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केरलः बिशप मुलक्कल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाली ननों का ट्रांसफ़र आदेश मानने से इनकार
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से बीबीसी हिंदी के लिए
केरल में बलात्कार के आरोप में घिरे जालंधर के बिशप फ़्रैंको मुलक्कल का विरोध करने वाली पांच में से चार ननों को कोट्टयम ज़िले में उनके कॉन्वेंट छोड़ने का निर्देश दिया गया है.
लेकिन, ये नन पूरी तरह से निडर हैं. इनमें से एक नन सिस्टर अनुपमा ने बीबीसी को बताया, "हम डरे हुए नहीं हैं. अगर वे हमें जाने के लिए कह रहे हैं तो हम नहीं जाएंगे. यदि वे हमें बर्खास्त कर देते हैं तो उन्हें करने दें. कोई बात नहीं. हम यहीं रहेंगे."
सिस्टर अनुपमा, सिस्टर एल्फी, सिस्टर जोसेफ़िन और सिस्टर एनसिटा ने कोच्चि में एक सार्वजनिक मंच से जालंधर के बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी जिससे 'सेव आवर सिस्टर्स' आंदोलन का नाम दिया गया था.
22 सितंबर को बिशप फ़्रैंको मुलक्कल को 30 घंटे की पूछताछ का साथ जालंधर से गिरफ़्तार किया गया था. बिशप फ़्रैंको पर साल 2014 से 2016 के बीच एक नन के साथ बलात्कार करने का आरोप है.
सिस्टर एनसिटा को केरल के कुन्नूर, सिस्टर जोसफ़ी को झारखंड, सिस्टर एल्फ़ी को बिहार और सिस्टर अनुपमा का तबादला पंजाब में किया गया है.
इन चारों ननों को लगभग एक जैसी ही चिट्ठी दी गई है. मिशनरी जीसस की सुपीरियर जनरल और मदर सुपीरियर रेजिना कदमथोट्टु ने बीबीसी से कहा, 'सच जनता के सामने आ रहा है'.
ननों का मानना है कि ये ट्रांसफ़र का फ़ैसला उनपर एक तरह का दबाव बनाने का तरीका है जिससे वे रेप का शिकार हुई नन को बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के खिलाफ़ केस वापस लेने के लिए तैयार करें.
सिस्टर अनुपमा ने कहा, '' हम इस केस की चश्मदीद हैं. हमारे लिए हमेशा केस के लिए सफ़र करना मुश्किल होगा. ऐसा करना हमारे ऊपर केस को वापस लेने का दबाव बनाने जैसा है. ''
फ़ादर अगस्टीन को चर्च ने कहा है कि या तो वे 'सेव ऑर सिस्टर' आंदोलन से ख़ुद को अलग कर लें या फ़िर कार्रवाई झेलने को तैयार रहें.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, ''ये सिस्टर केस की गवाह हैं. उन्हें इस तरह अलग करना प्रतिशोध से भरा काम है. ये साफ़ संदेश दिया जा रहा है कि चर्च ऐसे विरोधों को बर्दाश्त नहीं करेगा. और ऐसा तब किया जा रहा है जब पोप फ़्रांसिस ने अपने क्रिसमस संबोधन में साफ़ कहा था कि चर्च यौन उत्पीड़न क़तई बर्दाश्त नहीं करेगा.''
कैथोलिक बिशप काउंसिल फ़ॉर वुमेन की पूर्व कमिश्नर वर्जीनिया सलडान्हा ने कहा, ''वे लोग अपने पावर का इस्तेमाल ख़ुद को बचाने के लिए कर रहे हैं.
ननों की प्रमुख 'मदर सुपीरियर' जिन्होंने ट्रांसफ़र के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, वो ऊंचे पदों पर बैठे लोगों के दबाव में काम कर रही हैं. मदर सुपीरियर बिशप मुलक्कल के अंतर्गत काम कर रही हैं और वो जो भी कर रही हैं वो बिशप को बचाने के लिए कर रही हैं. ''
''मदर सुपीरियर जो भी कर रही हैं वो महिला विरोधी है. लेकिन पितृसत्तात्मक समाज में ऐसा ही होता है. जहां महिलाएं महिला के मुकाबले पुरूष को वरीयता देती हैं.''
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