रिज़र्व कैपिटल जो केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच झगड़े की जड़ बना है!

भारतीय रिज़र्व बैंक और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच पिछले कुछ हफ़्तों से तनाव और मतभेद की जो स्थिति पैदा हुई, वो फ़िलहाल ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही है. अभी ये भी साफ़ नहीं हो पा रहा है कि ये पूरा विवाद आख़िर जा किस दिशा में रहा है.

शुरुआत इस आरोप से हुई कि केंद्र सरकार आरबीआई की स्वायत्तता में दख़लअंदाज़ी कर रही है. फिर ख़बरें आई हैं कि सरकार आरबीआई ऐक्ट का सेक्शन-7 लागू करके रिज़र्व बैंक की ताक़त कम करना चाहती है.

इस बीच आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफ़े की अटकलें भी लगने लगीं.

हालांकि उसके बाद वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया कि सरकार उर्जित पटेल को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर नहीं करेगी.

इन तमाम 'ट्विस्ट और टर्न' के बीच सबसे बड़ा टर्न आया जब ख़बर आई कि इस पूरे विवाद के केंद्र में 3.6 लाख करोड़ रुप हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से कहा था कि वो अपने पास जमा 3.6 लाख करोड़ रुपये उसे दे दे और आरबीआई ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक ये पैसे सरकार को दिए जाने से अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा होने का ख़तरा था और यही वजह है कि रिज़र्व बैंक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

इससे पहले 2017-18 में वित्त मंत्रालय ने पूंजी की ज़रूरत का हवाला देते हुए रिज़र्व बैंक से उसके पसा जमा कुल धनराशि मांगी थी और तब भी आरबीआई ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था.

हालांकि अब वित्त मंत्रालय की ओर से इसका खंडन भी आ गया है.

वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने दो दिन पहले ट्वीट करके कहा:

मीडिया में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. सरकार का आर्थिक हिसाब-किताब एकदम सही रास्ते पर है. ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जिसमें आरबीआई से 3.6 लाख करोड़ या 1 लाख करोड़ ट्रांसफ़र करने का कोई प्रस्ताव है, जैसा कि मीडिया में कहा जा रहा है. प्रस्ताव सिर्फ़ एक है और वो है आरबीआई के लिए एक तय धनराशि निर्धारित करने का."

तो अब अहम सवाल ये है कि आख़िर ये 'रिज़र्व कैपिटल' है क्या जिसे लेकर इतना घमासान मचा हुआ है? आरबीआई कितने पैसे रख सकता है? क्या इसकी कोई सीमा है? क्या इससे जुड़ा कोई क़ानून है…?

ऐसे ही कुछ सवालों के ढूंढने के लिए बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर ने आर्थिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा से बात की.

ज़ाहिर है, रिज़र्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच तनाव है और ये तनाव बढ़ रहा है क्योंकि अब यहां पर एक नया मुद्दा आ गया है. नया मुद्दा ये है कि आरबीआई के पास उसके रिज़र्व में कितना पैसा होना चाहिए. आरबीआई की इस बार की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक उसके पास 9.59 लाख करोड़ रुपये हैं.

सरकार को लग रहा है कि ये राशि ज़्यादा है. आरबीआई के पास अधिकतम कितने पैसे हो सकते हैं, इस बारे में कोई लिखित नियम या क़ानून मौजूद नहीं है.

अब यह उम्मीद है कि जब 19 नवंबर को आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की बैठक होगी तो इस विषय पर चर्चा होगी और नियम बनाने के बाद देखा जाएगा कि आरबीआई के पास कितना रिज़र्व रहना चाहिए.

रिज़र्व को लेकर क्या हैं नियम?

सेंट्रल बैंक की परिसंपत्तियों का कितना हिस्सा रिज़र्व होना चाहिए, दुनिया के कई देशों में यह 13 या 14 प्रतिशत है जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक के मामले में यह 27 प्रतिशत है. अब यह ग्लोबल नॉर्म्स के हिसाब से ज़्यादा है.

यहां ये जानना भी ज़रूरी है कि आरबीआई के पास ये किसका पैसा है. ये पैसा आरबीआई ने अलग-अलग स्रोतों से जुटाया है, आम जनता का पैसा है. सरकार का मानना है कि यह आम लोगों पर खर्च होना चाहिए. लेकिन कितना पैसा मिलना चाहिए, उसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है.

यही कारण है कि अब यह बात चल रही है कि तय मानक बनाए जाएं. हालांकि सुभाष चंद्र गर्ग ने अपने ट्वीट में कहा था कि हमने आरबीआई से कोई पैसा नहीं मांगा, यह बेबुनियाद है. हम सिर्फ़ एक ढांचा बनाने की बात कर रहे हैं.

हमें समझने की ज़रूरत है कि यह एक शुरुआत है जिसके बाद तय हो जाएगा कि आरबीआई के पास कितना रिज़र्व होना चाहिए. इसके बाद जो भी अतिरिक्त धनराशि होगी, उसे सरकार को हस्तांतरित करने का रास्ता खुल जाएगा.

आख़िर क्यों उठी है यह मांग?

यह मामला पहले भी उठा था. पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकर अरविंद सुब्रमण्यम ने इकनॉमिक सर्वे में इस बात का ज़िक्र किया था कि लगभग चार लाख करोड़ रुपये का रिज़र्व सरकार को ट्रांसफ़र होना चाहिए. लेकिन इकनॉमिक सर्वे सरकारी अर्थशास्त्रियों के जुटाये आंकड़ों का दस्तावेज़ है, यह सरकार की नीति नहीं होती है.

इसलिए यह चर्चा का विषय बना मगर आगे बात बढ़ी नहीं. अब बात एक ठोस तरीके से आगे बढ़ रही है.

यह चर्चा पहले हुई थी मगर ठोस प्रस्ताव में तब्दील नहीं हुई. अभी लग रहा है कि इस बार यह ठोस प्रस्ताव में तब्दील हो रही है जिसमें आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की बैठक होगी. उम्मीद है कि बैठक में इस पर चर्चा होगी.

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