बीजेपी का पलटवार, राहुल-माल्या के बीच झूठ फैलाने की जुगलबंदी

पीयूष गोयल

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बीजेपी पर आरोप लगाए थे कि विजय माल्या के फ़रार होने के मामले में कोई सांठ-गांठ नज़र आती है.

इन आरोपों के बाद बीजेपी भी सामने आई और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि झूठ फैलाने के लिए राहुल गांधी और विजय माल्या के बीच जुगलबंदी नज़र आती है.

गोयल ने कहा कि 2010 से ही विशेष तौर पर माल्या की किंगफ़िशर एयरलाइंस को कर्ज़ देने के लिए कांग्रेस पार्टी, उसके सांसद और प्रधानमंत्री ने मिलीभगत की. उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2011 में माल्या ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर कर्ज़ देने के लिए धन्यवाद दिया था, साथ ही और राहत की मांग की थी.

उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल किया कि माल्या को क्यों राहत देते हुए इतनी जल्दी-जल्दी कर्ज़ दिया गया, यह वह देश के सामने साफ़ करें.

गोयल ने कहा कि अरुण जेटली साफ़ कर चुके हैं कि कोरिडोर में माल्या ने ख़ुद आकर बात की थी और अगर कोई ज़बरदस्ती बात करके कुछ कहता है तो उस पर बयान देने की कोई ज़रूरत नहीं है.

राहुल गांधी

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'मिलीभगत से भागे माल्या'

राहुल गांधी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर आरोप लगाया था कि उन्होंने विजय माल्या को भारत से भागने दिया और ये सब मिलीभगत से हुआ है.

बुधवार को शराब कारोबारी विजय माल्या ने कहा था कि उन्होंने भारत छोड़ने से पहले अरुण जेटली से मुलाक़ात की थी और उन्हें बताया था कि वो लंदन जा रहे हैं.

माल्या के इस बयान पर अरुण जेटली अपनी सफ़ाई पेश कर चुके हैं. उनका दावा है कि माल्या और उनके बीच कोई औपचारिक मुलाक़ात नहीं हुई थी बल्कि माल्या ने सांसद होने का फ़ायदा उठाया और अनौपचारिक बातचीत की थी.

अब राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि जेटली देश से झूठ बोल रहे हैं.

राहुल गांधी ने कहा, "अरुण जेटली का ये कहना कि विजय माल्या ने उन्हें संसद के गलियारे में अनौपचारिक रूप से बात करने के लिए रोका था और दोनों के बीच कभी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई. ये एकदम झूठ है."

उन्होंने कहा, "ये भी झूठ है कि जब दोनों की संसद में मुलाक़ात हुई तो माल्या उनके पीछे से आये और उनसे दो-तीन शब्द बोलकर चले गए."

सुब्रमण्यन स्वामी

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बीजेपी सांसद ने की जांच की मांग

बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी के मनोनीत राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि विजय माल्या के बयान ने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर संदेह पैदा किया है इसलिए मामले की जांच ज़रूरी है.

बीबीसी से बात करते हुए स्वामी कहते हैं कि संदेह सिर्फ माल्या के वित्त मंत्री से मिलने पर नहीं होता बल्कि वित्त मंत्रालय के उस निर्देश से पैदा होता जिसके तहत माल्या देश छोड़कर लंदन चले गए.

वह कहते हैं कि देश के सभी एयरपोर्ट को पहला निर्देश था कि विजय माल्या अगर आते हैं तो उन्हें बाहर जाने से 'रोका' यानी 'ब्लॉक' किया जाए. मगर बाद में उस आदेश को बदलकर कहा गया कि अगर वो 'विदेश यात्रा' करने एयरपोर्ट आते हैं तो इस बात की सिर्फ़ 'रिपोर्ट' यानी सूचना सरकार को दी जाए.

स्वामी कहते हैं, "दोनों बातें हैं. साल 2015 के 24 अक्टूबर को माल्या के लिए हर एयरपोर्ट पर 'लुक आउट' नोटिस जारी किया गया जिसमें पहले उन्हें रोकने की बात कही गयी थी. बाद में इस नोटिस में संशोधन कर रोकने की बजाय सिर्फ़ सूचना देने की बात कही गयी. दूसरा सच है वित्त मंत्री और विजय माल्या की मुलाक़ात. इस मुलाक़ात के दौरान माल्या ने जेटली को बताया कि वो लंदन जा रहा है."

हमेशा अपने बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले सुब्रमण्यन स्वामी कहते हैं कि अगर माल्या के खिलाफ 'लुक आउट' नोटिस में संशोधन किया गया तो वो ऐसे ही नहीं हुआ होगा, किसी के आदेश पर ऐसा किया गया होगा.

