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गगनयान से अंतरिक्ष भेजे जाने वाले भारतीय कैसे चुने जाएंगे?
केंद्रीय कैबिनेट ने साल 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष भेजने के लिए दस हज़ार करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है.
केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बारे में शुक्रवार शाम जानकारी दी.
इस प्रोजेक्ट का नाम गगनयान है. इसके तहत तीन भारतीयों को साल 2022 तक सात दिनों के लिए अंतरिक्ष भेजा जाएगा.
इस प्रोजेक्ट में कुल दस हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च होने हैं.
गगनयान प्रोजेक्ट सफल होने पर इंसान को अंतरिक्ष भेजने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा. इससे पहले ये काम रूस, अमरीका और चीन कर चुका है.
बीबीसी संवाददाता नवीन नेगी ने इस बजट को मंजूरी मिलने के बाद विज्ञान मामलों के जानकार पल्लव बागला से बात की.
पल्लव बागला कहते हैं, '' ये बहुत बड़ा कदम है. ये भारत और अंतरिक्ष एजेंसी के लिए बहुत ही बड़ी कामयाबी है. कैबिनेट से इसकी मंजूरी के बाद इसरो को बहुत ही तत्परता से काम करना होगा ताकि इसका लक्ष्य 2022 तक पूरा हो जाए.''
इसे पूरा करने के लिए लगभग 40 महीनों का समय मिला है, इतने कम समय में इसे पूरा करना इसरो के लिए कितना चुनौतीपूर्ण है?
बागला बताते हैं, ''इसरो के चेयरमैन से मेरी बात हुई थी. उन्होंने मुझे बताया था कि अगर इसरो को कोई लक्ष्य दिया जाता है तो वो उसे पूरा ज़रूर करता है. वो पिछले एक दशक से इस काम के लिए अपनी तरफ़ से लगा हुआ है. इसी दौरान उसने तकनीकी का भी विकास किया है लेकिन ह्यूमन रैटिंग, प्री मोड्युल और लाइफ सपोर्ट के लिए इसरो को काफ़ी मेहनत लगेगी. 40 महीनों का समय में इसे पूरा करना बहुत मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं.'''
मानव मिशन में कितनी मुश्किल आती है और किसी स्पेस एजेंसी के लिए ये कितना मुश्किल होता है?
बागला के मुताबिक़, ''अगर मानव मिशन आसान होता तो दुनिया में और भी अंतरिक्ष एजेंसी इसे कर पाती. दुनिया में अब तक ऐसा करने वाली केवल तीन अंतरिक्ष एजेंसी ही है चूंकि इसे करना बहुत ही मुश्किल काम है और इसरो इसे करने में पूरी कोशिश करेगा. किसी को अंतरिक्ष भेजना और उसे सही सलामत वापस लाना गुड्डे गुड़िया का खेल नहीं.''
''इसरो को बाहुबली रॉकेट की ह्यूमन रैटिंग करनी पड़ेगी, प्री मोड्यूल बनाना पड़ेगा, अंतरिक्ष में क्या खाएंगे, वहां क्या काम करेंगे वो सब पहले तैयार करना होगा और इन सबके बाद उन्हें वापस लाना होगा, जैसा कि उन्होंने बताया है कि वो अरेबियन सी में वापसी करेंगे. ये सब करना मुश्किल है लेकिन इसरो इसे पूरा करने के लिए पूरी मेहनत कर रहा है.''
जिन तीन लोगों को अंतरिक्ष पर भेजा जाएगा, उनका चयन किस पैमाने पर होगा और वो कौन लोग होंगे?
बागला के मुताबिक़, ''प्रेस रिलीज़ के हिसाब से तो अप-टू-थ्री क्रू की बात हो रही है. जो क्रू मोड्यूल बना है वो तीन लोगों को अंतरिक्ष में ले जाने की काबिलित रखता है. उसमें एक हफ्ते तक खाना-पीना-हवा दे कर ज़िंदा रखा जा सकता है और उन्हें वापस धरती पर लाया जा सकता है.''
''इसमें जाने का पहला मौका एयरफोर्स के टेस्ट पायलेट को दिया जाता है क्योंकि अंतरिक्ष में जाकर अपना काम ख़त्म करके वापस आने उनके पास ज्यादा काबिलियत होती है. उनकी ट्रेनिंग भी इसी तरह की होती है. और हो सकता है इंडियन एयरफोर्स के टेस्ट पायलेट को इसमें जाने के लिए पहला मौका दिया जाए.''
क्या इसरो के अलावा इस योजना में कोई प्राइवेट सेक्टर भी शामिल होगा?
बागला बताते हैं, ''इसरो की जो सैटेलाइट बनती हैं उसमें प्राइवेट सेक्टर की भूमिका ज़रूर होती है लेकिन इसमें कोई प्राइवेट कंपनी पूरी तरह से शामिल होगी इसकी जानकारी अभी नहीं है.''
15 अगस्त को मोदी ने किया था ऐलान
भारतीयों को अपने दम पर अंतरिक्ष भेजने के इस प्रोजेक्ट का ऐलान बीते साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.
मोदी ने लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में घोषणा की थी कि 2022 में देश की किसी बेटी या बेटे को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद इसरो के चेयरमैन डॉ के सीवान का ने कहा था, ''इसरो की काफ़ी व्यस्तताएं हैं लेकिन हम ये काम 2022 तक कर लेंगे.''
इसरो ने उम्मीद जताई है कि वो 40 महीनों के अंदर पहले मिशन की शुरुआत कर दी जाएगी.
इसी मिशन के क्रम में नवंबर में इसरो ने रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3डी 2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया था.
विज्ञान मामलों के जानकार पल्लव बागला ने बीबीसी को बताया था, ''2022 से पहले भारत मिशन 'गगनयान' के तहत किसी भारतीय को अंतरिक्ष में भेजना चाहता है और वह भारतीय इसी जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट से भेजा जाएगा.''
भारत के इस ऐलान के बाद ऐसी ख़बरें आईं थीं कि पाकिस्तान भी चीन की मदद साल 2022 तक पाकिस्तानी को अंतरिक्ष भेजा जा सकता है.
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