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नरेंद्र मोदी ने मेरी 34 चिट्ठियों का जवाब तक नहीं दियाः अन्ना हज़ारे
- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
समाज सेवी अन्ना हजारे एक बार फिर अपनी मांगों के साथ अनशन करने वाले हैं.
30 जनवरी को सुबह 10 बजे से वे महाराष्ट्र के अपने निवास गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठेंगे.
बीबीसी हिंदी से बात करते हुए उन्होंने अपने अनशन की मांगों को बारे में विस्तार से बात की और बताया कि सत्ता में आने के बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी एक भी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया.
'लोकायुक्त होता तो रफ़ाल का मुद्दा पैदा ही ना होता'
अपने मुद्दों के बारे में विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा, ''लोकपाल की नियुक्ति अहम मुद्दा है, पांच साल हो गए इस सरकार को सत्ता में आए हुए लेकिन ये नरेंद्र मोदी सरकार जनता को लोकपाल पर गुमराह करती रही. बहाने बना कर पांच साल से लोकपाल की नियुक्ति टाल दी गई है.
स्वामीनाथन के समर्थन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, ''मेरा दूसरा मुद्दा किसानों से जुड़ा है. जो स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट है उसका ये सरकार पालन नहीं करती. इन लोगों ने देश के किसानों से वादा किया था कि जब हम सत्ता में आएंगे तो स्वामीनाथन रिपोर्ट का पालन करेंगे. आज किसान आत्महत्या कर रहे हैं वो इतनी बुरी तरह फंसे हुए हैं. मैं मानता हूं कि किसानों का कर्ज़ माफ़ कर देने से सबकुछ ठीक नहीं हो जाएगा लेकिन, अगर सरकार एक बार स्वामीनाथन आयोग के सुझावों का पालन करे और किसानों का कर्ज़ माफ़ कर दे तो किसान फिर सरकार के पास नहीं जाएंगे.
आपको क्या लगता है लोकपाल की नियुक्ति आखिर क्यों सरकार नहीं कर पा रही है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ''लोकायुक्त आएगा और अगर जनता प्रधानमंत्री या उनके कैबिनेट के किसी नेता के ख़िलाफ़ सबूत पेश करती है तो लोकायुक्त प्रधानमंत्री और मंत्रियों के खिलाफ़ जांच कर सकता है. ये कानून कड़ा है जिसके कारण सरकार नहीं चाहती कि लोकायुक्त इस सिस्टम में आए.''
'इन दिनों से देश में रफ़ाल का मुद्दा चल रहा है, अगर लोकायुक्त होता तो ऐसे घोटाले होते ही नहीं.''
मौजूदा सरकार में भी क्या भ्रष्टाचार है? इस पर अन्ना कहते हैं, '' अभी भ्रष्टाचार कम कहां हुआ है. मैं घुमते रहता हूं. हर राज्य में सामान्य लोग यही कहते हैं कि पैसे दिए बिना काम नहीं होता है. तो आख़िर बदला क्या है. जब पैसे दिए बग़ैर गरीबों काम नहीं हो सकता तो भ्रष्टाचार ख़त्म कहां हुआ. ' '
''मेरे शरीर में जब तक जान हैं तब तक मेरा आंदोलन जारी रहेगा.''
मैंने नरेंद्र मोदी जी को लगभग 34 बार चिट्ठी लिखी है, लेकिन वो मेरी चिट्ठियों का जवाब नहीं देते. साल 2011 में जब वो सरकार में नहीं थे और मैंने आंदोलन किया था तो यही नरेंद्र मोदी कहा करते थे एक अन्ना हजारे हैं जो लोकपाल के लिए जान की बाजी लगा रहे हैं और अब मेरी चिट्ठियों का जवाब तक नहीं देते.
साल 2011 का आंदोलन
2011-12 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में दिल्ली के रामलीला मैदान में तत्कालीन यूपीए सरकार के 'भ्रष्टाचार' के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था. इस आंदोलन में किरन बेदी, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास, प्रशांत भूषण जैसे कई नामी लोग उनके समर्थन में खड़े थे. आज इनमें से ज़्यादातर लोग राजनीति पार्टियों का हिस्सा बन चुके हैं.