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#BeyondFakeNews फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ बीबीसी का हल्ला बोल
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, लखनऊ
व्हाट्सऐप पर हर रोज़ टहलने वाले करोड़ों-अरबों संदेशों के बीच कुछ मैसेज, तस्वीरें या वीडियो ऐसे संदेश लेकर आते हैं, जो हमें डराते हैं या गुस्सा दिलाते हैं. ज़रूरी नहीं कि वो सच हों. लेकिन हम उन्हें सच मान लेते हैं. ये संदेश इतने ख़तरनाक हो गए हैं कि अब मौत की वजह बनने लगे हैं. और ऐसे संदेशों को नाम दिया गया है फ़ेक न्यूज़!
लेकिन अगर कोई चीज़ फ़ेक या फ़र्ज़ी है, तो फिर वो न्यूज़ या ख़बर कैसे हो सकती है?
ये सवाल सही है लेकिन बदक़िस्मती से फ़ेक न्यूज़ हमारे दौर के सबसे बड़े विरोधाभासों में से एक हैं. और ये सिर्फ़ व्हाट्सऐप नहीं, बल्कि फ़ेसबुक, टि्वटर और दूसरे ज़रियों से हम तक पहुंच रही है.
बीते कुछ साल में फ़ेक न्यूज़ इतनी बड़ी मुसीबत बनकर उभरी है कि इनकी वजह से लोगों की हत्याएं, हिंसा, दंगे और आगजनी हो चुकी है.
क्या है बियोंड फ़ेक न्यूज़
इससे भी बड़ी टेंशन ये कि इन पर काबू पाने में अब तक कामयाबी नहीं मिली है.
इन्हीं बातों के मद्देनज़र दुनिया का सबसे विश्वसनीय समाचार संस्थान होने के नाते बीबीसी ने फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ एक ख़ास अभियान शुरू किया गया है.
इसे #BeyondFakeNews का नाम दिया गया है और इसी सिलसिले में 12 नवंबर, सोमवार को लखनऊ के अलावा दिल्ली समेत देश के छह प्रमुख शहरों में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है.
इन कार्यक्रमों में सरकारी नुमाइंदे, नेता, पुलिस, मीडिया, साइबर जानकार और फ़ेक न्यूज़ के पीड़ितों के अलावा वो जाने-माने लोग हिस्सा ले रहे हैं जिन पर कहीं ना कहीं फ़र्ज़ी ख़बरों को ख़त्म करने या रोकने की ज़िम्मेदारी बनती है.
समारोह में शामिल होंगे ये अतिथि
बीबीसी हिन्दी इस रोज़ लखनऊ यूनिवर्सिटी के मालवीय हॉल में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रहा है जिसमें उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, डीजीपी ओ पी सिंह, वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार, सुनीता ऐरन, साइबर एक्सपर्ट जीतेन जैन, मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार और फ़ेक न्यूज़ के पीड़ित राहुल उपाध्याय हिस्सा ले रहे हैं.
इसी कार्यक्रम में बीबीसी हिन्दी के संपादक मुकेश शर्मा फ़ेक न्यूज़ पर किए गए बीबीसी की रिसर्च के निष्कर्ष सामने रखेंगे, जिससे इस बात का भी अंदाज़ा मिलेगा कि फ़ेक न्यूज़ का भारत पर क्या असर पड़ा या पड़ रहा है. ये सर्वे बीबीसी ने गूगल और टि्वटर के साथ मिलकर किया है.
कार्यक्रम में इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश भी होगी कि क्या फ़ेक न्यूज़ भारत के लिए नई दीमक बनती जा रही है?
इसे लेकर पुलिस और दूसरी एजेंसियों का रवैया कैसा है और क्या इससे निपटने के लिए उनके पास पर्याप्त ट्रेनिंग या टूल हैं?
फे़क न्यूज़ पहचानने की ट्रेनिंग
साथ ही ये सवाल भी अहम है कि फ़ेक न्यूज़ के मामले में मीडिया का रोल कैसा रहा है और क्या फ़र्ज़ी ख़बरों पर लगाम कसने की ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभा पा रही है?
#BeyondFakeNews अभियान की लखनऊ की कड़ी में एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा जिसे गूगल के नुमाइंदे संभालेंगे. इस सेशन में कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों को फ़ेक न्यूज़ पहचानने वाले गूगल टूल की ट्रेनिंग दी जाएगी.
इस अभियान का लक्ष्य फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ जंग छेड़ना है जो दुनिया भर में सामाजिक और राजनीतिक नुकसान पहुंचा रही है. ग्लोबल मीडिया लिटरेसी के अलावा इस अभियान के तहत पैनल डिबेट होगी और साथ ही फ़ेक न्यूज़ से निपटने के लिए टेक्नोलॉजिकल हथियारों पर भी बात होगी.
तो आइए फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ बीबीसी की इस जंग का हिस्सा बनिए.
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