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'मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे सबके सामने पीटा'
- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"कॉलेज के लॉन में वो सबके सामने मुझे पीट रहा था. वो नहीं देख रहा था कि उसका हाथ कहां पड़ रहा है, लेकिन लॉन में मौजूद कई लोग ये सब देख रहे थे. उसे मेरा किसी दूसरे लड़के से बात करना पसंद नहीं था, इसलिए वो नाराज़ था."
"मैं उससे प्यार करती थी, इसलिए चुप रही. लेकिन फिर ये अक्सर होने लगा. उसे मेरे कपड़े पहनने के ढंग, दोस्तों के साथ उठने-बैठने से एतराज़ था. शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के पांच साल बाद मैं उससे अलग हो गई."
ये बताते हुए आफरीन के आंसू छलक गए. ये कहानी सिर्फ आफ़रीन की नहीं बल्कि कई लड़कियों की है, जिनके बॉयफ्रेंड ने उन्हें शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया.
हाल ही में कोलंबिया की एक अभिनेत्री एलीन मोरेना ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया था. वीडियो में वो रो रही थीं और उनके नाक और होठों से खून बह रहा था. एलीना ने बताया कि उनका ये हाल उनके बॉयफ्रेंड और अभिनेता ऐलेहेंद्रो गार्सिया ने किया है.
वीडियो में वो कह रही थीं, "मैंने उससे सिर्फ़ अपना पासपोर्ट मांगा था, लेकिन उसने मुझे बुरी तरह मारा. अब मैं क्या करूं, आप मेरी मदद करिए."
उन्होंने ये वीडियो सोशल मीडिया पर इसलिए डाला ताकि दूसरी लड़कियां भी सामने आकर अपने साथ हो रहे इस तरह के व्यवहार पर बात करें.
उन्होंने इंस्टाग्राम पर #IDoDenounceMyAggressor नाम का हैशटैग चलाया, जिसका हज़ारों महिलाओं और पुरुषों ने समर्थन किया. कई लोगों ने भी अपनी तस्वीरें साझा कर बताया कि उनके पार्टनर ने भी उनके साथ हिंसा की.
लेकिन लोग हिंसा सहते क्यों हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 15 से 71% महिलाओं के साथ उनके इंटिमेट पार्टनर ने कभी ना कभी शारीरिक या यौन हिंसा या फिर दोनों की होती है. कई बार पुरुष भी पीड़ित होते हैं, लेकिन महिलाओं के मुक़ाबले उनका प्रतिशत काफ़ी कम है.
लेकिन क्या वजह है कि पीड़ित लंबे वक्त तक ये सब सहते रहते हैं?
पीड़ित रिश्ते को बचाने के लिए ये सब सहते हैं. उन्हें उम्मीद होती है कि पार्टनर शायद अगली बार ये नहीं करेगा.
ज़्यादातर मामलों में लड़कियां अपने हिंसक रिश्ते के बारे में दोस्तों और घर वालों को नहीं बताती. उन्हें डर होता है कि दोस्त बाते बनाएंगे और घर वाले तो उन्हें ही ग़लत समझेंगे.
आफ़रीन कहती हैं, "जब कोई पति पत्नी को मारता है तो वो अपने ज़ख्म बाहर वालों से छिपाती है, लेकिन जब कोई बाहर वाला मारे तो जख़्म अपने ही घर वालों से छिपाने होते हैं. ये सबसे ज़्यादा मुश्किल होता है."
"उससे झगड़े और मार-पीट के बाद जब मैं घर जाती थी तो रास्ते भर यही सोचती थी कि अपने बिखरे बाल, रो-रोकर सूज चुकी आंखें और थप्पड़ से लाल गालों को घर वालों से कैसे छिपाऊंगी. घर जाकर तबीयत ख़राब का बहाना बनाना पड़ता था. घर में खुलकर रो भी नहीं सकती थी, इसलिए बाथरूम में घुसकर सिसकियां लेती रहती थी."
अमरीका में इस तरह के पीड़ितों के लिए एक नेशनल डेटिंग एब्यूज़ हेल्पलाइन है, जहां पीड़ित अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के ख़िलाफ़ शिकायत कर सकते हैं. यहां उन्हें भावनात्मक सपोर्ट भी मिलता है. हेल्पलाइन उन्हें ऐसा रिश्ता खत्म करने का तरीका भी बताती है. इस प्रोजेक्ट को अमरीकी सरकार से समर्थन मिला हुआ है.
भारत में ऐसी कोई ख़ास हेल्पलाइन तो नहीं है, लेकिन पीड़ित सामान्य तरीके से थाने में शिकायत कर सकते हैं.
रिश्ता खत्म करने के बाद
कई मामलों में रिश्ता खत्म होने के बाद भी एब्यूज़ ख़त्म नहीं होता. पीड़ित का एक्स बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड उसपर दोबारा रिलेशन में आने या सेक्शुअल फेवर का दबाव बनाता है. कई बार वो उसके घर वालों को सब कुछ बताने या निजी तस्वीरें साझा करने की धमकी दे देता है.
हाल ही में दिल्ली में एक मामला सामने आया, जहां बॉयफ्रेंड के एब्यूज़िव बिहेवियर की वजह से गर्लफ्रेंड ने ब्रेक-अप कर लिया.
लेकिन उस लड़के ने लड़की को परेशान करना जारी रखा. वो उसके घर तक पहुंच गया. उसने उसे एक वीडियो भेजकर धमकी दी कि अगर उसने उससे शादी नहीं कि तो वो उसका भी ऐसा ही हाल करेगा.
उस वीडियो में लड़का किसी दूसरी लड़की को बुरी तरह मार रहा था.
लेकिन लड़की के घर वालों ने उसका साथ दिया, लड़की ने वो वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करके लड़के को बेनकाब कर दिया. जिसके बाद वो वीडियो वायरल हो गया और पुलिस ने लड़के को गिरफ़्तार कर लिया.
सोशल मीडिया के इस ज़माने में ब्लैकमेल के मामले काफी बढ़ गए हैं.
दिल्ली पुलिस के साइबर सलाहकार किसलय चौधरी अपनी खुद की एक साइबर हेल्पलाइन भी चलाते हैं.
वो बताते हैं कि कई लड़कियां हेल्पलाइन पर फोन कर मदद मांगती हैं. उनके पूर्व प्रेमी उनकी निजी तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर या घर के लोगों को भेज देने की धमकी देते हैं.
इसकी एवज में कई बार वो पैसे की मांग करते हैं तो कई बार सेक्शुअल फेवर की.
चौधरी कहते हैं कि लड़कियों को ऐसे मामलों में डरना नहीं चाहिए और पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए.
(पहचान छिपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं.)
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