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अमृतसर हादसा: अपनी सफाई में नवजोत कौर ने क्या कहा
पंजाब के अमृतसर में दशहरा मेले के दौरान हुए हादसे में कम से कम 58 लोगों की मौत हो गई है.
शहर के करीब जोड़ा रेलवे फाटक के पास रावण के पुतले के दहन के वक़्त ट्रेन की चपेट में आकर लोगों की मौत हो गई थी. सैंकड़ों घायल हुए थे.
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पंजाब सरकार के मंत्री नवोजत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर ने शिरकत की थी, जिसके बाद उन पर कई सवाल उठ रहे हैं.
उन पर सुरक्षा के इंतजाम को नजरअंदाज़ करने, लापरवाही और लोगों के जान से खिलवाड़ करने के आरोप लग रहे हैं.
इन सभी आरोपों का जवाब देते हुए नवजोत कौर ने कहा कि वो वहां कुछ वक़्त के लिए गई थीं और व्यवस्था की सारी ज़िम्मेदारी आयोजकों की थी.
उन्होंने बीबीसी पंजाबी के संवाददाता सबरजीत सिंह धालीवाल के साथ बातचीत में कहा, "मुझे वहां साढ़े छह बजे बुलाया गया था. मैं वहां 6.40 बजे पहुंची. मेरे पास दस मिनट का वक़्त था क्योंकि मुझे दो अन्य कार्यक्रमों में जाना था."
"मेरे पास उतना वक़्त नहीं था कि मैं वहां का जायजा लेती. कहीं भी जाते हैं तो आप यही सोचते हैं कि जो आयोजन कर रहा है वो ज़िम्मेदार है और उसने सभी इंतजाम पूरी ज़िम्मेदारी से की होगी."
'लापरवाही सबकी है'
उन्होंने बताया कि जब वो स्टेज पर पहुंची तो अचानक माइक पर कहा जाता है कि "आप आए हैं और आपके लिए पूरी भीड़ इकट्ठा हुई है, जो रेलवे ट्रैक पर भी बैठे हैं."
नवोजत कौर कहती हैं, "इस घोषणा के तुरंत बाद मैं मुड़ी और पूछा कि लोग ट्रैक पर भी बैठे हैं? तब उन्होंने कहा कि नहीं मैम, ट्रैक पर खड़े हैं और चार-पांच बार इसकी घोषणा की गई है कि रेलवे ट्रैक पर खड़े न हों."
रावण दहन जब हो रहा था, पटाखों की आवाज़ के बीच ट्रेन गुजरी और कुछ सेकंड में दर्जनों लोग इसकी चपेट में आ गए.
त्यौहार का जश्न मातम में बदल गया. कई लोगों के शरीर कई हिस्सों में कट गए. मरने वालों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल थी.
जहां घटना घटी, वहां से स्टेज ठीक सामने था. आपने लोगों को ट्रैक से हटने को क्यों नहीं कहा, इस सवाल के जवाब में नवजोत कहती हैं, "मैं जहां खड़ी थी वहां सामने से तेज़ रोशनी मेरी आंखों पर पड़ रही थी. इस वजह से मैं साफ़ तौर पर सामने देख नहीं पा रही थी."
"लोग सामने वाली दीवार के पीछे खड़े थे. कोई भी इस स्थिति में नहीं बता सकता कि सामने वाली दीवार के लोग ट्रैक पर खड़े हैं या ट्रैक के पीछे खड़े हैं."
इतनी संख्या में मौत के लिए आख़िर ज़िम्मेदार कौन हैं? नवजोत कहती हैं, "सबकी लापरवाही है. जो-जो आयोजन को बुलाए थे, प्रशासन की, सबकी."
"पूरे अमृतसर में कई आयोजन हुए होंगे, क्या आप बता सकते हैं कि कितनों ने क्लियरेंस ली होगी. ये अमृतसर का एटीट्यूड है, जिसे बदलने की ज़रूरत है."
जांच में ज़िम्मेदार तय होंगे
हादसे के बाद से आयोजन करने वाला फ़रार है. यह भी बात सामने आई है कि उसने आयोजन अनुमति लेने की पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया था.
नवजोत ने कहा, "ये जांच में पता चलेगा कि आयोजन करने वालों ने किन-किन चीज़ों के लिए अनुमति ली थी. मुझे नहीं पता कि उन्होंने अनुमति ली थी भी या नहीं. आयोजन करने वालों को जांच समिति के समक्ष पेश होना चाहिए."
आरोप लग रहे हैं कि नवजोत कौर चाहती तो हादसा टल सकता था और 58 लोगों की जान बच सकती थी. इस पर नवोजत सिंह सिद्धू की पत्नी ने कहा कि कुछ लोग झूठी तस्वीर बनाने की कोशिश कर रहे है कि मैं वहां बहुत समय तक रही और सबकुछ मेरे सामने हुआ.
"मैं जल्दबाजी में थी और आप जब किसी कार्यक्रम में आधे-एक घंटे गुजारते हैं तो पता चलता कि कार्यक्रम में क्या सही है और क्या ग़लत. आप अंधेरे में जाते हैं और कम वक़्त के लिए जाते हैं तो आप कितना समझ पाएंगे कि क्या सही है और क्या ग़लत."
घटना के बाद स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं. रविवार को प्रदर्शनकारियों ने कई ट्रेनों का आवागमन ठप कर दिया. पंजाब पुलिस का कहना है कि वो मामले की जांच कर रही है और जल्द ही लापरवाही के मामले में ज़िम्मेदारी तय की जाएगी.
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