You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बीबीसी करेगी 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान रियलिटी चेक: बीबीसी के महानिदेशक टोनी हॉल #BeyondFakeNews
बीबीसी के दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम #BeyondFakeNews में बीबीसी के महानिदेशक टोनी हॉल ने फ़ेक न्यूज़ को पत्रकारिता जगत की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बताया है.
उन्होंने इससे निपटने के लिए समाचार प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.
भारत के सात शहरों में सोमवार को बीबीसी के #BeyondFakeNews कार्यक्रम हुए. दिल्ली के कार्यक्रम में बीबीसी के महानिदेशक टोनी हॉल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये शामिल हुए.
टोनी हॉल ने भारत में फेक न्यूज़ के ख़िलाफ बीबीसी की मुहिम की सराहना की.
उन्होंने कहा, "बीबीसी भारत के शहरों में जो काम कर रहा है, उससे लोग फ़ेक न्यूज़ के बारे में जागरूक हो रहे हैं. नौजवान फ़ेक न्यूज़ के विचार को अच्छे से समझें, यह सुनिश्चित करने के लिए इसकी ख़ासी अहमियत है, ताकि वे अपने माता-पिता और बाक़ी लोगों को इस बारे में बता सकें कि किन ख़बरों पर यक़ीन नहीं करना है. यह हमारे और हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. मैं आपके काम की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं."
'विशेषज्ञ पत्रकारों की अहमियत'
टोनी हॉल ने स्कूली छात्र-छात्राओं के फ़ेक न्यूज़ से जुड़े सवालों के भी जवाब दिए. एक छात्र ने उनसे पूछा कि लंदन में और वैश्विक स्तर पर बीबीसी फ़र्ज़ी ख़बरों से कैसे निपटता है?
टोनी हॉल ने कहा कि वह पत्रकारिता में विशेषज्ञता के हिमायती हैं और चाहते हैं कि दुनिया भर में पत्रकार अर्थव्यवस्था, व्यापार, परिवहन, राजनीति या अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ हों.
उन्होंने कहा, "उन पत्रकारों को अच्छे से पता होता है कि अपने विषय पर लोगों से कैसे बात करनी है कि वे तथ्यों पर भरोसा करें. ये पत्रकारिता का थोड़ा पुराना तरीक़ा है, लेकिन बहुत मायने रखता है."
बीबीसी के महानिदेशक ने कहा कि दुनियाभर में फ़ील्ड पर अपने संवाददाताओं के होने का बहुत फ़ायदा मिलता है.
'रियलिटी चेक'
फ़ेक न्यूज़ से निपटने के संबंध में तीसरा उपाय बताते हुए उन्होंने कहा, "पत्रकारों को इस काम पर लगाना कि वे जनता को बताएं कि क्या सच है और क्या झूठ. लंदन में हमारा एक कार्यक्रम है, 'रियलिटी चेक' नाम से, जिसे हम पूरी दुनिया में शुरू करना चाहते हैं. इसका मक़सद ये है कि कहीं से कोई दावा किया जा रहा हो तो क्या हम उस दावे की सत्यता जांच सकते हैं?"
टोनी हॉल ने एक उदाहरण देते हुए बताया, "हाल ही में हमारे शानदार कार्यक्रम 'अफ्रीका आई' ने एक ऐसे मामले की पड़ताल की जिसमें कैमरून के सैनिकों ने दो ग्रामीण महिलाओं और बच्चों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. कैमरून सरकार ने पहले इससे इनकार किया. लेकिन फिर लगातार डेटा पर काम करते हुए हमने साबित किया कि वे हत्याएं वाक़ई हुईं थीं और हमने कैमरून के सैनिकों की उसमें संलिप्तता के तथ्य भी पेश किए. मुझे लगता है कि इस तरह की पत्रकारिता बहुत महत्वपूर्ण है."
इसके अलावा उन्होंने ज़ोर दिया कि फे़क न्यूज़ के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा बात की जाए और स्कूलों-विश्वविद्यालयों के स्तर पर इस संबंध में चर्चा और बहसें हों. ताकि लोग किसी भी बात पर यक़ीन करने से पहले सोचें.
'मूल्यों की बात'
कार्यक्रम का संचालन कर रहीं बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये ने कहा कि भारत में अगले साल लोकसभा चुनाव हैं और बीबीसी ने वादा किया है कि 2019 में भी रियलिटी चेक किया जाएगा.
टोनी हॉल ने कहा, "बीबीसी को जो बातें विशेष बनाती हैं, ये उसी का हिस्सा है. लोग बीबीसी पर भरोसा करते हैं और हमें उसे बनाए रखना है. दिल्ली में हमारे पत्रकारों ने भी यही करने का फैसला किया है. हमारी ताज़ा रिसर्च भी यही बताती है कि इस शोरगुल वाले माहौल में लोग यही जानना चाहते हैं कि वे कहां जाएं जहां कोई विश्वसनीय इंसान उन्हें बता सके कि असल में ये हो रहा है."
टोनी हॉल ने कहा कि दुनियाभर में पत्रकारिता को हाशिये पर धकेलने की तरह-तरह से कोशिशें होती हैं. लेकिन पत्रकारिता मायने रखती है. विश्वसनीय सूचना की ज़रूरत सबको होती है.
उन्होंने कहा, "साथ ही उन मूल्यों के बारे में भी बात करना ज़रूरी है, जो पत्रकारिता के लिए बेहद ज़रूरी हैं. ख़ास तौर से ऐसी दुनिया में जहां बहुत ध्रुवीकरण और बहुत शोर है."
'हो सकते हैं गंभीर परिणाम'
टोनी हॉल ने इस मुहिम के सकारात्मक नतीजों की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा, "मुझे बहुत ख़ुशी होगी अगर भारत में आपके काम से हमें वैश्विक स्तर के कुछ सबक मिलें. मेरी अपनी राय ये है कि जो आप कर रहे हैं, वो हमें और ज़्यादा करने की ज़रूरत है. हमें ख़बर से जुड़ी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की ज़रूरत है ताकि लोग यह समझ सकें कि विश्वसनीय ख़बरें कैसे जुटाई और पेश की जाती हैं."
उन्होंने कहा कि हम सब मज़ेदार चीज़ें शेयर करना पसंद करते हैं, हम हंसना चाहते हैं और हल्के-फुल्के पल चाहते हैं. लेकिन हमें ये भी समझना चाहिए कि ख़तरनाक तरह की फ़ेक न्यूज़ शेयर करने के बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसमें किसी की जान भी जा सकती है.
एक छात्रा ने उनसे पूछा कि जब मीडिया में भी वैचारिक ध्रुवीकरण हो और सोशल मीडिया फर्ज़ी ख़बरों से भरा हो तो हम किस पर भरोसा करना चाहिए.
टोनी हॉल ने इस पर कहा, "अमरीका में भी यह चर्चा होती है और मैं इस पर आपकी राय भी जानना चाहूंगा. लेकिन हमें ये समझने की कोशिश करनी चाहिए कि दोनों पक्षों के दावों के बीच सच कहां है. और अक्सर ये होता है कि सच उन दोनों दावों के बीच में कहीं होता है. इसी काम में हम लोगों की मदद करना चाहते हैं. हम लोगों के पक्ष में खड़े हैं. हम लोगों को बताना चाहते हैं कि सच क्या है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)