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अमरीकी प्रतिबंधों से कैसे बचा भारत-ईरान का अहम समझौता
'द हिंदू' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरान के चाबहार पोर्ट के विकास से जुड़ी गतिविधियां सोमवार को लागू हुए सख़्त अमरीकी प्रतिबंधों से अछूती रहेंगी.
भारत ने 2016 में इस पोर्ट के विकास के लिए अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के साथ समझौता किया था.
भारत पोर्ट को प्रतिबंधों से अलग रखने के लिए वार्ता कर रहा था. ऐसे में इस ख़बर से भारत को राहत मिलने की उम्मीद है.
अमरीकी प्रतिबंधों के मद्देनज़र दो सप्ताह पहले अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और भारत के प्रतिनिधियों ने दिल्ली में वार्ता की थी.
सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट की अंतरकलह आंतरिक मामला
भारत के उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने कहा है कि हाल ही में सीबीआई और कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट में सामने आई अंतरकलह इन संस्थानों के आंतरिक मुद्दे हैं.
नायडू ने कहा, ''इस तरह के मामलों से निबटने के लिए संस्थानों को ही सुधारात्मक क़दम उठाने चाहिए.'
'द इंडियन एक्सप्रेस' से बात करते हुए नायडू ने कहा, "आप देखिए, सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई में जो अब तक हुआ है, ये सब आंतरिक मुद्दे हैं. इसलिए एक आंतरिक सुधारात्मक तंत्र होना चाहिए."
हादसे में बचे मांजरेकर और गावस्कर
'द हिंदू' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच दूसरे टी-20 मुक़ाबले के दौरान भारत के पूर्व क्रिकेटर संजय मंजरेकर और सुनील गावस्कर एक हादसे में घायल होने से बाल-बाल बच गए.
ये मैच लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में खेला गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक़, गावस्कर और मांजरेकर जब कमेंट्री बॉक्स में दाख़िल हो रहे थे, तब शीशे का एक दरवाज़ा टूट गया.
ये लखनऊ में नए बने इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में हुआ पहला अंतरराष्ट्रीय मैच था. 50 हज़ार की क्षमता वाला ये स्टेडियम पूरी तरह भरा था.
सबरीमलाः आरएसएस कार्यकर्ताओं ने तोड़ी परंपरा
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, सबरीमला की परंपराओं के बचाव में उतरे प्रदर्शनकारियों ने ही मंदिर की एक पवित्र परंपरा का उल्लंघन कर दिया.
एक दिन की विशेष पूजा के लिए खुलने के बाद मंदिर मंगलवार को फिर से बंद हो गया.
सुप्रीम कोर्ट के मंदिर में 10 से 50 आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दिए 40 दिन होने के बाद भी अब तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकी है. हालांकि मंगलवार को एक महिला के मंदिर में दाख़िल होने में कामयाब रहने की अफ़वाह फैलने के बाद प्रदर्शनकारी मंदिर की 18 पवित्र सीढ़ियों पर ही बैठ गए.
हालांकि इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रदर्शनकारियों के पास पारंपरिक इरुमुदी (मन्नत के लिए चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे को ढकने का कपड़ा) ही नहीं था.
मान्यताओं के मुताबिक़, सिर्फ़ इरुमुदी लाने वाले श्रद्धालुओं को ही सीढ़ियों से नीचे उतरने दिया जाता है.
बाद में जारी एक बयान में आरएसएस से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मान लिया कि उन्होंने परंपरा का उल्लंघन किया है.
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