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बीबीसी से भारत पर बोलने वाली लड़की कौशल्या का निलंबन
तमिलनाडु में सामाजिक कार्यकर्ता कौशल्या को कथित रूप से भारत की संप्रभुता के ख़िलाफ़ बयान देने के आरोप में नौकरी से निलंबित कर दिया गया है.
वैलिंगटन कैंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरीश वर्मा ने बीबीसी से कौशल्या के निलंबन की पुष्टि की है. कौशल्या कैंटोन्मेंट दफ़्तर में जूनियर असिस्टेंट पद पर थीं.
कौशल्या ने बीबीसी तमिल सेवा के "हम भारत के लोग" कार्यक्रम में देश और समाज को लेकर अपनी राय व्यक्त की थी. इसके बाद उनके बयान पर विवाद खड़ा हो गया.
कौशल्या पर भारत का अनादर करने का आरोप लगाया गया है.
'हम भारत के लोग' नाम से एक सिरीज़ बीबीसी ने 26 जनवरी से शुरू की है. हम इस सिरीज़ में भारत के लोगों से ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वो इस देश को किस रूप में देखते हैं. इसी सिरीज़ के तहत ही कौशल्या ने भारत के बारे में अपनी राय रखी थी.
इस सिरीज़ के कार्यक्रम हर रोज़ बीबीसी की छह भारतीय भाषाओं में प्रसारित किए जा रहे हैं.
आख़िर क्या है विवाद?
कौशल्या ने बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में एक भारतीय नागरिक के रूप में अपने अनुभव को ज़ाहिर किया था.
कौशल्या ने कहा था, "आंबेडकर ने भारत को एक संघ के रूप में देखा था और संविधान में भारत को राज्यों का संघ बताया गया है. भारत में कोई राष्ट्रभाषा नहीं है. यहां सांस्कृतिक आधार पर भी लोग आपस में बंटे हुए हैं. ऐसे में मैं ये सवाल आपके ऊपर छोड़ती हूं कि आप इसे एक देश के रूप में कैसे देखते हैं."
"तमिलनाडु के साथ भारत सरकार किसी दास की तरह व्यवहार करती है. स्टरलाइट जैसी परियोजनाओं को इस राज्य पर थोपा गया है. लोगों ने इसका विरोध किया था. यहां तक कि किसानों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी गुहार नहीं सुनी."
नौकरी से निलंबन कितना सही?
कौशल्या के निलंबन पर तमिलनाडु से प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं.
इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज के चंद्रू ने बताया, ''सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को मीडिया से बात करने, किताब लिखने और कहीं लेख लिखने से पहले अपने विभाग से इजाज़त लेनी होगी. सरकारी कर्मचारियों को राज्य या नौकरी के ख़िलाफ़ नहीं बोलना चाहिए. कौशल्या वाले मामले में इस नियम का उल्लंघन हुआ है.''
के चंद्रू बताते हैं, 1983 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी में आने से पहले कुछ भी राय रख सकता है. लेकिन नौकरी में आने के बाद आपकी राय मायने रखती है. हालांकि आपके पहले के विचार क्या रहे हैं, इस बात से नौकरी दिए जाने के फैसले पर फर्क नहीं पड़ना चाहिए. एक सरकारी कर्मचारी को अपनी नौकरी के प्रति निष्ठावान और समर्पित रहना चाहिए.''
हालांकि कुछ तबकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकार ने कौशल्या के ख़िलाफ़ कार्रवाई में ज़्यादा सख़्ती दिखाई. कहा जा रहा है कि कौशल्या के ख़िलाफ़ इस मामले में नौकरी से निलंबित करने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सकता था.
महिला अधिकारों को लेकर मुखर रहने वालीं कविता कृष्णन मानती हैं कि कौशल्या ने जो कुछ भी कहा है वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से अलग नहीं है. वो कहती हैं कि स्टेट की आलोचना करने का हक़ सबको है.
कविता कहती हैं, ''कौशल्या ने ऑनर किलिंग के ख़िलाफ़ जिस तरह से लड़ाई लड़ी है वो हिम्मत सबमें नहीं होती. ऐसी बहादुर महिला के ख़िलाफ़ कार्रवाई दिखाता है कि इस सरकार रवैया कितना अलोकतांत्रिक है.''
मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रोफ़ेसर ए मार्क्स ने कहा कि हर किसी का अपना नज़रिया है और उन्हें अपनी बात रखने से नहीं रोका जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तो सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक पार्टियों के सदस्य बनने तक की इजाज़त रही है.
कौन हैं कौशल्या?
कौशल्या तमिलनाडु में जाति व्यवस्था के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता हैं.
कौशल्या को कुछ साल पहले अपने से कथित छोटी जाति के लड़के के साथ शादी करने की वजह से ऑनर किलिंग का सामना करना पड़ा था.
इस जानलेवा हमले में उनके पति शंकर की मौत हो गई थी.
इसके बाद कौशल्या ने अपने घरवालों के ख़िलाफ़ कानून का सहारा लेकर एक लंबी लड़ाई लड़ी और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया.
कौशल्या ने एक बार फिर शादी की है लेकिन उन्हें फिर से अपने समुदाय की ओर से ही जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.
अलग जाति से हैं कौशल्या के दूसरे पति
कौशल्या के दूसरे पति भी एक अलग जाति से आते हैं.
21 साल की कौशल्या ने इस बारे में बीबीसी को बताया था, "कई लोग हमें बधाई संदेश भेज रहे हैं लेकिन हमें अनजान लोगों से धमकियां भी मिल रही हैं. हमारे घरवाले और दोस्त काफ़ी चिंतित हैं. आमतौर पर सोशल मीडिया पर जो भी लिखा जा रहा है, हम उसे नज़रअंदाज करते हैं. लेकिन कुछ लोग हमें फोन करके चेतावनी दे रहे हैं. कुछ लोग विदेशों से भी फोन करके हमें गालियां दे रहे हैं."
कौशल्या ने जब से एक दलित युवक से शादी की है तब से उन्हें उनकी जाति के ही लोगों से ही जाति को शर्मसार करने के लिए धमकियां मिलना शुरू हुई थीं.
इसके बाद कौशल्या के पास पुलिस से सुरक्षा लेने के सिवा कोई चारा नहीं था.
बीते दो सालों से उनके साथ निशस्त्र महिला कॉन्स्टेबल थीं.
कौशल्या कहती हैं कि जब से उन्होंने दूसरी शादी की है तब से ये कॉन्स्टेबल भी उनके साथ नहीं हैं. इस दंपति के मुताबिक़, उन पर हर तरफ से दबाव डाला जा रहा है.
हालांकि, पुलिस इस बात से इनकार करती है कि सुरक्षा हटाई गई है.
बदलाव के बारे में कौशल्या की राय
कौशल्या ने दिसंबर 2018 में बीबीसी को बताया था कि वे अंतरजातीय विवाह करने वालों को सुरक्षा दिए जाने के लिए एक क़ानून लाने का अभियान चला रही हैं और ये धमकियां उन्हें उनके अभियान से पीछे नहीं हटाएंगी.
उन्होंने कहा था, "कई लोग मुझे बता रहे हैं कि मेरे भाषण को सुनने के बाद अंतर-जातीय विवाह को लेकर उनके रुख में बदलाव आया है."
उन्होंने कहा था कि वो अपने आपको बदलाव की बयार के रूप में देखती हैं.
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