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अडल्ट्री पर सबसे कड़ा क़ानून कहाँ है
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अडल्ट्री यानी व्याभिचार को अपराध बताने वाले क़ानूनी प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया है.
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस आर एफ़ नरीमन, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में कहा कि व्याभिचार से संबंधित भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा-497 संविधान के ख़िलाफ़ है.
मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस खानविलकर ने कहा, "हम आईपीसी की धारा-497 और आपराधिक दंड संहिता की धारा-198 को असंवैधनिक क़रार देते हैं."
इसके साथ ही कोर्ट ने साल 1860 में बने इस 158 साल पुराने क़ानून को असंवैधानिक करार दिया.
वरिष्ठ वकील कालेश्वरम राज के अनुसार, 60 से ज़्यादा देशों ने अडल्ट्री पर अपने क़ानून को बीते कुछ ही सालों में बदला है. पहले इन देशों में अडल्ट्री के मामले में सज़ा का प्रावधान था.
बाक़ी देशों के कानून
साल 2015 में दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने भी अडल्ट्री क़ानून को बदल दिया था. पहले वहाँ अडल्ट्री के आरोपी पुरुष को दो साल तक की सज़ा का प्रावधान था.
दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अडल्ट्री का क़ानून किसी व्यक्ति की आत्मनिर्भरता और गोपनीयता का हनन करता है.
अडल्ट्री एक अपराध
शरिया कोर्ट और इस्लामिक क़ानूनों के अनुसार, अडल्ट्री प्रतिबंधित है. इन्हीं क़ानूनों के चलते ईरान, सऊदी अरब, अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और सोमालिया जैसे इस्लामी देशों में अडल्ट्री एक अपराध है.
इन देशों में अडल्ट्री के मामलों में अभियोजन बेहद आम है. कुछ देशों में आरोपी से बड़ा जुर्माना वसूला जाता है. बाकी जगहों पर अडल्ट्री के आरोपी को कारावास और मृत्युदंड भी हो सकता है.
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन देशों में महिलाओं को अत्यधिक टारगेट किया जाता रहा है.
ताइवान में अडल्ट्री के आरोपी को एक साल जेल की सज़ा का प्रावधान है. इंडोनेशिया में भी अडल्ट्री एक अपराध है. यही नहीं, इंडोनेशिया एक ऐसा क़ानून तैयार कर रहा है जो शादी के बाहर किसी भी तरह के यौन संबंधों को प्रतिबंधित करेगा.
न्यूयॉर्क समेत 21 अमरीकी राज्यों में भी अडल्ट्री को अवैध माना जाता है. हालांकि कुछ सर्वेक्षणों से पता चलता है कि ज़्यादातर अमरीकी लोग अडल्ट्री को अस्वीकार करते हैं और इसे अपराध के रूप में नहीं मानते.
कई अन्य देशों की ही तरह ब्रिटेन में भी अडल्ट्री कोई अपराध नहीं है. अडल्ट्री ही ब्रिटेन में तलाक लेने का सबसे बड़ा कारण बताया जाता है.
लेकिन छह महीने से ज़्यादा समय से बतौर दंपति रह रहे लोग अडल्ट्री को तलाक लेने का आधार नहीं बना सकते हैं.
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