने डासो कंपनी से साफ बोला कि एक एमओयू पर हस्ताक्षर होगा जिसमें हमारा नाम होगा.

राहुल ने सवाल उठाया कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को ये बातें नहीं मालूम थी, पर अनिल अंबानी को मालूम थी.

"नरेंद्र मोदी, अनिल अंबानी के मिडिल मैन के रूप में काम कर रहे हैं. उन पर गोपनीयता कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए."

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ईमेल का हवाला देते हुए दावा किया कि यह डासो के एक अधिकारी ने लिखा है, जिसमें स्पष्ट रूप से इस बात का जिक्र किया गया है अनिल अंबानी ने फ्रांस के रक्षा मंत्री से मुलाक़ात की थी.

"रफ़ाल डील होने से दस दिन पहले अनिल अंबानी ने फ्रांस के रक्षा मंत्री से कहा था कि यह डील उन्हें मिलने वाला है."

"अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के लोगों को यह समझाना चाहिए कि यह क्यों और कैसे हुआ?"

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में और क्या-क्या कहाः

  • राहुल गांधी ने कहा कि फ्रांस में अनिल अंबानी ने वहां के रक्षा मंत्री से साफ बोला कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस आएंगे तो एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया जाएगा, जिसमें उनका नाम होगा.
  • हिंदुस्तान के रक्षा मंत्री को ये बाते नहीं मालूम थीं. मनोहर पर्रिकर कहते हैं कि उन्हें ये बातें नहीं मालूम थीं. विदेश सचिव को भी नहीं मालूम थी. उनका कहना था कि फ्रांस की कंपनी, मंत्रालय और सरकारी कंपनी एचएएल के बीच बातचीत चल रही है.
  • एचएएल को भी यह जानकारी नहीं थी लेकिन अनिल अंबानी को डील होने के दस दिन पहले मालूम था कि डील होने वाली है.
  • मतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अनिल अंबानी के मिडिलमैन का काम कर रहे हैं.
  • अब प्रधानमंत्री को यह बताना चाहिए कि अनिल अंबानी को इस डील के बारे में दस दिन पहले कैसे पता लगा? उन्हें यह बात किसने बताई, जबकि रक्षा मंत्रालय को यह बात पता नहीं थी.
  • इससे एक नई चीज निकलती है कि यह बात रक्षा मंत्रालय को पता नहीं थी, लेकिन नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी इस बात को जानते थे तो प्रधानमंत्री ने गोपनीयता के कानून का उल्लंघन किया है और उन पर क्रिमिनल कार्रवाई शुरू हो जानी चाहिए.
  • यह कार्रवाई तो कानून के उल्लंघन के आधार पर ही हो जानी चाहिए, भ्रष्टाचार का मामला तो दूसरा है.

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