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कौन हैं श्री शिवकुमार स्वामी जी जिनके निधन पर है तीन दिन का शोक
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
श्री श्री श्री डॉक्टर शिवकुमारा स्वामीजी, जिन्होंने 111 साल की उम्र में सोमवार को अंतिम सांस ली, उन्हें कर्नाटक में "वॉकिंग गॉड" या "चलता-फिरता भगवान" के नाम से जाने जाते थे.
वे पिछले आठ से भी ज़्यादा दशक से सिद्धगंगा मठ के प्रमुख थे, जो बेंगलुरू से 70 किलोमीटर दूर टुमकूर में लिंगायत समुदाय की सबसे शक्तिशाली धार्मिक संस्थाओं में गिना जाता है.
कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त चीफ़ सेक्रेटरी डॉक्टर एसएम जामदार ने कहा, "लिंगायत स्वामियों में, या कहें कि भारत के आध्यात्मिक गुरूओं में, उनकी शख़्सियत दुर्लभों में भी दुर्लभतम थी. वे कई स्वामियों के आदर्श थे."
बाक़ी धार्मिक गुरूओं से अलग
धार्मिक विषयों के जानकार, वचन स्टडीज़ के पूर्व निदेशक रमज़ान दर्गा कहते है, "88 सालों से उन्होंने हर जाति और हर समुदाय के अनाथों और बच्चों की सेवा की. कोई भी उनके आवासीय स्कूलों में जा सकता था, पढ़ सकता था. वो जो करते थे, वो बड़ा सीधा था - कि लोगों की सेवा करना भगवान की सेवा करने जैसा है."
चित्रदुर्गा स्थित मुर्गाराजेंद्र मठ के डॉक्टर शिवमूर्ति मुरूगा शरनु स्वामीजी ने कहा, "उनके मन में कभी भी जाति को लेकर कोई दुर्भावना नहीं रही. उन्होंने सबके लिए खाने का इंतज़ाम किया, ख़ास तौर से बच्चों के लिए, और उन्हें ज्ञान अर्जित करने और समाज को लेकर जागरुक होने के लिए प्रोत्साहित किया."
दर्गा कहते हैं, "केवल अलग जातियों से ही नहीं, अलग धर्मों से भी, जैसे मुसलमानों के बच्चों ने भी उनके आवासीय स्कूलों में पढ़ाई की."
डॉक्टर जामदार और दर्गा ने कहा कि स्वामीजी ने "केवल बासव की विचारधारा के अनुरूप जीवन जिया."
रमज़ान दर्गा ने कहा, "बासव विचारधारा ने सभी जाति और नस्ल की व्यवस्था को नकार दिया. वो वैदिक व्यवस्था के ठीक उलट है जो जाति व्यवस्था को मानती है. बासव समानतावादी थे. और स्वामीजी ने बासव की सोच वाले समाज को बनाने के लिए काम किया."
डॉक्टर जामदार कहते हैं, "आठ दशकों तक उन्होंने बच्चों को मुफ़्त भोजन और मुफ़्त शिक्षा दी. उनके संस्थानों में तीन हज़ार छात्र पढ़ा करते थे. आज वहाँ आठ से नौ हज़ार छात्र पढ़ते हैं. उनके छात्र पूरी दुनिया में फैले हैं. एक अनुमान है कि उनके संस्थान से लगभग 10 लाख छात्रों ने पढ़ाई की है. "
डॉक्टर शिवमूर्ति ने बताया, "उन्होंने सैकड़ों शिक्षण संस्थान बनवाए. उन्होंने इतनी लंबी उम्र अपने खान-पान और जीवन शैली में अनुशासन की वजह से पाई. "
थिएटर कलाकार सुषमा राव ने स्वामीजी को याद करते हुए एक फ़ेसबुक पोस्ट लिखी है. अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है, ''मैं उस समय करीब 13 साल की थी. हम लोग स्कूल की तरफ से शिवगंगा घूमने गए थे. वहां से लौटते हुए हम सभी सिद्दगंगा मठ पर दोपहर के खाने के लिए रुके. खाने से पहले हम कुछ लड़कियों को अलग बैठने के लिए बोल दिया गया. कुछ देर में भगवा चोला ओढ़े एक बूढ़े साधू बाबा अपने अनुयायियों के साथ वहां से गुज़रे. उन्होंने हमसे पूछा कि हम अलग क्यों बैठी हैं. हमने बताया कि इस समय हमारा मासिक धर्म चल रहा है इसलिए हमें अलग बैठाया गया है.''
