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डीडी न्यूज़ के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर माओवादियों ने जताया दुख
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिये
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मंगलवार को माओवादियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर माओवादियों ने एक बयान जारी कर सफाई दी है.
माओवादियों की कथित दरभा डिवीज़नल कमेटी के सचिव साईंनाथ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ''संघर्ष वाले इलाकों में पत्रकार और अलग-अलग कर्मचारी लोग पुलिस के साथ न आएं.''
इस बयान की प्रतियां स्थानीय पत्रकारों को भेजी गई हैं. पहले जब भी माओवादियों के दरभा डिविजन की ओर से बयान सामने आए हैं, उन पर साईंनाथ के ही हस्ताक्षर रहे हैं.
मंगलवार को दंतेवाड़ा से लगभग 30 किलोमीटर दूर अरनपुर में संदिग्ध माओवादियों ने पहले से ही घात लगाया था. इसकी चपेट में आकर सुरक्षा बल के दो जवानों और दूरदर्शन के एक कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई थी. बाद में एक घायल जवान ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था.
माओवादियों की आलोचना
ओडिशा के बोलांगीर के रहने वाले अच्युतानंद साहू की मौत को लेकर देश भर में माओवादियों की कड़ी आलोचना हुई है. दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में इस हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ है.
इस घटना के बाद जारी बयान में माओवादियों ने कहा है कि इलाके में सड़क निर्माण का काम चल रहा है, जिसका आम जनता विरोध कर रही है. यहां तक कि लोगों ने रैलियां भी निकाली हैं. लेकिन पुलिस मारपीट कर सड़क निर्माण करवा रही है.
माओवादियों ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि हर दिन निर्माण की सुरक्षा के बहाने पुलिस लोगों के साथ मारपीट, लूटपाट और फायरिंग कर रही है.
मंगलवार को हुये हमले का विवरण देते हुये माओवादियों ने कहा है कि हर दिन की तरह 30 तारीख की सुबह उनकी पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी ने एंबुश लगाया था. उसी समय दूरदर्शन की टीम पुलिसकर्मियों की गाड़ियों में बैठकर पहुंची और एंबुश में फंस गई.
माओवादी सचिव ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें नहीं मालूम था कि इसमें दूरदर्शन टीम भी है.
माओवादियों के बयान में कहा गया है, "ज़बरदस्ती फायरिंग में अच्युतानंद साहू का मरना दुख की बात है. हम जानबूझ कर पत्रकार को नहीं मारेंगे. इस घटना के बाद राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय प्रचार-प्रसार शाखा मंत्री, पुलिस अधिकारी अवस्थी हमारी पार्टी को बदनाम करने के लिये दूरदर्शन टीम पर माओवादी हमला किया, ऐसा बोलते हुये मीडिया में दुष्प्रचार कर रहे हैं. पत्रकार लोग हमारे दुश्मन नहीं हैं. हमारे मित्र हैं."
माओवादियों की ओर से जारी इस बयान में कहा गया है कि "कभी भी संघर्ष इलाकों में पत्रकार, अलग-अलग कर्मचारी लोग पुलिस के साथ न आयें. खास कर चुनाव ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारी लोग किसी भी परिस्थिति में पुलिस के साथ न आएं."
बस्तर में मुश्किल में पत्रकारिता
लगभग युद्ध क्षेत्र में बदल चुके बस्तर में पत्रकार पिछले कई साल से पुलिस और माओवादियों की प्रताड़ना के बीच काम कर रहे हैं.
कई पत्रकारों को पुलिस ने माओवादी बता कर जेल भेजा है तो कई जमानत पर रिहा हुए हैं. दूसरी ओर समय-समय पर माओवादियों द्वारा पत्रकारों को प्रताड़ित करने की ख़बरें भी सामने आती रही हैं.
बस्तर के एक पत्रकार नेमीचंद जैन को पहले पुलिस ने माओवादी होने के आरोप में गिरफ़्तार कर जेल में डाला और बाद में माओवादियों ने 2013 में पुलिस का मुख़बिर बताकर नेमीचंद जैन की हत्या कर दी.
इसी तरह माओवादियों ने पत्रकार साईं रेड्डी की भी हत्या कर दी थी.
उस वक़्त भी माओवादियों ने बयान जारी करके पत्रकारों की मौत पर माफ़ी मांगी थी.
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