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आम चुनावों से पहले ममता बनर्जी की 'मोदी विरोधी रैली'
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बुलावे पर आज देश भर में विपक्षी पार्टियों के नेता यूनाइटेड इंडिया रैली में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं. इस साल मई में होने वाले आम चुनावों से पहले इसे बड़ी मोदी विरोधी रैली माना जा रहा है.
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार के अलावा बग़ावदी तेवर रखने वाले बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व केंद्रीय अंत्री अरुण शौरी, डीएमके नेता एमके स्टालिन रैली में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच चुके हैं.
कोलकाता में मौजूद बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के लाखों समर्थक भी इस रैली में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच चुके हैं. ममता बनर्जी इस रैली के ज़रिए विपक्षी एकता के अलावा अपनी ताक़त का अहसास भी कराना चाहती हैं. और यही वजह है कि इस रैली में भारी भीड़ जुटाने के लिए पार्टी ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है.
ममता बनर्जी ने इस रैली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंत की शुरुआत कहा है, लेकिन भाजपा इसे थके हुए नेताओं का जमावड़ा मान रही है.
पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष ने बीबीसी से कहा,"ये पहली बार नहीं है जब इस तरह की रैली पश्चिम बंगाल में हुई है. लेफ़्ट फ़्रंट ने भी इसी तरह सभी को बुलाया था लेकिन आज वो कहां हैं. ये सिर्फ़ बीजेपी के विरोध में और मोदी के डर की वजह से एक साथ आए हैं."
वो कहते हैं, "ये सब सिर्फ़ अपना अस्तित्व बचाने के लिए यहां जुट रहे हैं, देश के लोगों पर इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा. ऐसे-ऐसे नेताओं को लाकर शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है जिनका अपने प्रदेश में कोई समर्थन नहीं हैं. रिजेक्टेड और रिटायर्ड नेताओं का जमावड़ा किया जा रहा है."
राहुल-मायावती की गैर मौजूदगी
इस रैली में जहां देश भर की विपक्षी पार्टियों के बड़े नेता मंच पर होंगे वहीं दो नेताओं की ग़ैर मौजूदगी खलेगी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रैली में शामिल होने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है वहीं मायावती भी स्वयं उपस्थित रहने के बजाए अपना प्रतिनिधि भेज रही हैं.
राहुल गांधी और मायावती की ग़ैर मौजूदगी से कई सवाल भी उठ रहे हैं. सबसे अहम सवाल यही है कि क्या एक मंच पर प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार एक साथ नहीं दिखना चाहते?
कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक कहती हैं, "प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर कांग्रेस की राय स्पष्ट है. प्रधानमंत्री पद का दावा वही करे जिसे सबसे ज़्यादा जनसमर्थन मिले. हम ये भी मानते हैं कि सभी बड़े राजनीतिक दलों का नेतृत्व कर रहे लोगों की अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाएं भी हैं और हम उनका सम्मान करते हैं. लेकिन अंतिम फ़ैसला जनता ही करेगी."
चुनावों से पहले बन रहे गठबंधनों में कांग्रेस की भूमिका के सवाल पर वो कहती हैं, "हम हर प्रदेश की परिस्थिति को देखते हुए गठबंधन करेंगे. कहीं चुनाव से पहले गठबंधन होगा तो कहीं चुनाव के बाद. गठबंधन आज की राजनीति की हक़ीक़त है इसे कोई नकार नहीं सकता."
दूसरी ओर मायावती के इस रैली में न पहुंचने के भी राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. पार्टी प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया कहते हैं कि उनकी पार्टी भी इस रैली में शामिल हो रही हैं.
लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या मायावती अपने आप को विपक्ष की ओर प्रधानमंत्री पद की दौड़ में आगे दिखाने के लिए रैली में नहीं पहुंच रही हैं तो उन्होंने कहा, "इस देश को संभालने के लिए हमारी पार्टी, देश के दलितों, ग़रीबों, पिछड़ों और सभी धर्मों के लोगों की सबसे चहेती नेता इस समय मायावती ही हैं."
वो कहते हैं, "प्रधानमंत्री पद की इच्छा कोई भी रख सकता है, इसमें कोई बुरी बात नहीं है. लेकिन कोलकाता में इस समय विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुनने के लिए नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी को कैसे हराया जाए इसके लिए जुट रहे हैं."
हाल के महीनों में आए कई राजनीतिक परिणामों और किसानों और बेरोज़गारों के मुद्दों के प्रखर होने से देश का राजनीतिक माहौल बदला है. इस बदले माहौल में कोलकाता में ममता बनर्जी के आह्वान पर बुलाई गई रैली से क्या गठबंधन का कोई नया सूत्र निकलता है ये देखने की बात होगी.
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