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सार्क सम्मेलन में पाकिस्तान नहीं जाएगा भारत: सुषमा स्वराज
पाकिस्तान के न्योते को अस्वीकार करते हुए भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि भारत सार्क सम्मेलन में शामिल नहीं होगा.
बुधवार को हैदराबाद में पत्रकारों के सवालों के जवाब में सुषमा स्वराज ने कहा कि जब तक पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाएगा तब तक द्विपक्षीय बातचीत नहीं होगी.
उन्होंने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर शुरू होने का मतलब ये नहीं है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत बहाल हो जाएगी.
वहीं, मंगलवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्क सम्मेलन के लिए न्योता दिया था. ये सम्मेलन इस्लामाबाद में होने वाला है लेकिन अभी इसका समय तय नहीं हुआ है.
सुषमा स्वराज ने कहा कि द्विपक्षीय बातचीत और करतारपुर कॉरिडोर दोनों अलग-अलग मसले हैं. भारत सरकार पिछले 20 सालों से इस कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान से बातचीत कर रही है.
पाकिस्तान ने पहली बार सकारात्मक जवाब दिया है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि द्विपक्षीय बातचीत शुरू हो जाएगी.
सुषमा स्वराज का ये बयान उस समय आया है, जब बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखी.
करतारपुर आने से सुषमा का इनकार
इस कॉरिडोर को छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. कॉरिडोर बन जाने पर भारत से लोग बिना वीज़ा के करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब जा पाएंगे. ये इलाक़ा पाकिस्तान में है.
वहीं, पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नववोज सिंह सिद्धू भी कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पाकिस्तान गए हैं.
पाकिस्तान ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को करतारपुर आने का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देकर इनकार कर दिया था.
उनकी जगह केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और हरदीप सिंह पुरी ने इसमें हिस्सा लिया.
यह कॉरिडोर तब चर्चा में आया जब नवजोत सिंह सिद्धू इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने पाकिस्तान गए थे.
तब सिद्धू ने करतारपुर कॉरिडोर खोले जाने की मांग की थी और पाकिस्तान की तरफ़ से सकारात्मक रुख़ दिखाया गया था. उसी कार्यक्रम में सिद्धू पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से गले मिले थे और इस पर भारत में काफ़ी विवाद हुआ था.
बाद में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बारे में कैबिनेट के फ़ैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया था कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक कमिटी बनी थी, जिसके सुझाव पर ये फ़ैसला लिया गया है.
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