''यह जानकर उन्हें बहुत दुख हुआ. उन्होंने कहा यह तो सामान्य सी शारीरिक प्रक्रिया है, इसे लेकर शर्म क्यों है. उन्होंने हमें बाकी लड़कियों के साथ बैठकर खाने के लिए कहा. उन्होंने मुस्कुराते हुए हमें समझाया कि कभी भी उन बातों के लिए शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए जो एक महिला होने के नाते हमारे शरीर में होती हैं. हमें हमेशा अपने शरीर पर गर्व होना चाहिए. उस समय नहीं मालूम था कि वे कौन थे. हम उन्हें 'घूमने वाले भगवान' के तौर पर याद करते थे. हमारे लिए वे एक आदर्श थे.''
एक तटस्थ स्वामी
मगर स्वामीजी ने कभी किसी राजनीतिक दल से क़रीबी नहीं दिखाई.
डॉक्टर जामदार कहते हैं, "हर दल का, हर नेता उनसे आशीर्वाद लेने आता था. पर उन्होंने कभी अपने अनुयायियों से किसी एक समर्थन करने के लिए नहीं कहा. कुछ मठ किसी राजनीतिक दल या राजनेता के साथ जुड़ जाते हैं. स्वामीजी ने कभी ऐसा नहीं किया. इस वजह से भी वो कई स्वामियों के लिए आदर्श रहे हैं"
पिछले साल भी, कर्नाटक चुनाव से पहले सिद्धगंगा मठ के स्वामी अपने रूख़ पर अटल रहे.
लिंगायत समुदाय का एक गुट चाहता था कि उनके समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा दिया जाए.
स्वामी जी के कई मठों ने इसका समर्थन या विरोध किया.
मगर "चलते-फिरते भगवान" अपनी तटस्थ राह पर चलते रहे.
ये ही वजहें हैं जिन्हें लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी तक 'वाकिंग गॉड' के निधन पर शोक जाहिर कर रहे हैं. कर्नाटक में भी सभी दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, " श्री श्री श्री शिवकुमारा स्वामीगालू लोगों के लिए जिए. ख़ासकर ग़रीबों और वंचितों के लिए. उन्होंने ख़ुद को ग़रीबी, भूख और सामाजिक अन्याय जैसी बीमारियों को दूर करने के लिए समर्पित कर दिया. दुनिया भर में फैले उनके असंख्य अनुयायियों के साथ मेरी प्रार्थनाएं हैं. उनके प्रति एकजुटता प्रकट करता हूं."
राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, "सिद्धगंगा मठ के प्रमुख शिवकुमारा स्वामी जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ. हर धर्म और समुदाय के लाखों भारतीय स्वामी जी का आदर और सम्मान करते थे. उनके चले जाने से बड़ा आध्यात्मिक खालीपन आ गया है. उनके सभी अनुयायियों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं."
सोनिया गांधी ने एक बयान जारी कर कहा है, "स्वामी जी ने समाज और देश की सेवा करते हुए लंबा जीवन जिया और 111 वर्षों तक उनके कांतिमय उपस्थिति हमारे लिए आशीर्वाद की तरह रही. भारत के महानतम आध्यात्मिक अगुवाओं में से एक की विदाई के वक्त मैं लिंगायत समुदाय के शोक में शामिल हूं. हम हमेशा उन्हें सम्मान के साथ याद करेंगे."
कर्नाटक सरकार ने स्वामी जी के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए मंगलवार को सभी सरकारी दफ़्तरों और शिक्षा संस्थानों को बंद रखने और तीन दिन का शोक मनाने का एलान किया है.
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