स्वामी कहते हैं, "मैं तो सिर्फ़ जानना चाहता हूं कि किसके आदेश से 'लुक आउट' नोटिस में संशोधन किया गया था और माल्या 54 सूटकेस लेकर हवाई जहाज़ में आसानी से चढ़ गया और भारत छोड़कर चला गया."

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सबूत के तौर पर राहुल पुनिया को लाए

इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह माल्या और जेटली की इस मुलाक़ात के एक प्रत्यक्षदर्शी को साथ लाये हैं और ये कहकर उन्होंने माइक कांग्रेस नेता पी.एल. पुनिया की ओर बढ़ा दिया.

पीएल पुनिया ने दावा किया कि बजट पेश होने के अगले दिन, 1 मार्च 2016 को विजय माल्या और अरुण जेटली की लंबी मुलाक़ात हुई.

उन्होंने कहा, "मैं संसद के सेंट्रल हॉल में बैठा था. मैंने देखा कि अरुण जेटली जी और विजय माल्या अकेले में अंतरंग बातचीत कर रहे थे. कोने में खड़े होकर दोनों बात कर रहे थे. फिर पाँच-सात मिनट बाद दोनों बेंच पर बैठकर बात करने लगे. मुझे याद है कि विजय माल्या उस सत्र में पहली बार संसद आये थे. वह भी अरुण जेटली से मिलने के लिए आए थे."

पुनिया ने दावा किया कि दोनों के बीच क़रीब 20 मिनट चर्चा हुई थी और 3 मार्च 2016 को मीडिया में रिपोर्ट्स छपीं कि विजय माल्या देश छोड़कर लंदन चले गये हैं.

पुनिया ने ये भी कहा कि संसद की सीसीटीवी फ़ुटेज निकालकर इस बात की सच्चाई का पता किया जा सकता है.

मुलाक़ात के सवाल पर सुब्रमण्यन स्वामी का कहना है कि संसद के 'सेंट्रल हॉल' में हुई ये मुलाक़ात कोई छुपी हुई बात नहीं है. वो यह भी कहते हैं कि इस मुलाक़ात के कई सांसद भी गवाह हैं. वो कहते हैं, "इनमें से कांग्रेस के पीएल पुनिया भी हैं."

पीएल पुनिया के बयान पर भी गोयल ने कहा कि उन्हें दो-ढाई साल बाद यह क्यों याद आ रहा है, उन्हें साफ़-साफ़ बताना चाहिए कि वह वहां क्या कर रहे थे क्योंकि वह बयान बदल रहे हैं.

अरुण जेटली मामले पर इस्तीफ़ा मांगे जाने पर नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर पीयूष गोयल ने राहुल गांधी का इस्तीफ़ा मांगा.

वहीं, राहुल ने चुटकी लेते हुए ये भी कहा था कि जेटली जी बड़े लंबे ब्लॉग लिखते हैं, लेकिन उन्होंने बीते ढाई साल में माल्या से हुई मुलाक़ात का कहीं ज़िक्र नहीं किया.

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अरुण जेटली

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राहुल गांधी के दो सवाल

इसके बाद राहुल गांधी ने दो सवाल पूछे. उन्होंने कहा, "वित्त मंत्री भगोड़े से बात करते हैं और भगोड़ा वित्त मंत्री से कहता है कि मैं अब लंदन जाने वाला हूं और वित्त मंत्री इसके बारे में सीबीआई, ईडी और पुलिस को नहीं बताते हैं.''

राहुल गांधी ने दूसरा सवाल पूछा, "जो विजय माल्या के लिए अरेस्ट नोटिस जारी हुआ था, उसको इन्फ़ॉर्म नोटिस में किसने बदला. यह काम वही कर सकता है जो सीबीआई को नियंत्रित करता है."

उन्होंने अरुण जेटली को संबोधित करते हुए कहा कि वह बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, अगर उन्होंने ऐसा किया है या उनसे करवाया गया है तो वह साफ़-साफ़ बता दें.

राहुल ने इसे ओपन एंड शट केस बताते हुए कहा कि भगोड़ा लंदन भागने से पहले वित्त मंत्री से बात करता है और कोरिडोर में बताता है कि वह लंदन जा रहा है, तब भी वित्त मंत्री किसी को नहीं बताते हैं इसलिए अरुण जेटली को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में किसी न किसी तरह की डील हुई है क्योंकि अगर कोई अपराधी कहता है कि वह देश छोड़कर भाग रहा है और आप कुछ नहीं करते तो इसका मतलब है कि आप उसके साथ कोई न कोई सांठगांठ कर रहे हैं.

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