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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटाई
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटा दी है.
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक संविधान की धारा 14 का उल्लंघन है.
सुप्रीम कोर्ट के जजों ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के मुताबिक हर किसी को, बिना किसी भेदभाव के मंदिर में पूजा करने की अनुमति मिलनी चाहिए.
हालांकि जस्टिस नरीमन ने कहा कि सबरीमाला मंदिर कोई धार्मिक संप्रदाय नहीं है कि वह अपनी पुरानी परंपरा को कायम रखे.
नरीमन ने ये भी कहा कि मंदिर में जैविक आधार पर किसी को मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जा सकता.
वहीं जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हर किसी के लिए एकसमान अधिकार होना चाहिए, नैतिकता का फ़ैसला कुछ लोग नहीं ले सकते.
वहीं जस्टिस इंदू मल्होत्रा की राय अलग थी. उनके मुताबिक कोर्ट को धार्मिक मान्यताओं में दख़ल नहीं देना चाहिए और इसका दूसरे धार्मिक स्थलों पर भी असर पड़ेगा.
केरल के इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश करने पर रोक लगी थी क्योंकि यही वह आयुवर्ग है जिस दौरान महिलाओं को पीरियड्स आते हैं.
लिंग आधारित समानता को मुद्दा बनाते हुए महिला वकीलों के एक समुदाय ने 2006 में कोर्ट में याचिका डाली थी. दरअसल, हिंदू धर्म में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को 'अपवित्र' माना जाता है और कई मंदिर इस कारण महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा देते हैं.
सबरीमाला मंदिर के अधिकारियों ने पहले दावा किया था कि वे इस परंपरा को इसलिए मानते हैं क्योंकि भगवान अयप्पा, जिनका यह मंदिर है, वो "अविवाहित" थे.
प्रतिबंध का समर्थन करने वाले भी तर्क देते हैं कि यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है. वे ये भी तर्क देते हैं कि श्रद्धालुओं को मंदिर में आने के लिए कम से कम 41 दिनों तक व्रत रखना ज़रूरी होता है और शारीरिक कारणों से वे महिलाएं ऐसा नहीं कर सकतीं, जिन्हें पीरियड्स आते हैं.
सबरीमाला मंदिर का महत्व क्या है?
सबरीमाला भारत के प्रमुख हिंदू मंदिरों में एक है. पूरी दुनिया से लाखों श्रद्धालु आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर परिसर में आते हैं.
मंदिर में प्रवेश के लिए तीर्थयात्रियों को 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. मंदिर की वेबसाइट के मुताबिक, इन 18 सीढ़ियों को चढ़ने की प्रक्रिया इतनी पवित्र है कि कोई भी तीर्थयात्री 41 दिनों का कठिन व्रत रखे बिना ऐसा नहीं कर सकता.
श्रद्धालुओं को मंदिर जाने से पहले कुछ रस्में भी निभानी पड़ती हैं. सबरीमाला के तीर्थयात्री काले या नीले रंग के कपड़े पहनते हैं और जब तक यात्रा पूरी न हो जाए, उन्हें शेविंग की इजाज़त भी नहीं होती. इस तीर्थयात्रा के दौरान वे अपने माथे पर चंदन का लेप भी लगाते हैं.
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