अडल्ट्री अब अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया 158 साल पुराना क़ानून

सांकेतिक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने अडल्ट्री यानी व्याभिचार को अपराध बताने वाले क़ानूनी प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया है.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खनविलकर, जस्टिस आरएफ़ नरीमन, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में कहा कि व्याभिचार से संबंधित भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 497 संविधान के ख़िलाफ़ है.

मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस खनविलकर ने कहा,"हम आईपीसी की धारा 497 और आपराधिक दंड संहिता की धारा 198 को असंवैधनिक क़रार देते हैं."

जस्टिस नरीमन ने कहा कि ये क़ानून समानता के अधिकार और महिलाओं को एकसमान अधिकारों के प्रावधान का उल्लंघन है.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अडल्ट्री तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं है.

इसके साथ ही कोर्ट ने 1860 में बने इस 158 साल पुराने क़ानून को असंवैधानिक करार दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि ये क़ानून मनमाना है और समानता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है.

कोर्ट ने क्या-क्या कहा

-स्त्री की देह पर उसका अपना हक है. इससे समझौता नहीं किया जा सकता है.

-यह पितृसत्तात्मक समाज का नतीजा है.

-यह उसका अधिकार है. उस पर किसी तरह की शर्तें नहीं थोपी जा सकती हैं.

-पवित्रता सिर्फ़ महिलाओं के लिए नहीं है और ये समान रूप से पतियों पर भी लागू होती है.

-अडल्ट्री तलाक का आधार बना रहेगा

-वक्त ये कहने का है कि पति महिला का स्वामी नहीं है

-जो प्रावधान किसी व्यक्ति के सम्मान और महिलाओं के समानता के अधिकार को प्रभावित करता है, वो संविधान के लिए सही नहीं है

सुप्रीम कोर्ट फ़ाइल फोटो

इमेज स्रोत, Getty Images

इटली में रहने वाले एनआरआई जोसेफ़ शाइन ने दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. उनकी अपील थी कि आईपीसी की धारा 497 के तहत बने अडल्ट्री क़ानून में पुरुष और महिला दोनों को ही बराबर सज़ा दी जानी चाहिए.

इस याचिका के जवाब में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ऐसा करने के लिए अडल्ट्री क़ानून में बदलाव करने पर क़ानून हल्का हो जाएगा और समाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा. जानकार मानते हैं कि इस फ़ैसले का असर कई और मामलों पर भी पड़ सकता है.

1860 में बना अडल्ट्री क़ानून लगभग 158 साल पुराना था. इसके तहत अगर कोई पुरुष किसी दूसरी शादीशुदा औरत के साथ उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाता है, तो महिला के पति की शिकायत पर पुरुष को अडल्ट्री क़ानून के तहत गुनहगार माना जाता था.

ऐसा करने पर पुरुष को पांच साल की क़ैद और जुर्माना या फिर दोनों ही सज़ा का प्रवाधान था.

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